मोतिहारी: बिहार के मोतिहारी (Motihari) में न्याय प्रक्रिया को बाधित करने के इरादे से रची गई एक बड़ी आपराधिक साजिश को पुलिस ने समय रहते नाकाम कर दिया है। वर्ष 2016 के एक बहुचर्चित हत्याकांड के मुख्य गवाह की हत्या की सुपारी लेकर निकले दो शातिर शूटरों को पुलिस ने अत्याधुनिक हथियारों के साथ दबोच (arrested) लिया है। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने अपराधियों के नेटवर्क में हड़कंप मचा दिया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार हत्या की यह पूरी योजना जेल में बंद कुख्यात अपराधी राणा सिंह द्वारा तैयार की गई थी। उसने 2016 के पकड़ीदयाल थाना कांड संख्या 65/2016 के गवाह, माधोलाल सहनी को अपना निशाना बनाया था। गवाही देने से रोकने के लिए राणा सिंह ने शूटरों को 5 लाख रुपये की सुपारी दी थी। जेल के भीतर से बैठकर अपराध का साम्राज्य चलाने वाले राणा सिंह का मुख्य मकसद गवाह को रास्ते से हटाकर केस को कमजोर करना था।
पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्वर्ण प्रभात को जैसे ही इस साजिश की भनक लगी उन्होंने तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया। चकिया डीएसपी संतोष कुमार के नेतृत्व में टीम ने घेराबंदी शुरू की। गुप्त सूचना के आधार पर डुमरियाघाट थाना क्षेत्र के पहल चौक के समीप छापेमारी की गई। पुलिस को देखते ही अपराधियों ने भागने की कोशिश की, लेकिन टीम ने उन्हें दबोच लिया।
गिरफ्तार किए गए अपराधियों की पहचान डुमरियाघाट निवासी नीरज तिवारी और संग्रामपुर थाना क्षेत्र के भवानीपुर निवासी कुंदन ठाकुर उर्फ अवनीश ठाकुर के रूप में हुई है। तलाशी लेने पर पुलिस ने उनके पास से एक देसी पिस्टल, पांच जिंदा कारतूस और दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
डीएसपी संतोष कुमार ने बताया कि यह मामला एक बड़े आपराधिक गिरोह की ओर इशारा करता है। फिलहाल पुलिस जेल में बंद मास्टरमाइंड राणा सिंह और उसके अन्य सहयोगियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गवाहों की सुरक्षा को लेकर पुलिस पूरी तरह सतर्क है और ऐसे अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा। इस गिरफ्तारी ने न केवल एक जान बचाई है बल्कि न्याय व्यवस्था में आम लोगों का भरोसा भी और मजबूत किया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस साजिश में और कौन-कौन से चेहरे शामिल थे।


