शरद कटियार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 19वें रोजगार मेले में 51 हजार से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपना केवल सरकारी भर्ती कार्यक्रम भर नहीं था, बल्कि यह उस नए भारत की तस्वीर पेश करने का प्रयास था, जिसमें युवाशक्ति को देश की सबसे बड़ी पूंजी माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने जिस तरह दुनिया के सामने भारतीय युवाओं की प्रतिभा, तकनीकी क्षमता और ऊर्जा का उल्लेख किया, वह यह संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में भारत की सबसे बड़ी पहचान उसकी युवा आबादी बनने वाली है।
आज दुनिया तेजी से बदल रही है। तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, रक्षा उत्पादन, एविएशन और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्र भविष्य की दिशा तय कर रहे हैं। ऐसे समय में यदि भारत अपनी विशाल युवा आबादी को सही शिक्षा, कौशल और रोजगार से जोड़ने में सफल होता है, तो 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का सपना केवल नारा नहीं, वास्तविकता बन सकता है। प्रधानमंत्री का यह कहना कि दुनिया भारत के युवाओं और तकनीकी प्रगति से प्रभावित है, देश के लिए गर्व का विषय है।
हालांकि केवल रोजगार मेले आयोजित कर देना पर्याप्त नहीं होगा। देश के करोड़ों युवाओं की अपेक्षाएं इससे कहीं अधिक बड़ी हैं। आज भी बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताएं, पेपर लीक, निजी क्षेत्र में अस्थिर नौकरियां और कौशल की कमी जैसी चुनौतियां युवाओं के सामने खड़ी हैं। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी केवल नियुक्ति पत्र बांटने तक सीमित नहीं रह सकती। युवाओं को स्थायी अवसर, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और सुरक्षित भविष्य देना भी उतना ही आवश्यक है।
प्रधानमंत्री ने “ग्लोबल एक्सपोजर” की बात कही, जो बेहद महत्वपूर्ण है। आज भारतीय युवा केवल भारत तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाना चाहता है। दुनिया की बड़ी कंपनियों में भारतीय प्रतिभाओं की बढ़ती भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि भारत के युवाओं में क्षमता की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल सही नीति, आधुनिक शिक्षा और पारदर्शी अवसरों की है।
सरकार यदि सेमीकंडक्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिपबिल्डिंग और एविएशन जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश को जमीन पर उतारने में सफल रहती है, तो निश्चित रूप से लाखों रोजगार पैदा होंगे। लेकिन यह भी ध्यान रखना होगा कि विकास का लाभ गांव, गरीब, मध्यम वर्ग और छोटे शहरों के युवाओं तक समान रूप से पहुंचे।
भारत आज दुनिया का सबसे युवा देश है। यही उसकी सबसे बड़ी ताकत भी है और सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी। यदि यह युवा शक्ति सही दिशा में आगे बढ़ी, तो 2047 का विकसित भारत केवल सरकारी दस्तावेजों में नहीं, बल्कि हर नागरिक के जीवन में दिखाई देगा। लेकिन यदि युवाओं की ऊर्जा को अवसर नहीं मिला, तो यही शक्ति असंतोष में भी बदल सकती है।
इसलिए समय की मांग है कि सरकार, उद्योग जगत और शिक्षा संस्थान मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करें, जहां हर युवा खुद को राष्ट्र निर्माण का सहभागी महसूस करे। क्योंकि विकसित भारत की असली इमारत केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि युवाओं के विश्वास, मेहनत और सपनों से खड़ी होगी।


