फर्रुखाबाद। योगी सरकार के नौ वर्ष पूरे हो चूके हैं, लेकिन जमीनी हालात अब भी विकास के दावों को चुनौती देते नजर आ रहे हैं। फर्रुखाबाद नगर में झूलते और जर्जर विद्युत तार आज भी मौत का खुला खतरा बने हुए हैं, जिन पर न प्रशासन की नजर पड़ रही है और न ही बिजली विभाग की जिम्मेदारी तय हो रही है।
शहर के कई प्रमुख इलाकों घनी आबादी वाली गलियों, बाजारों और स्कूलों के आसपास बिजली के तार इतने नीचे झूल रहे हैं कि राहगीरों को झुककर निकलना पड़ रहा है। कई जगह तारों की हालत इतनी खराब है कि हल्की हवा या बारिश में स्पार्किंग तक देखी जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी है। कई बार शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। जर्जर तारों को बदलने या व्यवस्थित करने के बजाय अस्थायी मरम्मत कर फाइल बंद कर दी जाती है।
सबसे बड़ा खतरा बच्चों और बुजुर्गों के लिए है। स्कूल जाते बच्चे रोज इन तारों के नीचे से गुजरते हैं, जबकि बारिश के समय करंट फैलने का डर और बढ़ जाता है। शहर में पहले भी करंट से हादसे हो चुके हैं, लेकिन उससे भी कोई ठोस सबक नहीं लिया गया।
ऊर्जा विभाग के दावे हैं कि स्मार्ट मीटर, डिजिटल सिस्टम और नई लाइनें बिछाई जा रही हैं, लेकिन सवाल उठता है—जब मूलभूत सुरक्षा ही सुनिश्चित नहीं है तो “स्मार्ट सिस्टम” का क्या मतलब?
यह स्थिति सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और निगरानी की कमी को उजागर करती है। अगर समय रहते इन जर्जर तारों को नहीं बदला गया, तो कोई बड़ा हादसा होना तय माना जा रहा है।
अब देखना यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर खतरे को लेकर जागेंगे या फिर किसी हादसे के बाद ही कार्रवाई की औपचारिकता निभाई जाएगी। फिलहाल, फर्रुखाबाद के लोग हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर इन तारों के नीचे से गुजरने को मजबूर हैं और यही इस “विकास मॉडल” की सबसे कड़वी सच्चाई है।
नौ साल बाद भी खतरे में शहर: फर्रुखाबाद में झूलते जर्जर बिजली तार, योगी सरकार के दावे बेअसर!


