– पूर्व पीएम के सलाहकार प्रो. शर्मा ने जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने पर दिया जोर
– भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने की कार्यशाला की अध्यक्षता
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, जल संरक्षण और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर आयोजित दो दिवसीय ‘जल मंथन’ कार्यशाला में देश के भविष्य के जल संकट पर गंभीर मंथन हुआ। कार्यशाला की अध्यक्षता भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने की। इसमें भाजपा शासित 14 राज्यों के 25 जल शक्ति मंत्रियों ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला का आयोजन भाजपा के सुशासन एवं नीति अनुसंधान विभाग की ओर से किया गया। इसमें जल संसाधनों की मौजूदा स्थिति, जल संरक्षण, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, मंत्रियों की कार्यप्रणाली तथा सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया।
प्रो. एच. एन. शर्मा ने खींचा विशेष ध्यान
‘जल मंथन’ में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के राजनीतिक सलाहकार रहे प्रो. एच. एन. शर्मा ने भविष्य में गहराते जल संकट की चुनौतियों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की 1983 की भारत यात्रा के दौरान सामने आए ग्रामीण क्षेत्रों के जल संकट के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि दशकों पहले जिस समस्या की गंभीरता महसूस की गई थी, वह आज कहीं अधिक बड़ी चुनौती बन चुकी है।
प्रो. शर्मा ने जल संकट को केवल वर्तमान की समस्या न मानते हुए इसे आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा सवाल बताया। उन्होंने बदलते पर्यावरणीय हालात और जल संकट से जुड़ी घटनाओं को चेतावनी के रूप में देखने की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी विभागों और योजनाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके लिए जनभागीदारी को बढ़ावा देते हुए जल संरक्षण को सामाजिक आंदोलन का रूप देना होगा।
प्रो. शर्मा ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने वर्षों पहले ही देश में पानी की समस्या की गंभीरता को समझ लिया था। उनकी भारत यात्रा के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की कठिनाइयों ने उन्हें इस विषय पर गंभीरता से सोचने के लिए प्रेरित किया था।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज उपलब्ध जल संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ भूजल स्तर, वर्षा जल संचयन, जल के पुन: उपयोग और भविष्य की जरूरतों पर भी ठोस रणनीति तैयार करना जरूरी है।
कार्यशाला में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने जल संरक्षण के लिए सरकार और संगठन को मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी दिखाई देगा, जब उनका प्रभावी क्रियान्वयन और जमीनी स्तर पर निगरानी सुनिश्चित हो। जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की आवश्यकता पर भी उन्होंने जोर दिया।
कार्यशाला में मंत्रियों को जल क्षेत्र की योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू करने, विभागीय कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाने और केंद्र तथा राज्यों के बीच समन्वय मजबूत करने के विषय में विशेषज्ञ मार्गदर्शन दिया गया।
‘जल मंथन’ में विभिन्न राज्यों के जल शक्ति मंत्रियों ने अपने-अपने राज्यों में जल प्रबंधन और संरक्षण को लेकर किए जा रहे प्रयासों तथा सामने आ रही चुनौतियों पर भी चर्चा की। सिंचाई, ग्रामीण पेयजल, पेयजल एवं स्वच्छता तथा लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी जैसे जल से जुड़े विभागों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने पर भी मंथन हुआ।
‘जल मंथन’ का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही रहा कि देश के सामने बढ़ती जल चुनौती को केवल सरकारी योजना मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। प्रो. एच. एन. शर्मा द्वारा चंद्रशेखर की वर्षों पुरानी दूरदृष्टि को वर्तमान परिस्थितियों से जोड़ना इस पूरे मंथन का महत्वपूर्ण पक्ष रहा।
जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और पानी के विवेकपूर्ण इस्तेमाल को लेकर अब सरकार, संगठन और समाज,तीनों की संयुक्त भूमिका जरूरी है। तभी आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।


