लखनऊ: पेपर लीक (paper leaks), भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर दिल्ली (Delhi) से लखनऊ (Lucknow) तक निकाली गई सत्याग्रह पदयात्रा रविवार को लखनऊ पहुंचकर संपन्न हुई। पदयात्रा पूरी करने के बाद युवा कार्यकर्ता लकी मौर्य और मनीष मौर्य ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के साथ इको गार्डन में संयुक्त प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान सरकार से निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली, समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया और शिक्षा पर सार्वजनिक निवेश बढ़ाने की मांग उठाई गई।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह पदयात्रा नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे आंदोलन और भूख हड़ताल के समर्थन में निकाली गई है। उनका कहना था कि बार-बार पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में देरी और रिक्त पदों को लंबे समय तक नहीं भरने से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
आइसा लखनऊ विश्वविद्यालय के अध्यक्ष शांतम निधि ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं केवल तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के गहरे संकट का परिणाम हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक शिक्षा को कमजोर किया जा रहा है, जबकि परीक्षाओं और कोचिंग व्यवस्था का लगातार विस्तार हो रहा है। आइसा के प्रदेश उपाध्यक्ष समर ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लाखों अभ्यर्थी वर्षों से भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और देरी का सामना कर रहे हैं।
पदयात्रा का नेतृत्व करने वाले मनीष मौर्य ने कहा कि प्रत्येक पेपर लीक लाखों छात्रों की मेहनत और परिवारों की आर्थिक उम्मीदों पर चोट करता है। वहीं लकी मौर्य ने कहा कि परीक्षा रद्द होने या वर्षों तक लटकने से युवाओं का समय, संसाधन और भविष्य प्रभावित होता है। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा पर कुल बजट का 10 प्रतिशत खर्च करने, शिक्षक भर्ती परीक्षाएं नियमित रूप से आयोजित करने, पारदर्शी एवं समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने, पेपर लीक मामलों में सख्त कार्रवाई करने तथा परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की मांग की। प्रदर्शन के अंत में विद्यार्थियों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर आंदोलन को मजबूत करने का आह्वान किया गया।


