लखनऊ। शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक एक्शन सामने आया है। शिक्षा का अधिकार (आरटीई ) कानून के तहत पात्र बच्चों को प्रवेश न देने पर राजधानी के 55 निजी स्कूलों को नोटिस जारी किया गया है। जिला प्रशासन और बेसिक शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि नियमों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, कई स्कूलों द्वारा आरटीई के तहत चयनित बच्चों को प्रवेश देने में टालमटोल की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इसके बाद विभाग ने जांच कर सीधे नोटिस थमा दिए। आदेश में साफ कहा गया है कि पात्र बच्चों को तत्काल प्रवेश दिया जाए, अन्यथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि तय समय में स्कूलों ने जवाब नहीं दिया या नियमों का पालन नहीं किया, तो उनके खिलाफ मान्यता पर कार्रवाई, जुर्माना और अन्य दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।
गौरतलब है कि आरटीई कानून के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25% सीटें आरक्षित होती हैं, लेकिन कई स्कूल इस प्रावधान को लागू करने में आनाकानी करते रहे हैं।
जब कानून स्पष्ट है और बच्चों का हक तय है, तो आखिर हर साल स्कूलों को नोटिस देने की नौबत क्यों आती है? क्या शिक्षा भी अब “चुनिंदा लोगों” तक सीमित हो रही है?
लखनऊ में यह कार्रवाई साफ संकेत है कि प्रशासन अब शिक्षा के अधिकार पर किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा। अब नजर इस पर है कि कितने स्कूल नियमों का पालन करते हैं और कितनों पर वास्तव में कार्रवाई होती है।
आरटीई पर सख्ती: 55 निजी स्कूलों को नोटिस, प्रवेश न देने पर कार्रवाई की चेतावनी


