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Thursday, April 23, 2026

सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में आउटसोर्सिंग कर्मियों का हंगामा, दो माह से वेतन न मिलने पर कार्य बहिष्कार

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इटावा। जनपद के सैफई स्थित उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में गुरुवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब आउटसोर्सिंग के तहत कार्यरत एमटीएस कर्मचारियों ने वेतन न मिलने के विरोध में जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि पिछले दो महीनों से उनका वेतन लंबित है, जिससे उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। नाराज कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार करते हुए परिसर में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे विश्वविद्यालय की व्यवस्थाएं प्रभावित हो गईं।
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना था कि वे लगातार अपनी समस्याओं को प्रशासन के समक्ष उठा रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी। वेतन न मिलने के कारण उन्हें दैनिक जरूरतों को पूरा करने में भी कठिनाई हो रही है। कई कर्मचारियों ने बताया कि घर चलाना मुश्किल हो गया है और कर्ज लेने की नौबत आ गई है। इस स्थिति से आक्रोशित होकर उन्होंने काम बंद कर विरोध जताया।
कर्मचारियों के अचानक कार्य बहिष्कार से विश्वविद्यालय की साफ-सफाई, फाइलों के निस्तारण और अन्य दैनिक कार्यों पर असर पड़ा। अस्पताल से जुड़े कुछ कार्य भी प्रभावित हुए, जिससे मरीजों और तीमारदारों को भी असुविधा का सामना करना पड़ा। हालांकि प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए तत्काल हस्तक्षेप किया।
सूचना मिलने पर विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों से वार्ता की। कुलपति और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि उनके बकाया वेतन का जल्द भुगतान कराया जाएगा और भविष्य में इस तरह की समस्या नहीं आने दी जाएगी। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने अपना धरना समाप्त कर दिया और पुनः कार्य पर लौट आए।
गौरतलब है कि इससे पहले नोएडा समेत प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी आउटसोर्सिंग कर्मचारियों द्वारा वेतन और सेवा शर्तों को लेकर विरोध प्रदर्शन किए जा चुके हैं। सैफई की इस घटना ने एक बार फिर आउटसोर्सिंग व्यवस्था और कर्मचारियों की समस्याओं को उजागर कर दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो इस तरह के प्रदर्शन भविष्य में और बढ़ सकते हैं। फिलहाल प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थिति सामान्य हो गई है, लेकिन कर्मचारियों की नजर अब वादों के क्रियान्वयन पर टिकी हुई है।

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