रक्षाबंधन 2026 शुभ मुहूर्त में पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह 8:33 बजे से प्रारंभ होकर पूर्णिमा तिथि समाप्त : 28 अगस्त 2026 शुक्रवार को सुबह 9:19 बजे तक उदया पूर्णिमा में ही राखी बांधने का मुख्य शुभ समय है।
सुबह 5:57 बजे से सुबह 9:19 बजे तक (उदया तिथि में सर्वोत्तम है।
जबकि विशेष परिस्थिति में अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:01 बजे से दोपहर 1:05 बजे तक भी रक्षाबंधन पूजा और राखी बांधने की विधि किया जा सकता है।
राखी बांधने की विधि :-
1. इस दिन थाली सजाएं, जिस पूजा की थाली में कुमकुम, रोली, अक्षत (चावल),
दीपक, और मिठाई रखें । 2. फिर दीपक जलाएं, सबसे पहले भाई के माथे पर तिलक लगाएं और अक्षत लगाएं।
3. आरती उतारें, भाई की आरती उतारें और उनकी लंबी उम्र की कामना करें।
4. फिर दायें हाथ में राखी बांधें, भाई की दाहिने कलाई पर रक्षासूत्र (राखी) बांधें।
5. और मुख मीठा करें, भाई को मिठाई खिलाएं और आशीर्वाद लें या बड़ी बहन दें।
रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र प्रेम, अटूट विश्वास और सुरक्षा के वचन का एक महान और पारंपरिक त्योहार है। रक्षाबंधन का अर्थ “रक्षा बंधन’ दो शब्दों से मिलकर बना है- “रक्षा” यानी सुरक्षा और ‘बंधन’ यानी रिश्ता या धागा। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र (राखी) बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इसके बदले में भाई अपनी बहनों को जीवनभर उनकी रक्षा करने का वचन का उपहार देते हैं। यह त्योहार हर साल हिंदू कैलेंडर के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा (सावन पूर्णिमा) के दिन मनाया जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सबसे पहली राखी माता लक्ष्मी ने राजा बलि को बांधी थी। कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से तीन पग भूमि
दान में मांगी थी। सब कुछ दान करने के बाद भगवान विष्णु ने राजा बलि का वचन पूरा करने के लिए पाताल लोक में रहना स्वीकार किया। माता लक्ष्मी अपने पति भगवान विष्णु को वापस वैकुण्ठ ले जाना चाहती थीं। इसलिए उन्होंने एक गरीब स्त्री का वेश धारण किया और राजा बलि की कलाई पर रक्षा सूत्र (राखी) बांधकर उन्हें अपना भाई बनाया। जब राजा बलि ने उपहार मांगने को कहा, तो माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को मांग लिया। राजा बलि ने वचन का पालन करते हुए भगवान विष्णु को जाने की अनुमति दी। इसी प्रसंग से रक्षाबंधन और ‘बालवा” (बलि राजा की कथा) का संबंध माना जाता है।
रक्षा बंधन के मंत्र में * रक्षा बंधन का मुख्य मंत्र
“ॐ येन बब्द्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।”
मंत्र का हिंदी अर्थ –
जिस प्रकार महान शत्तिक्तशाली दानवराज राजा बलि को रक्षासूत्र (धागा) से बांधा गया था, उसी पवित्र और मजबूत धागे से मैं तुम्हें बांधती / बांधता हूँ। हे रक्षासूत्र ! तुम अडिग रहना, अपने संकल्प से कभी विचलित न होना।
महाभारत काल में द्रौपदी द्वारा भगवान श्रीकृष्ण को उंगली कटने पर अपने आंचल का टुकड़ा बांधने और श्रीकृष्ण द्वारा उनकी रक्षा करने की कथा इस पर्व से जुड़ी है। भविष्य पुराण के अनुसार, देवराज इंद्र की रक्षा के लिए इंद्रागी शची ने उन्हें रक्षासूत्र बांधा था। सामाजिक और यह पर्व सांस्कृतिक बंधन हैं यह पर्व केवल सगे भाई-बहन तक सीमित नहीं है, बल्कि चचेरे भाई-बहनों, गुरुओं और स्नेहीजनों के बीच भी स्नेह और रक्षा के भाव के साथ मनाया जाता है।
धार्मिक अनुष्ठान में इस दिन प्राचीन परंपरा के अनुसार ब्राह्मण अपने यजमानों को रक्षासूत्र बांधते हैं तथा बेदों का अध्ययन शुरू करते हैं।
रक्षाबंधन का बंधन, सबको संपूर्ण सुरक्षा प्रदान कर सुख सौभाम्य प्रदान करे । उत्तम आयु. आरोग्यता प्रदान करें। और सबके आंतरिक और बाहरी शत्रुओं, रोग व क्रण से
मुक्ति प्रदान कर मान सम्मान और विजय प्रदान करें । इस पर्व से भाई का बहन के प्रति और बहन का भाई के प्रति… प्रेम, समर्पण और
सम्मान की भावना बनी रहे। लक्ष्मी नारायण और महादेव भाई बहन में अटूट प्रेम पवित्र समर्पण, अनुपम त्याग एवं शुभद्र आशीष बनाए रखें ।
सबके ऊपर श्री हरि विष्णु के साथ माता महालक्ष्मी के निरंतर शुभद्र आशीष के लिए आराकाशा ! कि विनम्र प्रार्थना….
सबकी संपूर्ण प्रसन्नता, उत्तम आयु आरोग्यता, सुख सौभाम्य, संतति संतान जीवन अबकी भर बने रहने के लिए रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामना…!!
हरि ॐ गुरुदेव..!
पं0मयंक शरण शास्त्री
श्री बालक राम हनुमान मंदिर जानकीपुरम गार्डेन लखनऊ
7619015566


