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Sunday, April 19, 2026

राम मंदिर परिसर में भव्य पंचवटी तैयार, श्रद्धालुओं को मिलेगा वनवास काल जैसा आध्यात्मिक अनुभव

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अयोध्या

भव्य राम मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से जोड़ने के लिए विकसित की जा रही 10 एकड़ क्षेत्र में फैली पंचवटी अब लगभग पूरी तरह तैयार हो चुकी है। यह विशेष उद्यान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनवास काल की स्मृतियों को जीवंत करने के उद्देश्य से बनाया गया है, जहां आने वाले श्रद्धालु प्रकृति, संस्कृति और आस्था का अद्भुत संगम अनुभव कर सकेंगे।
पंचवटी को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि यहां प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को रामायण काल का वातावरण महसूस हो। पूरे क्षेत्र को हरियाली से आच्छादित किया गया है, जिसमें पारंपरिक शैली के वृक्ष, प्राकृतिक पगडंडियां, शांत विश्राम स्थल और तपोवन जैसी अनुभूति देने वाला वातावरण विकसित किया गया है। उद्यान में विशेष रूप से ऐसे वृक्ष लगाए गए हैं, जिनका उल्लेख रामायण और भारतीय संस्कृति में मिलता है तथा जिनका धार्मिक और औषधीय महत्व भी है।
इस भव्य परियोजना को विकसित करने का कार्य जीएमआर कंपनी द्वारा किया गया है। राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि पंचवटी केवल एक उद्यान नहीं, बल्कि रामायण युग की जीवनशैली का जीवंत प्रतीक होगी, जहां पांच प्रकार के विशेष औषधीय वृक्ष लगाए गए हैं।
पंचवटी की सबसे बड़ी विशेषता यहां निर्मित किया जा रहा आकर्षक जलाशय है, जिसका निर्माण अंतिम चरण में है और इस माह के अंत तक इसके पूरा होने की संभावना है। यह जलाशय न केवल परिसर की सुंदरता को बढ़ाएगा, बल्कि पक्षियों और वन्य जीवों के संरक्षण के साथ-साथ प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में भी सहायक सिद्ध होगा। श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान ध्यान, साधना और मानसिक शांति का प्रमुख केंद्र बनेगा।
इसी बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 29 अप्रैल को अयोध्या दौरे को लेकर तैयारियां भी तेज हो गई हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री राम मंदिर परिसर के परकोटा में स्थित शिव मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण करेंगे। उनका यह दौरा धार्मिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें वे लगभग दो घंटे तक अयोध्या में प्रवास करेंगे।
राम मंदिर परिसर में विकसित हो रही यह पंचवटी न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगी, बल्कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक पर्यटन का एक नया आकर्षण भी साबित होगी, जहां वे रामायण काल की झलक के साथ प्रकृति की गोद में आत्मिक शांति का अनुभव कर सकेंगे।

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