30 C
Lucknow
Friday, September 4, 2026

फर्रुखाबाद में बदलती प्रशासनिक सोच, अब व्यवस्था फाइलों से नहीं, परिणामों से पहचानी जाएगी

Must read

 

– डीएम डॉ. अंकुर लाठर की पहल में दिख रही नागरिक-केंद्रित प्रशासन की नई तस्वीर
– दुनिया के आधुनिक प्रशासनिक मॉडलों जैसी जवाबदेही और तकनीक पर जोर
शरद कटियार
फर्रुखाबाद। किसी जिले का प्रशासन केवल सरकारी कार्यालयों, बैठकों और आदेशों से नहीं चलता। प्रशासन की असली पहचान तब बनती है, जब आम नागरिक को यह महसूस हो कि व्यवस्था उसकी समस्या को समझती है, उसे समय पर सुनती है और समाधान तक पहुंचाती है।

फर्रुखाबाद में जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर की कार्यशैली इसी बदलती प्रशासनिक सोच की ओर संकेत करती दिखाई दे रही है। उनका जोर केवल योजनाओं को लागू करने तक सीमित नहीं, बल्कि जिले की व्यवस्थाओं को अधिक सुसंगठित, जवाबदेह, तकनीक-सक्षम और परिणाम आधारित बनाने की दिशा में दिखाई देता है।

यह वही सोच है जिसने दुनिया के कई विकसित देशों की प्रशासनिक व्यवस्थाओं को पारंपरिक सरकारी ढांचे से निकालकर नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था की ओर पहुंचाया है।
दुनिया के आधुनिक प्रशासनिक मॉडल में एक बात लगातार महत्वपूर्ण हुई है,सरकार नागरिक से यह नहीं कहती कि वह व्यवस्था को खोजता फिरे, बल्कि कोशिश होती है कि सेवाएं नागरिक के अधिकतम करीब पहुंचें।

