अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित चढ़ावा गबन और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच मंगलवार को नया मोड़ आ गया। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने दावा किया कि वह केवल नाममात्र के कोषाध्यक्ष थे, जबकि ट्रस्ट के बैंक खातों का वास्तविक संचालन तत्कालीन महामंत्री चंपत राय के नियंत्रण में था। उनके इस बयान के सामने आने के बाद ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था, अधिकारों के बंटवारे और जवाबदेही को लेकर कई नए सवाल खड़े हो गए हैं।
स्वामी गोविंद देव गिरी ने कहा कि ट्रस्ट के बैंक खातों के संचालन की पूरी व्यवस्था चंपत राय ने ही बनाई थी और वही बैंकिंग से जुड़े निर्णय लेते थे। उनका कहना है कि कागजों पर वह कोषाध्यक्ष जरूर थे, लेकिन बैंक खातों के संचालन और वित्तीय लेन-देन में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कथित गबन या वित्तीय अनियमितताओं से उनका कोई संबंध नहीं है और इसी कारण वह अपने पद से इस्तीफा देने का कोई कारण नहीं देखते।
कोषाध्यक्ष के इस बयान के बाद राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर बहस तेज हो गई है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े चढ़ावे और ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठने लगे हैं। कई पक्षों ने मांग की है कि ट्रस्ट के बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और निर्णय प्रक्रिया की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कराई जाए, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि स्वामी गोविंद देव गिरी के बयान ट्रस्ट के अंदरूनी पक्ष को दर्शाते हैं। इन दावों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और जांच एजेंसियों की आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार है। मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय होगी।


