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Sunday, April 26, 2026
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श्रीराम जानकी मठ में जिंदा समाधि की घोषणा से तनाव, पुलिस-प्रशासन अलर्ट

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बाराबंकी
असंद्रा थाना क्षेत्र के भवनियापुर स्थित श्रीराम जानकी मठ मंगलवार को उस समय संवेदनशील केंद्र बन गया, जब मठ के महंत मुकुंदपुरी ने जिंदा समाधि लेने की घोषणा कर दी। इस घोषणा के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में लोग मठ परिसर में इकट्ठा हो गए।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मठ परिसर में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया। मौके पर एसडीएम, सीओ और स्थानीय पुलिस अधिकारी लगातार मौजूद रहकर हालात पर नजर बनाए हुए हैं। प्रशासनिक टीम लगातार महंत को उनके फैसले से पीछे हटाने की कोशिश कर रही है।

जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद मठ की जमीन और संपत्ति को लेकर चल रहा है। महंत मुकुंदपुरी का आरोप है कि एक व्यक्ति ने फर्जी और अपंजीकृत वसीयत के जरिए मठ की करोड़ों की संपत्ति अपने नाम दर्ज करा ली थी। इस मामले में प्रशासन ने 24 अगस्त 2023 को वसीयत को निरस्त कर संपत्ति को मूल खातेदार के नाम करने का आदेश दिया था, लेकिन विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हो सका।

प्रशासनिक प्रक्रिया में देरी और समाधान न निकलने से महंत नाराज बताए जा रहे हैं। उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि 20 अप्रैल तक कार्रवाई नहीं हुई तो वे 21 अप्रैल को जिंदा समाधि ले लेंगे। निर्धारित तारीख पर अपने फैसले पर अड़े रहने की वजह से हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं।

मठ परिसर में सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई है, जिससे स्थिति को संभालना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। अधिकारी लगातार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है।

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, महंत ने पहले भी इसी तरह की चेतावनी दी थी जिसे प्रशासन ने समय रहते रोक दिया था। लेकिन इस बार मामला अधिक गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि महंत अपने निर्णय से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे हैं और प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

यूपी में भीषण गर्मी का कहर: 44.6°C तक पहुंचा पारा, 26 जिलों में लू का अलर्ट

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लखनऊ
इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है, जहां कई जिलों में तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। प्रयागराज में पारा 44.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि प्रदेश के 26 जिलों में तापमान 40 डिग्री या उससे अधिक बना हुआ है। मौसम विभाग ने इन जिलों में लू को लेकर चेतावनी जारी की है।
राजधानी से लेकर काशी और कानपुर तक तेज धूप और गर्म हवाओं ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। आमतौर पर चहल-पहल से भरे रहने वाले काशी के घाटों पर इस बार सन्नाटा देखने को मिल रहा है। लोग दिन के समय घरों में रहने को मजबूर हैं और सड़कों पर आवाजाही काफी कम हो गई है।
गर्मी का असर अब स्वास्थ्य और परिवहन दोनों पर दिखाई देने लगा है। मेरठ में चलती सीएनजी बस में आग लगने की घटना सामने आई, जिसमें करीब 50 से अधिक यात्रियों ने समय रहते बस से कूदकर अपनी जान बचाई। वहीं आगरा में ताजमहल घूमने आए एक पर्यटक की तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश होकर गिर पड़ा, जबकि कई अन्य पर्यटकों को भी गर्मी के कारण स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा।
भीषण गर्मी को देखते हुए राज्य सरकार ने स्कूलों के समय में बदलाव किया है। अब 8वीं कक्षा तक के सरकारी स्कूल सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक चलेंगे। यह पहले दोपहर 2 बजे तक होते थे। शिक्षकों को 1:30 बजे तक ड्यूटी पर रहना होगा। वहीं मदरसों में भी यही समय लागू किया गया है, जबकि निजी स्कूलों के समय का निर्णय प्रबंधन पर छोड़ दिया गया है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ सकती है। लखनऊ के मौसम वैज्ञानिक अतुल सिंह ने बताया कि महाराष्ट्र के आसपास बने एंटी-साइक्लोनिक सिस्टम के कारण प्रदेश में अगले 4 से 5 दिनों तक तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे कई जिलों में पारा 45 डिग्री से भी ऊपर जा सकता है।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में लू की स्थिति और गंभीर हो सकती है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक लोगों को दोपहर के समय बाहर न निकलने, पर्याप्त पानी पीने और धूप से बचाव करने की सलाह दी है, क्योंकि फिलहाल गर्मी से राहत की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है।

किराए के कमरे में युवक और पालतू कुत्ते का शव मिला, पुलिस जांच में जुटी

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बरेली
इज्जतनगर थाना क्षेत्र में उस समय सनसनी फैल गई जब एक किराए के मकान के बंद कमरे से एक युवक और उसके पालतू कुत्ते का शव बरामद हुआ। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और कमरे को सील कर जांच शुरू कर दी।

