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Monday, June 1, 2026

राफेल डील: आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति की ओर बढ़ता भारत

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शरद कटियार

भारत द्वारा 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए फ्रांस को भेजा गया 3.25 लाख करोड़ रुपये का प्रस्ताव केवल एक रक्षा सौदा नहीं, बल्कि देश की सामरिक सोच, आत्मनिर्भरता की नीति और भविष्य की सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण संकेत है। ऐसे समय में जब दुनिया तेजी से बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और आधुनिक युद्ध तकनीकों का सामना कर रही है, भारत का अपनी वायु शक्ति को मजबूत करने का निर्णय दूरदर्शी और आवश्यक माना जाना चाहिए।

भारतीय वायु सेना लंबे समय से लड़ाकू विमानों की कमी का सामना कर रही है। कई पुराने विमान अपने सेवा जीवन के अंतिम चरण में हैं, जबकि क्षेत्रीय चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में अत्याधुनिक राफेल विमानों की संख्या में बड़ा इजाफा न केवल वायु सेना की परिचालन क्षमता बढ़ाएगा बल्कि देश की सामरिक प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करेगा। राफेल ने पहले ही अपनी क्षमताओं को साबित किया है और भारतीय वायु सेना का भरोसा भी जीता है।

इस सौदे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि 114 में से 94 विमान भारत में बनाए जाएंगे। यह केवल विमानों का निर्माण नहीं होगा, बल्कि तकनीक, कौशल, रोजगार और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भारत की क्षमता निर्माण का अवसर भी होगा। वर्षों से भारत रक्षा उपकरणों का बड़ा आयातक रहा है। यदि इस परियोजना के माध्यम से तकनीकी हस्तांतरण और स्थानीय उत्पादन को वास्तविक रूप से बढ़ावा मिलता है, तो यह देश को आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग की दिशा में एक बड़ी छलांग दिला सकता है।

हालांकि, इतने बड़े सौदे के साथ जवाबदेही और पारदर्शिता की जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। करदाताओं के धन से होने वाले इस निवेश में लागत, समय-सीमा, गुणवत्ता और तकनीकी लाभों पर लगातार निगरानी आवश्यक होगी। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि यह सौदा केवल खरीद तक सीमित न रहे, बल्कि भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को स्थायी रूप से मजबूत करे।

साथ ही, यह भी ध्यान रखना होगा कि केवल विदेशी लड़ाकू विमानों की खरीद से आत्मनिर्भरता का लक्ष्य पूरा नहीं होगा। राफेल जैसे आधुनिक विमानों के साथ-साथ स्वदेशी परियोजनाओं, विशेषकर एएमसीए और तेजस कार्यक्रमों को भी समान गति और संसाधन मिलने चाहिए। भारत की वास्तविक शक्ति तब बढ़ेगी जब वह आधुनिक हथियारों का उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि निर्माता और निर्यातक भी बनेगा।

राफेल सौदा भारत की सुरक्षा जरूरतों और आत्मनिर्भरता की महत्वाकांक्षा के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बन सकता है। अब चुनौती इस अवसर को दीर्घकालिक राष्ट्रीय शक्ति में बदलने की है।

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