शमशाबाद, फर्रुखाबाद। सावन का महीना शुरू होते ही प्रकृति और बाजार दोनों का रंग बदल गया है। खेतों में हरियाली की चादर बिछ गई है, आसमान में काले घुमड़ते बादल और रिमझिम फुहारों के बीच मौसम अत्यंत सुहाना हो गया है। इंद्रदेव की मेहरबानी से वातावरण में एक अलग ही आनंद और भक्ति का भाव देखने को मिल रहा है।
सावन के आगमन के साथ ही किसान कृषि कार्यों में व्यस्त हो गए हैं, वहीं व्यापारी वर्ग ने भी अपने-अपने कारोबार को गति दे दी है। धार्मिक दृष्टि से सावन का महीना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
जानकार लोगों के अनुसार सावन में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है। श्रद्धालु ढाई घाट शमशाबाद से गंगाजल भरकर कांवड़ लेकर “बम-बम भोले” के जयकारों के बीच पैदल यात्रा करते हुए भगवान भोलेनाथ के दरबार में जलाभिषेक करते हैं। सावन के सोमवार को विशेष फलदायी माना जाता है। शिवभक्त भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर सुख-समृद्धि एवं मनोकामना पूर्ति की कामना करते हैं।
सावन के साथ ही मिष्ठान की दुकानों पर पारंपरिक मिठाइयों का दौर भी शुरू हो गया है। घेवर, इमरती और खाजे जैसी मिठाइयों की खुशबू से बाजार गुलजार हो उठा है।
फैजबाग कस्बे के प्रतिष्ठित मिष्ठान विक्रेता विक्की सक्सेना ने बताया कि सावन में धार्मिक आयोजनों के दौरान पंचरंगी मिठाइयों के साथ घेवर-इमरती का भोग विशेष रूप से लगाया जाता है। उन्होंने कहा कि रिश्तेदारी में, खासकर बहन-बेटियों के घर जाते समय घेवर ले जाना शुभ माना जाता है।
वहीं अन्य विक्रेताओं अजय कुमार, सुशील कुमार, अंकेश कुमार तथा स्वदेश कुमार ने बताया कि वर्तमान में बाजार में शुद्ध घेवर लगभग 300 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। सावन की बढ़ती मांग को देखते हुए दूध व्यवसाय से जुड़े ग्रामीण दुधिया खोया बनाकर बाजार में उपलब्ध करा रहे हैं, जिसका भाव 250 रुपये प्रति किलो से अधिक पहुंच गया है।


