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Saturday, June 13, 2026

राम मंदिर चढ़ावा गड़बड़ी मामला: एसआईटी गठित, चढ़ावा गिनने वाला कर्मचारी हिरासत में, जांच तेज

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अयोध्या। राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे में कथित वित्तीय गड़बड़ियों के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी ) का गठन कर दिया है। वहीं, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी ) ने चढ़ावे की गणना से जुड़े एक कर्मचारी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दान पेटियों और अन्य माध्यमों से दिए गए चढ़ावे के हिसाब-किताब में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। प्रारंभिक जांच में कुछ संदिग्ध लेन-देन और रिकॉर्ड में अंतर पाए जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं।

सूत्रों के मुताबिक हिरासत में लिया गया युवक चढ़ावे की गणना और नकदी प्रबंधन की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ था। जांच एजेंसियां उससे यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि कथित गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और इसमें अन्य लोगों की भूमिका तो नहीं है। जांच के दायरे में मंदिर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, बैंकिंग लेन-देन और चढ़ावा गणना की पूरी प्रक्रिया को शामिल किया गया है।

प्रदेश सरकार ने मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए SIT का गठन किया है। वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में गठित यह टीम पूरे घटनाक्रम की तह तक जाएगी और दोषियों की जिम्मेदारी तय करेगी। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि धार्मिक आस्था से जुड़े किसी भी संस्थान में वित्तीय पारदर्शिता से समझौता नहीं किया जाएगा।

राम मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मंदिर निर्माण के बाद से यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और बड़ी मात्रा में दान व चढ़ावा भी प्राप्त हो रहा है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़ी किसी भी अनियमितता को अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है।

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दल जहां पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं, वहीं प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी।

फिलहाल एसआईटी और एसओजी की संयुक्त कार्रवाई जारी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद मामले में और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। प्रदेश सरकार ने संकेत दिए हैं कि यदि किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता साबित होती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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