– कैंसर मरीजों की दवाओं में गोलमाल को लेकर कमेटी गठित
लखनऊ। प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में शुमार किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू ) के यूरोलॉजी विभाग में करोड़ों रुपये के दवा घोटाले की आशंका ने स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा दिया है। प्रारंभिक जांच में करीब 2 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।
मामला कैंसर मरीजों को दी जाने वाली महंगी दवाओं और इंजेक्शनों की खपत से जुड़ा बताया जा रहा है। शुरुआती ऑडिट में कई ऐसी विसंगतियां सामने आई हैं, जिन्होंने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में पाया गया कि कुछ इंजेक्शन, जिन्हें सामान्यतः छह माह में एक बार लगाया जाता है, उन्हें रिकॉर्ड में एक ही महीने के भीतर चार से पांच बार उपयोग किया हुआ दर्शाया गया।
सूत्रों के मुताबिक फरवरी और मार्च 2026 के दौरान विभाग में दवाओं और इंजेक्शनों की खपत अचानक बढ़कर 40 से 45 लाख रुपये प्रतिमाह तक पहुंच गई। खपत में आई इस असामान्य वृद्धि ने प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींचा, जिसके बाद बिलों, प्रिस्क्रिप्शन और भुगतान अभिलेखों का ऑडिट कराया गया।
ऑडिट रिपोर्ट में कई गंभीर विसंगतियां सामने आने के बाद संबंधित दवाओं और इंजेक्शनों के भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। जांचकर्ताओं को आशंका है कि कागजी अभिलेखों में दवाओं की खपत बढ़ाकर दिखाने का खेल किया गया हो सकता है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएंगे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कुलपति ने पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। समिति को दवाओं की खरीद, वितरण, उपयोग, भुगतान और रिकॉर्ड के सभी पहलुओं की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि इसमें कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को दी जाने वाली महंगी दवाएं और इंजेक्शन शामिल हैं। यदि जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो यह केवल वित्तीय गड़बड़ी नहीं बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न होगा।
अब सभी की निगाहें पांच सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं। जांच के नतीजे तय करेंगे कि यह महज प्रशासनिक लापरवाही है या फिर चिकित्सा संस्थान के भीतर संगठित वित्तीय अनियमितताओं का कोई बड़ा मामला।


