अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कथित चढ़ावा गबन प्रकरण में विशेष जांच दल (SIT) की कथित गोपनीय रिपोर्ट लीक होने के बाद विवाद और गहरा गया है। रिपोर्ट के सोशल मीडिया पर वायरल होने से सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि जांच एजेंसी की गोपनीय रिपोर्ट आखिर बाहर कैसे आई और इसे किसने सार्वजनिक किया। मामले ने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और जांच प्रक्रिया, दोनों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार वायरल हुई कथित प्रारंभिक रिपोर्ट में दानराशि की गणना प्रक्रिया और कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर कई गंभीर टिप्पणियां दर्ज हैं। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि चढ़ावे की गिनती के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति सामान्य प्रक्रिया के बजाय सिफारिश और मंजूरी के आधार पर की गई। बताया गया है कि इन कर्मचारियों को सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज नामक एजेंसी के माध्यम से लगाया गया था, जबकि एजेंसी का मुख्य कार्यक्षेत्र आउटसोर्सिंग और हाउसकीपिंग सेवाएं बताया जाता है। ऐसे में मंदिर के करोड़ों रुपये के चढ़ावे जैसी संवेदनशील जिम्मेदारी इसी एजेंसी को सौंपे जाने पर सवाल उठ रहे हैं।
रिपोर्ट को लेकर यह दावा भी सामने आया है कि प्रारंभिक जांच में पूर्व अकाउंटेंट महिपाल सिंह और पूर्व इंजीनियर दीनानाथ वर्मा के वीडियो बयानों का उल्लेख नहीं किया गया है। साथ ही, वायरल रिपोर्ट में तत्कालीन महामंत्री चंपत राय के नाम का किसी भी संदर्भ में उल्लेख नहीं होने की बात भी कही जा रही है। इससे जांच की निष्पक्षता और दायरे को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि रिपोर्ट की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और वायरल दस्तावेज की प्रामाणिकता की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की जांच जारी है। रिपोर्ट के लीक होने और उसमें किए गए दावों को लेकर अब जांच एजेंसियों और ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक स्थिति का इंतजार किया जा रहा है।


