जयंती पर सामाजिक क्रांति दिवस के रूप में याद किए गए महामना राम स्वरूप वर्मा, वक्ताओं ने गिनाए संघर्ष और विचार
कानपुर। सामाजिक न्याय समतामूलक समिति के तत्वावधान में महामना राम स्वरूप वर्मा की जयंती सरदार पटेल आश्रम गेस्ट हाउस, बर्रा-2 के सभागार में सामाजिक क्रांति दिवस के रूप में मनाई गई। समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व सांसद राजा राम पाल ने राम स्वरूप वर्मा के जीवन और संघर्षों पर प्रकाश डालते हुए उन्हें समता और सामाजिक न्याय का अग्रदूत बताया।
पूर्व सांसद राजा राम पाल ने कहा कि राम स्वरूप वर्मा का मानना था कि जिन लोगों में समता की चाह नहीं होती, वे कभी अच्छे इंसान नहीं बन सकते। उन्होंने सामाजिक न्याय और समानता के आंदोलन को मजबूत करते हुए ‘दो बातें हैं मोटी-मोटी, सबको इज्जत, सबको रोटी’ का नारा बुलंद किया।
उन्होंने कहा कि राम स्वरूप वर्मा ने सामाजिक कुरीतियों, भेदभाव, छुआछूत, मृत्युभोज, दहेज और जाति व्यवस्था के खिलाफ जीवनभर संघर्ष किया। इन कुरीतियों के उन्मूलन के लिए उन्होंने अर्जक संघ की स्थापना कर सामाजिक चेतना का अभियान चलाया।
राजा राम पाल ने कहा कि जब राम स्वरूप वर्मा उत्तर प्रदेश सरकार में वित्त मंत्री बने, तब उन्होंने पहली बार घाटे के बजाय मुनाफे का बजट पेश कर ईमानदारी, आर्थिक अनुशासन और दृढ़ संकल्प की मिसाल कायम की।
समारोह की अध्यक्षता बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राधेश्याम कटियार ने की। इस अवसर पर बौद्ध धनीराम पैंथर, कमलेश कटियार, सीएल गौतम, अतर सिंह, ऊषा देवी, रमेश चंद्र अर्जक और सीपी सचान ने राम स्वरूप वर्मा के जीवन दर्शन और सामाजिक आंदोलन में उनके योगदान पर विचार रखे।
कार्यक्रम में डॉ. अनिल कटियार, शैलेंद्र पटेल, कुर्मी क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष प्रदीप कटियार, उदयराज सिंह, अतुल सचान, कैलाश उमराव, मनोज कटियार, पावेन्द्र पटेल, सुनील यादव, राजेश आजाद, धीरेन्द्र कुशवाहा, अरविंद उमराव, केदारनाथ सचान, राजेंद्र वर्मा, यशपाल सचान, प्रदीप भैया, कवयित्री प्रतिमा उमराव, गीता पटेल, ममता सचान, सविता उत्तम, प्रीती पटेल और नीरजा कटियार सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन अधिवक्ता शशिकांत सचान ने किया।