जानकारी के अनुसार, मृतक युवक की पहचान निखिल अरोड़ा (33 वर्ष) के रूप में हुई है, जो डेलापीर इलाके में किराए के मकान में रहता था। वह रोजाना सुबह अपने मौसेरे भाई के घर नाश्ता और खाना खाने जाता था, लेकिन घटना वाले दिन वह नहीं पहुंचा और उसका फोन भी बंद मिला, जिसके बाद परिजन चिंतित हो गए।

परिजनों द्वारा सूचना देने पर पुलिस मौके पर पहुंची। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था और काफी देर तक आवाज देने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया, जहां निखिल और उसका पालतू कुत्ता मृत अवस्था में मिले।

कमरे की तलाशी के दौरान पुलिस को सल्फास की खाली डिब्बी और कुछ अन्य संदिग्ध सामग्री मिली है। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि युवक ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या की है और उसके साथ ही पालतू कुत्ते की भी मौत हुई है।

पुलिस के अनुसार, कमरे से कुछ खाद्य सामग्री भी बरामद हुई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि जहर किसी पेय या खाने में मिलाया गया हो सकता है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचने की बात कही है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, निखिल अपने पालतू कुत्ते से बेहद लगाव रखता था और अक्सर उसे अपने साथ ही रखता था। इसी वजह से पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं मानसिक तनाव या किसी अन्य कारण से यह कदम तो नहीं उठाया गया।

फिलहाल पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारी का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही मौत के कारणों पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

बुजुर्गों की बढ़ती खाद्य असुरक्षा: बीमारी, अकेलापन और आर्थिक संकट बना बड़ी चुनौती

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अलीगढ़
बुजुर्गों की भूख अब केवल रोटी की कमी का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह बीमारी, अकेलेपन और आर्थिक तंगी से जुड़ा एक गंभीर सामाजिक संकट बनती जा रही है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के हालिया अध्ययन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि देश के एक बड़े हिस्से में बुजुर्ग किसी न किसी स्तर पर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।

‘फूड एंड ह्यूमैनिटी जर्नल’ में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, करीब 38.2 प्रतिशत बुजुर्ग हल्की खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे हैं, जबकि लगभग 5 प्रतिशत बुजुर्गों की स्थिति गंभीर है। यह अध्ययन 31 हजार से अधिक बुजुर्गों के आंकड़ों पर आधारित है, जो इस समस्या की व्यापकता को दर्शाता है। अलीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में भी ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जहां बुजुर्ग अकेले जीवन जीने को मजबूर हैं या परिवार का सहारा नहीं मिल पा रहा है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेती से दूरी और शहरी क्षेत्रों में बढ़ता अकेलापन बुजुर्गों की भोजन सुरक्षा को सीधे प्रभावित कर रहा है। कई बुजुर्ग ऐसे हैं जिनके पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं है, जिससे वे अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने में भी कठिनाई महसूस करते हैं।

राज्यवार आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में यह समस्या सबसे अधिक (10.47%) पाई गई है। इसके बाद झारखंड, तमिलनाडु, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उत्तर प्रदेश में भी लगभग 7.13 प्रतिशत बुजुर्ग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। यह आंकड़े सामाजिक और आर्थिक असमानताओं की गहरी तस्वीर पेश करते हैं।

शोधकर्ताओं का कहना है कि बुजुर्गों में भूख की समस्या केवल गरीबी तक सीमित नहीं है। खराब स्वास्थ्य, मानसिक तनाव, अकेलापन और परिवार से दूरी भी इसके बड़े कारण हैं। कई बुजुर्ग अपनी दवाइयों और इलाज के खर्च के कारण भोजन पर समझौता करने को मजबूर हो जाते हैं, जिससे उनका स्वास्थ्य और तेजी से बिगड़ता है।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि मुस्लिम और ईसाई समुदायों के बुजुर्गों में खाद्य असुरक्षा का स्तर अपेक्षाकृत अधिक है, जबकि अन्य समुदायों में स्थिति कुछ बेहतर है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी योजनाएं जैसे वृद्धावस्था पेंशन और राशन कार्ड मौजूद होने के बावजूद कई बुजुर्ग इनका पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं, जिसका कारण पहचान संबंधी समस्याएं और प्रशासनिक अड़चनें हैं।

शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है। उनका सुझाव है कि स्थानीय स्तर पर पहचान, सहायता और पोषण सुरक्षा की व्यवस्था को मजबूत करना बेहद जरूरी है, ताकि बुजुर्गों को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन मिल सके।

शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल: सेंसेक्स 575 अंक चढ़ा, निवेशकों की झोली में 3.62 लाख करोड़ का मुनाफा

