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Saturday, June 13, 2026

सील करो, फिर खोल दो… आखिर कब रुकेगा मौत का यह खेल

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प्रसूता की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग पर उठे गंभीर सवाल

फर्रुखाबाद

निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बजरिया रोड स्थित एक नर्सिंग होम में उपचार के दौरान प्रसूता संध्या सिंह की मौत हो गई। संध्या मैनपुरी जनपद के कुरावली कस्बे निवासी संदीप कुमार की पत्नी थीं, जिन्हें प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ऑपरेशन के बाद उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया, लेकिन दो दिन बाद अचानक उनकी हालत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई।

घटना से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। तीन चिकित्सकों के पैनल द्वारा वीडियोग्राफी के साथ पोस्टमार्टम कराया गया, लेकिन मौत का कारण स्पष्ट न होने पर बिसरा सुरक्षित कर जांच के लिए भेज दिया गया है। मामले में अस्पताल की ओटी को सील कर दिया गया है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक ऐसे ही मरीजों की जान जाती रहेगी और स्वास्थ्य विभाग केवल सीलिंग की औपचारिकता निभाता रहेगा? जिले में कई अस्पताल पहले भी सील हुए, लेकिन कुछ समय बाद फिर से संचालित होने लगे। यदि अस्पतालों में गंभीर खामियां थीं तो उनके संचालकों पर अब तक कोई ठोस और स्थायी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

एक बेटी के जन्म की खुशी कुछ ही घंटों में मातम में बदल गई, लेकिन व्यवस्था फिर वही पुराना रास्ता अपनाती दिखाई दे रही है। जनता पूछ रही है कि क्या हर मौत के बाद सिर्फ अस्पताल सील होगा, या फिर इस बार जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होगी जो भविष्य में किसी और परिवार को इस दर्द से बचा सके।

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