फर्रुखाबाद। मोहम्मदाबाद थाना क्षेत्र के सकवाई गांव में मारपीट की घटना में घायल रिंकू उर्फ रजनीश शर्मा के मामले को लेकर समाजवादी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को जिला अस्पताल और पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा। सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस अधीक्षक ने उनसे मिलने से इंकार कर दिया, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में नाराजगी है।
जानकारी के अनुसार, सकवाई गांव निवासी रिंकू शर्मा को 15 जून को कथित रूप से कुछ लोगों ने मारपीट कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। मामले में उनकी पत्नी आरती शर्मा ने नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। सपा नेताओं का आरोप है कि घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष चन्द्रपाल सिंह यादव के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल पहले डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचा, जहां घायल रिंकू शर्मा और उनके परिजनों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली गई। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल पीड़ित की पत्नी आरती शर्मा को साथ लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा।
सपा जिला प्रवक्ता राधेश्याम सविता ने बताया कि पुलिस अधीक्षक से मिलने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रतिनिधिमंडल को समय नहीं दिया गया। इस पर सपा नेताओं ने नाराजगी जताते हुए प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए।
जिलाध्यक्ष चन्द्रपाल सिंह यादव ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष को अपनी बात रखने और पीड़ितों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों का यह रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
समाजवादी लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संदीप विश्वकर्मा ने प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया। वहीं प्रदेश सचिव एवं पूर्व लोकसभा प्रत्याशी डॉ. नवल किशोर शाक्य ने पुलिस अधीक्षक के व्यवहार की आलोचना की।
पूर्व विधायक जमालुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि घटना गंभीर है और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए। पूर्व विधायक उर्मिला राजपूत ने कहा कि यदि पीड़ितों की बात भी नहीं सुनी जाएगी तो यह न्याय व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
प्रतिनिधिमंडल में पूर्व जिलाध्यक्ष रामसेवक सिंह यादव, प्रदेश सचिव मनोज मिश्रा, जिला उपाध्यक्ष अजीत यादव, जिला पंचायत सदस्य नरेंद्र शाक्य, जिला महासचिव इलियास मंसूरी समेत बड़ी संख्या में सपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
हालांकि इस संबंध में पुलिस प्रशासन की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।


