– 10 करोड़ की परियोजना पर भ्रष्टाचार का साया!
– राजनीतिक रूप से ‘अनाथ’ विधानसभा की सड़कें विकास नहीं
– बदहाली की कहानी बयां कर रही हैं
फर्रुखाबाद। जनपद की सबसे महत्वपूर्ण सड़कों में शामिल सातनपुर नवीन आलू मंडी रोड इन दिनों सुर्खियों में है, लेकिन विकास के लिए नहीं, बल्कि धीमी रफ्तार, घटिया निर्माण और कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण। लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही यह सड़क पिछले करीब तीन माह से कछुआ चाल से आगे बढ़ रही है। हालत यह है कि निर्माण कार्य जितना आगे बढ़ रहा है, उससे अधिक सवाल उसकी गुणवत्ता और निगरानी पर खड़े हो रहे हैं।
फर्रुखाबाद की अर्थव्यवस्था में आलू उत्पादन की अहम भूमिका है। जिले में प्रतिवर्ष 10 से 12 लाख मीट्रिक टन के आसपास आलू का उत्पादन होता है और सैकड़ों कोल्ड स्टोरेज तथा बड़ी संख्या में व्यापारी इस कारोबार से जुड़े हैं। सातनपुर नवीन आलू मंडी किसानों और व्यापारियों के लिए प्रमुख केंद्र है। ऐसे में इस सड़क से प्रतिदिन सैकड़ों ट्रक, डीसीएम, ट्रैक्टर-ट्रॉली और हजारों छोटे वाहन गुजरते हैं। इसके बावजूद निर्माण कार्य की रफ्तार इतनी धीमी है कि लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण में मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। कई स्थानों पर अधूरी खुदाई, असमान सतह, धूल के गुबार और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि अभी तकनीकी जांच करा ली जाए, तो करोड़ों रुपये के सरकारी धन के दुरुपयोग की तस्वीर सामने आ सकती है।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि करीब 10 करोड़ रुपये की परियोजना की निगरानी आखिर कौन कर रहा है? क्या लोक निर्माण विभाग के अभियंता नियमित निरीक्षण कर रहे हैं? क्या निर्माण सामग्री की लैब जांच हो रही है? क्या कार्य की गुणवत्ता का थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जा रहा है? इन सवालों का जवाब अभी तक किसी जिम्मेदार अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से नहीं दिया है।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सड़क की बदहाल स्थिति के कारण वाहनों का संचालन प्रभावित हो रहा है। धूल से दुकानदार परेशान हैं, जबकि किसानों को अपनी उपज मंडी तक पहुंचाने में अतिरिक्त समय और खर्च उठाना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में यही सड़क कीचड़ और जलभराव का रूप ले सकती है, जिससे स्थिति और गंभीर होने की आशंका है।
यदि सड़क निर्माण में वास्तव में अनियमितताएं हो रही हैं, तो इसका नुकसान केवल सरकारी खजाने को नहीं, बल्कि वर्षों तक इस सड़क का उपयोग करने वाली जनता को भी उठाना पड़ेगा। एक बार घटिया सड़क बन गई तो कुछ वर्षों में फिर मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होंगे और इसका बोझ अंततः जनता पर ही पड़ेगा।
स्थानीय लोगों नें मांग की है कि इस परियोजना की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की स्वतंत्र लैब जांच हो, कार्य की थर्ड पार्टी ऑडिट कराई जाए और पूरे निर्माण कार्य की प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। यदि कहीं भी वित्तीय या तकनीकी अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों, निर्माण एजेंसी और संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।


