27 C
Lucknow
Sunday, August 23, 2026

सुशासन के दावे के बीच सियासी निशाने पर पिछली सरकार

Must read

 

शरद कटियार
मिड-डे मील रसोइयों के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की मौजूदा व्यवस्था की तुलना वर्ष 2017 से पहले के दौर से करते हुए सरकार की उपलब्धियों को सामने रखा। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था, गरीबों के लिए संचालित योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा और प्रदेश की बदली छवि का उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी की पूर्व सरकार पर तीखे राजनीतिक प्रहार भी किए।
मुख्यमंत्री का संबोधन केवल योजनाओं की जानकारी तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार की प्राथमिकता गरीब, विद्यार्थी और समाज के कमजोर वर्ग हैं और योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में गरीब परिवारों के बच्चों के सामने शिक्षा हासिल करने के दौरान बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी में तपते रास्तों और कड़ाके की सर्दी के बीच भी कई बच्चे नंगे पैर स्कूल जाने के लिए मजबूर थे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में विद्यार्थियों के लिए यूनिफॉर्म, जूते और स्वेटर जैसी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। सरकार का उद्देश्य केवल बच्चों को विद्यालय तक पहुंचाना नहीं, बल्कि उन्हें पढ़ाई के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना भी है।
यहां मुख्यमंत्री ने सरकार की कार्यशैली को भी इन योजनाओं से जोड़ते हुए कहा कि किसी योजना का परिणाम अचानक नहीं आता। इसके पीछे लगातार समीक्षा, विभागीय समन्वय और योजनाओं को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया होती है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पूर्ववर्ती सरकार की कार्यशैली पर तंज कसते हुए कहा कि वर्तमान सरकार में शासन और प्रशासन के कामकाज के लिए पर्याप्त समय दिया जाता है।
उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब कोई देर से उठे, लंबे समय तक तैयार होने में लगाए और फिर अपनी निजी गतिविधियों में व्यस्त रहे, तो प्रदेश के लिए समय कहां से निकलेगा।
मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी का राजनीतिक संदेश साफ था,वे अपनी सरकार की कार्यसंस्कृति को पिछली सरकारों की कार्यशैली से अलग बताना चाहते थे।
हालांकि लोकतांत्रिक राजनीति में सरकारों के काम का वास्तविक मूल्यांकन केवल आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि योजनाओं के परिणाम, प्रशासनिक कार्यक्षमता और जनता के अनुभव के आधार पर होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनधन खातों के माध्यम से वित्तीय समावेशन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देशभर में करोड़ों लोगों के बैंक खाते खोले गए, जिससे सरकारी योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थियों के खातों तक पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत हुई।
मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती व्यवस्थाओं पर राजनीतिक हमला करते हुए कहा कि जनधन खातों और सीधे भुगतान की व्यवस्था ने सरकारी योजनाओं में बिचौलियों की भूमिका को कम किया है।
इस व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यही है कि सरकारी सहायता सीधे लाभार्थी तक पहुंचे और भ्रष्टाचार तथा अनियमितताओं की गुंजाइश कम हो। डिजिटल भुगतान और बैंकिंग व्यवस्था ने निश्चित रूप से सरकारी योजनाओं के वितरण के तरीके को बदला है, लेकिन इसकी सफलता का अंतिम पैमाना यही है कि पात्र व्यक्ति को समय पर और पूरी सहायता मिले।
मिड-डे मील रसोइयों के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने रसोइयों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। उनके मानदेय को 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये किए जाने की बात कही गई।
इसके साथ ही रसोइयों को सामाजिक सुरक्षा देने की दिशा में दुर्घटना या आपदा की स्थिति में परिवार को दो लाख रुपये की तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की घोषणा की गई।
यह घोषणा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मिड-डे मील व्यवस्था में रसोइयों की भूमिका प्रत्यक्ष है। विद्यालयों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने से लेकर भोजन व्यवस्था को सुचारु रखने तक उनका योगदान रहता है। ऐसे में केवल मानदेय ही नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था भी उनके लिए महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के पुराने दौर को भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक समय प्रदेश में नकल को लेकर ऐसी व्यवस्था बना दी गई थी कि परीक्षा की निष्पक्षता ही सवालों के घेरे में आ गई थी।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह द्वारा प्रदेश को मिली पहचान का उल्लेख करते हुए समाजवादी पार्टी की सरकार पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि नकल की संस्कृति ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और युवाओं की प्रतिभा को नुकसान पहुंचाया।
उनके अनुसार इसका असर प्रदेश की सामाजिक और आर्थिक छवि पर भी पड़ा। उन्होंने कहा कि एक दौर ऐसा था जब प्रदेश के व्यापारी और शिक्षक बाहर जाते थे तो उन्हें अपनी पहचान को लेकर असहज स्थिति का सामना करना पड़ता था।
मुख्यमंत्री के संबोधन का एक महत्वपूर्ण पहलू शिक्षा व्यवस्था रहा। नकल पर रोक, विद्यार्थियों को सुविधाएं और विद्यालयों में बेहतर व्यवस्था,ये सभी बातें तभी सार्थक होंगी, जब इनका असर बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता पर दिखाई दे।
आज उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में चुनौती केवल बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने की नहीं है। चुनौती यह भी है कि विद्यालयों में नियमित उपस्थिति हो, शिक्षण की गुणवत्ता बेहतर हो, बच्चों को पौष्टिक भोजन मिले और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा के लिए किसी तरह की बुनियादी कमी न हो।
इस दृष्टि से मिड-डे मील रसोइयों का सम्मान भी प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की उस कड़ी को पहचानने का अवसर है जो प्रतिदिन हजारों विद्यालयों में बच्चों के भोजन से जुड़ी है।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर जो राजनीतिक हमले किए, वे निश्चित रूप से राजनीतिक विमर्श का हिस्सा हैं। लेकिन प्रदेश के भविष्य के लिए जरूरी यह है कि सरकार और विपक्ष दोनों शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था और गरीब कल्याण जैसे मुद्दों पर आंकड़ों और परिणामों के आधार पर बहस करें।
किस सरकार ने कितना काम किया, इसका फैसला जनता को करना है। राजनीतिक बयान अपनी जगह हैं, लेकिन किसी भी सरकार की असली परीक्षा उसके शासन के परिणामों से होती है।
लखनऊ के मिड-डे मील रसोइयों के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संबोधन तीन बड़े संदेशों के इर्द-गिर्द रहा—गरीब और विद्यार्थियों के लिए योजनाएं, रसोइयों की सामाजिक सुरक्षा और पिछली सरकारों की कार्यशैली पर राजनीतिक हमला।
रसोइयों का मानदेय बढ़ना और दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सहायता जैसी घोषणाएं निश्चित रूप से उनके लिए राहत की बात हैं। वहीं शिक्षा व्यवस्था में सुधार का दावा तभी स्थायी उपलब्धि माना जाएगा, जब प्रदेश का प्रत्येक बच्चा बेहतर शिक्षा, पर्याप्त पोषण और समान अवसर प्राप्त कर सके।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश को आगे ले जाने वाली वास्तविक राजनीति वही होगी, जिसमें नकल के बजाय योग्यता, बिचौलियों के बजाय पारदर्शिता और घोषणाओं के बजाय धरातल पर परिणाम दिखाई दें।
प्रदेश की पहचान नारों से नहीं, उसके बच्चों की शिक्षा, युवाओं के अवसर और गरीब परिवारों की बदलती जिंदगी से बनेगी।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article