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मुंबई। हफ्ते के कारोबारी दिन की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए बंपर साबित हुई। शुरुआती कारोबार में BSE सेंसेक्स 575 अंकों से ज्यादा उछल गया, जबकि निफ़्टी 50 ने 24,500 के अहम स्तर को पार कर बाजार में नई ऊर्जा भर दी। इस तेजी ने निवेशकों को महज कुछ घंटों में करीब 3.62 लाख करोड़ रुपये का जबरदस्त फायदा पहुंचाया।
ग्लोबल संकेतों ने बाजार को दी रफ्तार
अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने भारतीय बाजार को मजबूत सहारा दिया। खासतौर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट—जिसके पीछे ईरान-अमेरिका वार्ता की संभावनाएं बताई जा रही हैं—ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। तेल सस्ता होने से भारत जैसे आयातक देश को सीधा फायदा मिलता है, जिससे बाजार में तेजी का माहौल बना।
आज की तेजी में सबसे बड़ा योगदान बैंकिंग और ऑटो सेक्टर का रहा। बड़े बैंकिंग शेयरों में तेज खरीदारी देखी गई, जिससे बाजार को मजबूती मिली। वहीं ऑटो कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया, जो मांग में सुधार और लागत घटने के संकेत दे रहा है।
रिकॉर्ड स्तर के करीब बाजार
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही रफ्तार बनी रही तो बाजार जल्द ही नए रिकॉर्ड स्तर छू सकता है। हालांकि, कुछ जानकारों ने चेतावनी भी दी है कि ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) देखने को मिल सकती है।
तेजी के इस माहौल में नए निवेशकों को जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जा रही है। बाजार में मौके जरूर हैं, लेकिन जोखिम भी उतना ही बड़ा है। समझदारी से निवेश ही सुरक्षित मुनाफे की कुंजी है।

सोने की चढ़ती कीमत और टूटते रिश्ते: कानपुर की घटना ने खोली समाज की कड़वी सच्चाई

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कानपुर की एक शादी में नकली सोने के जेवरों के कारण टूटा रिश्ता सिर्फ एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि उस सामाजिक बीमारी का लक्षण है जो तेजी से फैल रही है—सोने की बढ़ती कीमतों के बीच “दिखावे की मजबूरी” और “दहेज का दबाव”।
देश में सोने की कीमतें लगातार रिकॉर्ड स्तर छू रही हैं। बाजार में 10 ग्राम सोना 70 हजार से ऊपर पहुंच चुका है, जो मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए किसी झटके से कम नहीं। ऐसे में शादी-ब्याह जैसे अवसर, जो कभी खुशी का प्रतीक होते थे, अब आर्थिक बोझ और सामाजिक प्रतिस्पर्धा का अखाड़ा बनते जा रहे हैं।
कानपुर के गुजैनी थाना क्षेत्र में हुई घटना इसी दबाव का चरम रूप है। एक तरफ लड़की पक्ष अपनी हैसियत से बढ़कर दहेज जुटाने की कोशिश करता है, दूसरी तरफ लड़के पक्ष “सोने के नाम पर प्रतिष्ठा” दिखाने के लिए नकली जेवर तक का सहारा लेने लगता है। यह सिर्फ धोखा नहीं, बल्कि उस मानसिकता का आईना है जिसमें रिश्ते से ज्यादा अहम “सोने का वजन” हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले पांच वर्षों में सोने की कीमतों में लगभग 40-50% तक की बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर शादी के खर्च पर पड़ा है। एक सामान्य मध्यमवर्गीय शादी में अब 30-40% बजट सिर्फ जेवरों पर खर्च हो रहा है। ऐसे में कई परिवार कर्ज लेने या समझौता करने पर मजबूर हो रहे हैं और कई बार यही समझौता धोखे में बदल जाता है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस पूरी व्यवस्था में सबसे ज्यादा दबाव लड़की पक्ष पर होता है। “इज्जत” और “समाज” के नाम पर उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे हर हाल में सोना और दहेज दें। जबकि हकीकत यह है कि सोना अब जरूरत नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिस्पर्धा का प्रतीक बन चुका है।
कानपुर की घटना यह भी बताती है कि अब समाज के एक वर्ग ने इस दबाव के खिलाफ खड़ा होना शुरू कर दिया है। लड़की पक्ष द्वारा शादी तोड़ने का फैसला सिर्फ एक परिवार का निर्णय नहीं, बल्कि एक संदेश है कि रिश्ते धोखे और दिखावे पर नहीं टिक सकते।
यूथ इंडिया संपादकीय दृष्टिकोण:
आज जरूरत इस बात की है कि शादी को “सोने के लेन-देन” से निकालकर “समानता और सम्मान” के दायरे में लाया जाए। कानून पहले से मौजूद हैं, लेकिन सामाजिक सोच में बदलाव सबसे बड़ी जरूरत है।
जब सोना इतना महंगा हो गया है, तो क्या अब भी रिश्तों की कीमत उसी धातु से तय होगी? या फिर समाज यह स्वीकार करेगा कि भरोसा, ईमानदारी और सम्मान—इनकी कीमत किसी भी सोने से ज्यादा है।