नवाबगंज: नवाबगंज नगर के बरतल निवासी गौरव कुमार (पुत्र राजपाल), जो पिछले चार माह से नवाबगंज सीएचसी में टीबी का इलाज करवा रहे हैं, गुरुवार सुबह उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजन उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन इमरजेंसी वार्ड में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। इसके बाद परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। कुछ देर बाद फार्मासिस्ट सर्वेश श्रीवास्तव और आलोक कुमार इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे। परिजनों ने आरोप लगाया कि फार्मासिस्ट मरीज का इलाज करने के बजाय रजिस्टर में जानकारी दर्ज करने लगे, जबकि गौरव की हालत गंभीर थी। मरीज को ऑक्सीजन सिलेंडर लगाया गया, लेकिन वह खाली निकला। इस पर परिजनों ने फिर हंगामा किया और खाली सिलेंडर फेंक दिया।
हंगामे के बाद स्टोर रूम से ऑक्सीजन का दूसरा सिलेंडर लाया गया। इसे लगाने के दौरान रिच (रेंच) न मिलने पर फार्मासिस्ट इधर-उधर भटकते नजर आए। कुछ देर बाद रिच मिलने पर दूसरा ऑक्सीजन सिलेंडर बदला गया और मरीज को लगाया गया। अस्पताल में लगातार हंगामा होता देख लोगों ने पुलिस को सूचना दी। सिपाही नंदलाल अपने साथी के साथ मौके पर पहुंचे और परिजनों से जानकारी ली। पुलिस के पहुंचने के बाद हंगामा शांत हुआ। प्राथमिक उपचार के बाद गौरव कुमार को बेहतर इलाज के लिए लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया गया। गौरव कुमार के भाई सौरभ कुमार ने बताया कि अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था और जो ऑक्सीजन सिलेंडर लगाया गया था, वह भी खाली था। उन्होंने आरोप लगाया कि काफी हंगामे के बाद दूसरा सिलेंडर लाया गया, तब गौरव कुमार को ऑक्सीजन मिल पाई। परिजनों ने यह भी कहा कि वे पिछले चार माह से गौरव का इलाज इसी सीएचसी में करवा रहे हैं, लेकिन आज ऐसी गंभीर स्थिति में भी उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिली।
थाना प्रभारी राजीव कुमार ने बताया कि हंगामे की सूचना पर पुलिस को मौके पर भेजा गया था।
चार माह से नवाबगंज सीएचसी में टीबी का इलाज करवा रहे गौरव कुमार कि तबीयत अचानक बिगड़ गई


