नई दिल्ली। जंतर-मंतर से संसद मार्च के दौरान छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बाद राष्ट्रीय राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। विपक्षी दलों ने छात्रों पर पुलिस बल प्रयोग की आलोचना की है, जबकि केंद्र सरकार और पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने को प्राथमिकता बताया जा रहा है।
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव समेत विपक्ष के कई नेताओं ने छात्रों के समर्थन में आवाज उठाई। सपा का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया और विपक्षी सांसदों को भी हिरासत में लिया गया। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर चोट बताते हुए इसकी निंदा की।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि “युवाओं को बड़े पैमाने पर चोट लगी है, यह सरकार की बड़ी विफलता है। परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य की रक्षा सरकार की जिम्मेदारी है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है।
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि “हर छात्र और नौजवान के साथ समाजवादी पार्टी खड़ी है। उत्तर प्रदेश में भी कई भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे युवाओं का भरोसा कमजोर हुआ है।”
दूसरी ओर, केंद्र सरकार की ओर से पहले भी कहा जा चुका है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं तथा पेपर लीक और नकल जैसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।
नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर उठी मांग सवाल केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं हैं। देश के करोड़ों छात्र-छात्राएं वर्षों की मेहनत के बाद इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं। ऐसे में परीक्षा की निष्पक्षता, पारदर्शिता और समयबद्ध प्रक्रिया पर विश्वास बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था की बड़ी जिम्मेदारी है।


