इंदौर: खजराना पुलिस (Khajrana Police) ने वर्ष 2015 में हुए 17 वर्षीय कृष्णा के अंधे कत्ल का 12 साल बाद सनसनीखेज खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने पहले कृष्णा को लिफ्ट देने के बहाने अपने साथ लिया और फिर खजराना बायपास के पास सुनसान मैदान में ले गए। जहां आरोपियों ने उसके साथ नशा किया और बाद में सोने का लॉकेट, चांदी की चेन-पेंडल और नकदी लूट (Robbery) ली। जब कृष्णा ने लूट का विरोध किया तो आरोपी अकील उर्फ नाइट्रा ने उसके गले पर चाकू से हमला कर दिया। गंभीर चोट और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण कृष्णा की मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपियों ने पुलिस से बचने के लिए मृतक की मोटरसाइकिल समेत अन्य साक्ष्यों को जलाने और छिपाने की कोशिश की थी।
17 अप्रैल 2015 को खजराना थाना क्षेत्र में बायपास के पास 17 वर्षीय कृष्णा का शव मिला था। मामले में थाना खजराना में अपराध क्रमांक 310/2015 के तहत धारा 302 भादवि में केस दर्ज किया गया था। घटना के समय आरोपी अज्ञात थे और पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती हत्यारों की पहचान करना थी। सालों तक यह मामला अनसुलझा रहा, लेकिन पुलिस ने पुराने गंभीर अपराधों की जांच आगे बढ़ाते हुए मुखबिर तंत्र और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई।
11 अगस्त 2026 को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि अकील, आरिफ और परवेज वर्ष 2015 में कृष्णा की हत्या और लूट की वारदात में शामिल थे। सूचना के आधार पर पुलिस ने अकील और आरिफ को राउंडअप कर पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में दोनों ने कृष्णा की हत्या और लूट की वारदात में शामिल होना स्वीकार किया। जांच में सामने आया कि तीसरा आरोपी परवेज भी इस वारदात में शामिल था, लेकिन उसकी मृत्यु हो चुकी है।
पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपियों ने कृष्णा की मोटरसाइकिल से लिफ्ट लेने के बहाने उसे अपने विश्वास में लिया। इसके बाद उसे खजराना बायपास के पास सुनसान मैदान में ले जाया गया। वहां आरोपियों ने उसके साथ नशा किया और मौका देखकर उससे जेवर और नकदी लूट ली। कृष्णा ने जब लूट का विरोध किया तो अकील ने उसके गले पर चाकू से वार कर दिया। वार इतना गंभीर था कि अत्यधिक रक्तस्राव के चलते उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
वारदात के बाद आरोपियों ने पुलिस से बचने के लिए सबूत मिटाने की कोशिश की। पुलिस के मुताबिक मृतक की मोटरसाइकिल समेत अन्य साक्ष्यों को जलाया और कुछ साक्ष्य छिपा दिए गए। इसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस ने अब आरोपियों से लूटे गए सामान में चेन, लॉकेट, मोटरसाइकिल और अन्य सामग्री बरामद की है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अकील उर्फ नाइट्रा पिता इम्तियाज शेख (30), निवासी खजराना, इंदौर, हाल मुकाम महाराष्ट्र और मो. आरिफ उर्फ नाइट्रा पिता मो. शाकिर खिलाफ (30), निवासी खजराना, इंदौर, हाल मुकाम उज्जैन के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी पहले भी लूट, चोरी, मारपीट और अन्य गंभीर अपराधों में शामिल रहे हैं। अकील के खिलाफ इंदौर और उज्जैन के अलग-अलग थानों में कई मामले दर्ज हैं। आरिफ के खिलाफ भी लूट और चोरी के मामले दर्ज बताए गए हैं।
खजराना पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर पुलिस रिमांड पर लिया है। अब आरोपियों से वर्ष 2015 की इस वारदात से जुड़े अन्य साक्ष्यों, संभावित सहयोगियों और उनके द्वारा की गई अन्य वारदातों को लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान पुराने और अन्य मामलों से जुड़े अहम सुराग मिलने की संभावना है।
लंबे समय से लंबित इस गंभीर हत्याकांड का खुलासा करने में थाना प्रभारी मनोज सिंह सेंधव, टूआईसी अनिल गौतम, सउनि राकेश परमार, प्रधान आरक्षक पंकज सांवरिया, आरक्षक जबर सिंह, ऐदल गुर्जर और खजराना थाना पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 12 साल पुराने इस हत्याकांड के खुलासे ने एक बार फिर यह सवाल भी सामने ला दिया है कि अपराध के बाद कितने भी साल बीत जाएं, लेकिन तकनीकी साक्ष्य और पुलिस की लगातार जांच के जरिए पुराने मामलों की कड़ियां जोड़ी जा सकती हैं।


