तीन दशक बाद मिला ऐसा प्रभारी मंत्री जिसने विकास को दी नई दिशा, पर्यटन से उद्योग तक बदलने लगी जिले की तस्वीर
विशेष राजनीतिक विश्लेषण | यूथ इंडिया
फर्रुखाबाद। राजनीति में कुछ चेहरे केवल पद संभालते हैं, जबकि कुछ अपनी कार्यशैली से एक नई राजनीतिक धारा की शुरुआत कर देते हैं। फर्रुखाबाद की राजनीति में उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह की प्रभारी मंत्री के रूप में एंट्री को राजनीतिक गलियारों में ऐसे ही बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है। लंबे समय बाद जिले को ऐसा प्रभारी मंत्री मिला, जिसने बैठकों और औपचारिकताओं से आगे बढ़कर विकास को प्राथमिकता देने का प्रयास किया।
पिछले लगभग तीन दशकों में फर्रुखाबाद को ऐसा प्रभावशाली राजनीतिक नेतृत्व कम ही मिला, जिसकी सरकार और शासन में मजबूत पकड़ दिखाई दे। जयवीर सिंह ने जिले का प्रभार संभालने के बाद प्रशासनिक मशीनरी को विकास के एजेंडे पर केंद्रित किया और कई महत्वाकांक्षी योजनाओं को गति दिलाने की पहल की।
सबसे महत्वपूर्ण पहल खिमसेपुर क्षेत्र को लेकर देखने को मिली। वर्षों से उपेक्षित इस इलाके को औद्योगिक पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार से इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कराना एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि यह योजना पूरी तरह धरातल पर उतरती है तो हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और जिले की आर्थिक तस्वीर बदल सकती है।
जयवीर सिंह के प्रभाव का असर केवल उद्योग तक सीमित नहीं रहा। उनके प्रयासों से जिले की कई करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं को राज्य सरकार से स्वीकृति मिली। सड़क, पर्यटन, धार्मिक स्थल और आधारभूत संरचना से जुड़ी योजनाओं को नई गति मिलने लगी है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री होने के कारण उन्होंने फर्रुखाबाद की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को भी नई पहचान दिलाने का प्रयास किया। अपरा काशी की ऐतिहासिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में नीम करौली धाम, श्रृंगीरामपुर और अन्य धार्मिक स्थलों के विकास के लिए उदारतापूर्वक बजट स्वीकृत कराया। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि घोषित परियोजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं तो फर्रुखाबाद केवल प्रशासनिक बैठकों तक सीमित जिला नहीं रहेगा, बल्कि पर्यटन, संस्कृति और उद्योग के नए मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।
हालांकि लोकतंत्र में किसी भी नेता की वास्तविक पहचान घोषणाओं से नहीं, बल्कि उनके परिणामों से तय होती है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि जयवीर सिंह की पहलें कितनी तेजी से धरातल पर उतरती हैं और फर्रुखाबाद को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचा पाती हैं। लेकिन इतना जरूर है कि उनकी सक्रियता ने जिले की राजनीति में नई चर्चा और नई उम्मीदों को जन्म दिया है।
यदि विकास की यह रफ्तार बनी रही, तो राजनीतिक इतिहास में यह दौर फर्रुखाबाद के लिए एक नए अध्याय के रूप में दर्ज हो सकता है।


