नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली (Delhi) की मंडोली जेल (Mandoli jail) में गुरुवार को एक विचाराधीन कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने से हड़कंप मच गया। मृतक की पहचान शकरपुर निवासी 66 वर्षीय राजेंद्र कुमार जैन के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, राजेंद्र कुमार जैन पिछले करीब सात महीने से जेल में बंद थे। उनकी मौत के बाद परिजनों ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
परिवार का दावा है कि यह सामान्य मौत नहीं बल्कि हत्या का मामला है। परिजनों का आरोप है कि जेल के अंदर राजेंद्र को धमकियां दी जा रही थीं और उनसे 50 हजार रुपये की उगाही की कोशिश की गई थी। बताया जा रहा है कि इस संबंध में राजेंद्र ने अदालत में लिखित शिकायत भी दी थी और मामले से जज को अवगत कराया था।
दिल्ली की मंडोली जेल में विचाराधीन कैदी राजेंद्र कुमार जैन की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक 66 वर्षीय राजेंद्र कुमार जैन हार्डवेयर कारोबारी थे और कन्हैया नगर में अपने परिवार के साथ रहते थे। परिवार मूल रूप से शकरपुर का निवासी है। परिवार ने इस मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जेल के अंदर राजेंद्र को धमकियां दी जा रही थीं और उनसे पैसों की उगाही का दबाव बनाया जा रहा था। परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
परिवार का दावा है कि जेल के भीतर उनसे 50 हजार रुपये की उगाही की मांग की जा रही थी। मृतक के बेटे रोहन के अनुसार, रकम भेजने के लिए एक पेटीएम नंबर भी दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उनके पिता ने कोर्ट में पेशी के दौरान जज के सामने इस उगाही की शिकायत की, तो उसके बाद से जेल प्रशासन उन्हें लगातार परेशान कर रहा था।
रोहन ने बताया कि गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे उनकी अपने पिता से फोन पर बात हो रही थी। बातचीत के दौरान अचानक पिता की आवाज आनी बंद हो गई। उस समय उन्हें बताया गया कि राजेंद्र जैन को चक्कर आ गया है। परिजनों के मुताबिक, इसके बाद शाम करीब 6 बजे पुलिस की ओर से सूचना मिली कि राजेंद्र कुमार जैन की मौत हो चुकी है।
परिजनों के विरोध और हत्या के आरोपों के बाद अब शव का पोस्टमॉर्टम AIIMS में मेडिकल बोर्ड की निगरानी में कराया जाएगा। जानकारी के मुताबिक, शव को शुक्रवार को पहले गुरु तेग बहादुर अस्पताल (GTB अस्पताल) ले जाया गया था, लेकिन मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए परिजनों ने वहां विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रशासन ने मेडिकल बोर्ड से पोस्टमॉर्टम कराने का फैसला लिया।