डॉ लाठर के प्रयास डिजिटल सेवाएं, एकीकृत शिकायत प्रणाली, आंकड़ों के आधार पर निर्णय, समयबद्ध निस्तारण और अधिकारियों की जवाबदेही आज आधुनिक प्रशासन के महत्वपूर्ण आधार हैं।
फर्रुखाबाद में भी यदि प्रशासनिक व्यवस्था को इसी दिशा में आगे बढ़ाया जाता है तो इसका सीधा लाभ आम नागरिक को मिल सकता है।
जिलाधिकारी की पारंपरिक भूमिका कानून-व्यवस्था, विकास योजनाओं और विभागीय समन्वय तक देखी जाती रही है। लेकिन बदलते समय में एक सक्षम जिलाधिकारी की भूमिका इससे कहीं आगे बढ़ती दिख रही है।जिसमे यह देखना होता है कि पूरी प्रशासनिक मशीनरी कितनी तेजी से काम कर रही है, निर्णय कितने तथ्यपरक हैं और जनता तक उसका परिणाम कितना पहुंच रहा है।
डॉ. अंकुर लाठर की कार्यशैली में इसी तरह की व्यवस्था-केंद्रित सोच को प्रमुखता मिलती दिखाई देती है।
आधुनिक प्रशासन में अनुमान की जगह आंकड़ों ने जगह ली है स्कूलों की स्थिति, स्वास्थ्य सेवाएं, सफाई व्यवस्था , पेयजल, राजस्व संबंधी मामले या विकास योजनाएं, डाटा आधारित निगरानी विभागवार प्रदर्शन हर क्षेत्र में डीएम डॉ. लाठर की भूमिका महत्वपूर्ण दिख रही है।
पुरानी व्यवस्था में अधिकारी निरीक्षण करते थे, रिपोर्ट बनती थी और उसके बाद कार्रवाई होती थी।नई प्रशासनिक सोच इससे आगे दिखती नजर आ रही है।
जिलाधिकारी की सोच कि ,स्थिति क्या है?
समस्या कहां है?जिम्मेदार कौन है?कार्रवाई कब तक होगी?
और परिणाम क्या आया?
यही पांच सवाल किसी भी आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ बन सकते हैं।
यदि इन सवालों के जवाब डिजिटल रिकॉर्ड और नियमित समीक्षा के माध्यम से उपलब्ध होने की व्यवस्था आने वाले दौर मे प्रशासन को केवल प्रतिक्रिया देने वाला तंत्र नहीं रखेगा , बल्कि पूर्वानुमान और रोकथाम पर काम करने वाला सिस्टम बनेगा।
जिले की व्यवस्था को मजबूत करने के लिये सभी विभाग एक-दूसरे से जोड़े जा रहे।
विद्यालयों में शिक्षक और विद्यार्थी की स्थिति से लेकर अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं, ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, सड़कों और नालियों की स्थिति, राजस्व मामलों का निस्तारण, नगर निकायों की सफाई व्यवस्था और सरकारी योजनाओं का लाभ,हर किसी को मिले इसके लिए किया जा रहे प्रयास सराहनीय हैं ।
डीएम ने इन सभी क्षेत्रों के लिए स्पष्ट लक्ष्य, नियमित समीक्षा और परिणाम की निगरानी की व्यवस्था विकसित की है जिससे जिले का प्रशासनिक ढांचा अधिक प्रभावी हो रहा है।
आधुनिक शासन की सबसे महत्वपूर्ण अवधारणा यही है कि शिकायत केवल दर्ज न हो, बल्कि उसका पूरा जीवनचक्र दिखाई दे।
शिकायत कब आई?किस अधिकारी को भेजी गई?
कितने दिन से लंबित है?
क्या कार्रवाई हुई?समाधान कब हुआ?और क्या नागरिक समाधान से संतुष्ट है?
डीएम ने जनपद में शिकायतों के लिए इस तरह की मजबूत डिजिटल निगरानी व्यवस्था विकसित की है यह प्रशासन और नागरिक के बीच विश्वास बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम होगा।
प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही का अर्थ किसी अधिकारी पर दबाव बनाना मात्र नहीं है। इसका अर्थ यह है कि हर अधिकारी को अपने क्षेत्र के परिणामों की जिम्मेदारी महसूस हो।
किस विभाग में लंबित मामले कम हुए?कहां सेवा की गुणवत्ता बढ़ी?कहां शिकायतें घटीं?
कहां सरकारी योजना का लाभ अधिक लोगों तक पहुंचा?
यही वास्तविक प्रदर्शन के संकेतक होने चाहिए।
इस दृष्टि से डॉ. अंकुर लाठर की प्रशासनिक सोच को परिणाम आधारित व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है।
जिलाधिकारी द्वारा जिले की प्रशासनिक व्यवस्थाओं को एक साझा डिजिटल निगरानी ढांचे से जोड़ा जा रहा ताकि आने वाले समय में एक ऐसी व्यवस्था की कल्पना की जा सकती है जहां जिलाधिकारी के सामने जिले की प्रमुख व्यवस्थाओं की स्थिति एक नजर में उपलब्ध हो।
शिक्षा—स्वास्थ्य—स्वच्छता—पेयजल—राजस्व—सड़क—कानून-व्यवस्था—विकास योजनाएं—जनशिकायतें।
हर क्षेत्र का अपना सूचकांक हो और हर विभाग का प्रदर्शन लगातार मापा जाए।
यह किसी एक विभाग का सुधार नहीं होगा, बल्कि पूरे जिला प्रशासन के काम करने के तरीके में बदलाव होगा।
डीएम डॉ लाठर की प्रशासनिक व्यवस्था को यदि इस दिशा में लगातार आगे बढ़ाया गया तो आने वाले समय में जिले की पहचान केवल ऐतिहासिक और भौगोलिक विशेषताओं से नहीं, बल्कि एक आधुनिक, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित प्रशासनिक मॉडल के रूप में भी बन सकती है।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article