फर्रुखाबाद । प्रदेश भर में विकास के दावों की चमक दिखाई जा रही है, लेकिन पौराणिक पहचान रखने वाली अपर काशी यानी फर्रुखाबाद के शहरी इलाकों की हकीकत इन दावों को कटघरे में खड़ा कर रही है। शहर की सड़कों से लेकर कूड़ा प्रबंधन और अंतिम संस्कार जैसी मूलभूत सुविधाएं तक आज भी पूर्व रूप मे ही बदहाल स्थिति में हैं।
नगर के कई प्रमुख वार्डों में सड़कों की हालत इतनी खराब है कि गड्ढों और टूटी सतह, जल भराओ के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। हल्की बारिश होते ही हालात और बिगड़ जाते हैं पूरे इलाके जलभराव की चपेट में आ जाते हैं, जिससे लोगों का निकलना तक मुश्किल हो जाता है। जल निकासी व्यवस्था लगभग ठप है, और जिम्मेदार विभागों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कूड़ा निष्पादन की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। शहर में अब तक कोई व्यवस्थित कूड़ा निष्पादन केंद्र विकसित नहीं हो सका है, जिसके चलते जगह-जगह कूड़े के ढेर खुले में सड़ रहे हैं। इससे न सिर्फ दुर्गंध फैल रही है, बल्कि संक्रामक बीमारियों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। नगर पालिका के दावे कागजों में सीमित नजर आ रहे हैं।
सबसे संवेदनशील मुद्दा विद्युत शवदाह गृह का अभाव। आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल अंतिम संस्कार की सुविधा आज भी शहरवासियों को उपलब्ध नहीं हो सकी है। लोग परंपरागत लकड़ी आधारित चिताओं पर निर्भर हैं, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ता है और पर्यावरण पर भी दबाव पड़ता है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि वर्षों से इन समस्याओं को उठाया जा रहा है, लेकिन हर बार योजनाएं बनती हैं और फाइलों में दब जाती हैं। धरातल पर बदलाव नगण्य है।
राज्य में विकास के बड़े-बड़े मॉडल पेश किए जा रहे हैं, लेकिन अपर काशी जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाले शहर में बुनियादी सुविधाओं की यह स्थिति प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करती है।
“विकास के दावे बनाम जमीनी हकीकत”: अपर काशी में सड़कों से श्मशान तक बदहाली, सवालों के घेरे में सिस्टम


