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Wednesday, April 15, 2026

भगवान परशुराम जयंती पर इस बार भी एक मंच पर नहीं दिखेगा ब्राम्हण समाज

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क्रासर
अपने-अपने कार्यक्रमों को सफल बनाने में जुटीं समाज की ही दो संस्थाएं
फर्रुखाबाद। भगवान परशुराम जयंती पर इस बार भी ब्राह्मण समाज विभाजित नजर आएगा। एक ओर ब्राह्मण समाज सेवा समिति का कार्यक्रम रखा गया है वहीं दूसरी ओर ब्राह्मण जन सेवा समिति में इस बार भी बद्री विशाल कॉलेज में अपना प्रोग्राम रख दिया है इस प्रोग्राम को लेकर चले कई वर्षों से भगवान ससराम जयंती पर भी विभाजन की रेखा स्पष्ट दिखाई देती है।
दोनों पक्षों में बैठकर कार्यक्रम को एक साथ मनाने के बारे में ब्राह्मण समाज सेवा समिति के तत्कालीन महामंत्री और वर्तमान में अध्यक्ष रमेश चंद्र त्रिपाठी और जन सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष नारायण दुबे व उनके साथियों के साथ बातचीत हुई लेकिन प्रोग्राम एक नहीं हो सका हालांकि दोनों लोगों ने एक दूसरे को एक दूसरे के कार्यक्रम में आने के लिए आमंत्रित किया है।
आगामी 19 अप्रैल को मनाई जाने वाली भगवान परशुराम जयंती को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। ब्राह्मण समाज सेवा समिति की शोभा यात्रा संयोजक एवं अन्य जिम्मेदार घर-घर जाकर यात्रा को सफल बनाने के लिए ब्रह्म समाज के लोगों को आमंत्रित कर रहे हैं।सौरभ मिश्रा को यात्रा का संयोजक बनाया गया है।
ब्राह्मण समाज सेवा समिति के अध्यक्ष रमेश चंद्र त्रिपाठी, महामंत्री लाला राम दुबे व समाज के कई गणमान्य लोग एवं पदाधिकारी उपस्थित रह कर भगवान परशुराम शोभायात्रा के सफल बनाने के लिए जुटे है।

सौरभ मिश्रा ने बताया कि शोभायात्रा अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर शाम 5 बजे पंडा बाग मंदिर से प्रारंभ होकर ब्राह्मण समाज धर्मशाला तक निकाली जाएगी।इसके लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही है।
वहीं दूसरी ओर जन सेवा समिति के तत्वावधान में 19 अप्रैल को ही बद्री विशाल डिग्री कॉलेज में हवन , पूजन, विचार गोष्ठी भंडारा इत्यादि होगा जिसमें संत समाज की मौजूदगी रहेगी इसके लिए संस्था के संस्थापक नारायण दत्त द्विवेदी महिला अध्यक्ष प्रीति पवन तिवारी व अन्य पदाधिकारी तैयारी में जुटे हुए हैं। नारायण दत्त द्विवेदी ने बताया कि सुबह 10:00 बजे से हवन पूजन होगा विचार गोष्ठी होगी और दोपहर 1:00 बजे भंडारा व प्रसाद वितरण होगा ।इस दौरान ईश्वर दास ब्रह्मचारी महाराज ,ओमकार दास ब्रह्मचारी महाराज कमल में महाराज आदि पूजा अर्चना कराएंगे। हालांकि ब्रह्म समाज
में दो संस्थाओं के जरिए किसी विभाजन रेखा स्पष्ट नजर आ रही है।

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