– चकबंदी रद्द होने के बाद प्राधिकारियों का क्षेत्राधिकार समाप्त
– धारा-52(1) की विज्ञप्ति के बाद नए मामले स्वीकार करने पर रोक
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चकबंदी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और चकबंदी प्राधिकारियों द्वारा निर्धारित न्यायिक क्षेत्राधिकार का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों में चकबंदी प्रक्रिया रद्द होने तथा धारा-52(1) की विज्ञप्ति जारी होने के बाद अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई है।
निर्देशों के अनुसार उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम-1953 की धारा-6(1) के तहत किसी गांव में चकबंदी प्रक्रिया रद्द होने की स्थिति में चकबंदी प्राधिकारियों का क्षेत्राधिकार समाप्त हो जाएगा।
धारा-6(2) के प्रावधानों के तहत चकबंदी रद्द होने के बाद विचाराधीन वाद स्वतः उपशमित हो जाएंगे। साथ ही संबंधित गांव के सभी अभिलेख तत्काल तहसील प्रशासन को वापस सौंपने होंगे।
इसके अतिरिक्त अभिलेखों में हुए अंतिम संशोधन आदेशों की प्रमाणित सूचियां आकार पत्र 2-क, 11, 23 भाग-1 एवं 3 तैयार कर अभिलेखागार, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी कार्यालय तथा तहसील में संबंधित राजस्व प्राधिकारियों को भेजी जाएंगी।
निर्देशों में कहा गया है कि ग्राम सभा की भूमि से संबंधित किसी आदेश को रद्द कराने की आवश्यकता होने पर मामला तत्काल जिलाधिकारी को संदर्भित किया जाएगा। चकबंदी आयुक्त ने निर्देशों का पालन नहीं करने वाले चकबंदी प्राधिकारियों एवं अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी है।
चकबंदी अधिनियम की धारा-52(1) के तहत विज्ञप्ति जारी होने के बाद चकबंदी प्राधिकारियों द्वारा नई आपत्तियां, संदर्भ अथवा पुनर्स्थापन प्रार्थना पत्र स्वीकार करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
निर्देश में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के रिट याचिका कौशल किशोर बनाम उप संचालक चकबंदी में दिए गए निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि धारा-52(1) की विज्ञप्ति जारी होने के बाद धारा-48(3) के तहत संदर्भ स्वीकार करना अथवा समाप्त मामलों को पुनर्जीवित करना क्षेत्राधिकार से बाहर माना गया है।
चकबंदी आयुक्त की ओर से स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित कानूनी व्यवस्था का उल्लंघन कर क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर आदेश पारित करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। नए निर्देशों का उद्देश्य चकबंदी प्रक्रिया में पारदर्शिता, अभिलेखों की सुरक्षा और न्यायिक क्षेत्राधिकार का स्पष्ट अनुपालन सुनिश्चित करना है।


