सागर। मध्यप्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब ने कई परिवारों को उजाड़ दिया है। संदिग्ध अवैध शराब पीने से अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 112 लोगों की हालत बिगड़ने पर सागर और भोपाल के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। मृतकों में पिता-पुत्र भी शामिल हैं। कई मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
मामले में शराब ठेकेदार समेत 30 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है। शुरुआती जांच में शराब में मेथेनॉल की मिलावट सामने आई है, हालांकि जहरीली शराब के स्रोत और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।
बंडा क्षेत्र के ग्रामीणों का आरोप है कि ततरवारा गांव से लंबे समय से अवैध शराब की सप्लाई आसपास के गांवों में की जा रही थी। एफआईआर के मुताबिक, सस्ती शराब बताकर ग्रामीणों को ऐसी शराब बेची गई, जिसके सेवन के बाद एक के बाद एक लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। कई लोगों को पहले स्थानीय अस्पताल और फिर सागर व भोपाल रेफर किया गया।
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जांच में मौतों की वास्तविक वजह के साथ शराब के निर्माण, भंडारण और वितरण में शामिल लोगों तथा संबंधित विभागों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।
घटना को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने मौतों का आंकड़ा 50 से अधिक होने का दावा करते हुए पुलिस और प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी सरकार पर हमला बोला है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शराब नेटवर्क के उज्जैन और धार से जुड़े होने का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है।
डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने प्रभावित गांव पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और अधिकारियों से घटना की जानकारी ली। प्रशासन ने मृतकों के अंतिम संस्कार और घायलों के इलाज की व्यवस्था की है। मामले में पुलिस अवैध शराब के पूरे नेटवर्क और मेथेनॉल की आपूर्ति के स्रोत का पता लगाने में जुटी है।


