– संगठनात्मक बैठक में दिया बड़ा संदेश
लखनऊ। राजधानी में आयोजित जोनल प्रशिक्षण कार्यशाला के बीच भारतीय जनता पार्टी ने महिला सम्मान को लेकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। कार्यक्रम में बोलते हुए पंकज चौधरी ने साफ कहा—“नारी का सम्मान ही भाजपा की पहचान है।”
अपने संबोधन में उन्होंने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि पार्टी की विचारधारा में महिलाओं का सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसे जमीनी स्तर तक व्यवहार में उतारना ही असली चुनौती है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकारों ने महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं, जिन्हें जनता तक प्रभावी तरीके से पहुंचाना जरूरी है।
सूत्रों के मुताबिक, यह बयान ऐसे समय में आया है जब महिला मुद्दों पर सियासत तेज है और विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में बीजेपी की ओर से यह बयान सीधे राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
कार्यशाला में मौजूद नेताओं ने भी महिला सशक्तिकरण को लेकर पार्टी की योजनाओं और उपलब्धियों को प्रमुखता से उठाया। संगठन के भीतर महिला भागीदारी बढ़ाने और बूथ स्तर तक महिला कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर भी जोर दिया गया।
राजनीतिक गलियारों में इस बयान को आगामी चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। सवाल अब यह है कि क्या जमीनी स्तर पर भी यह दावा उतनी ही मजबूती से दिखेगा, जितना मंच से बयान दिया गया।
“नारी का सम्मान ही भाजपा की पहचान”: लखनऊ में गरजे प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी
लेंसकार्ट शोरूम पर हिंदू रक्षा दल का प्रदर्शन
तिलक लगाकर जताया विरोध और लगे ‘जय श्री राम’ के नारे
फर्रुखाबाद। जनपद के ठंडी सड़क स्थित Lenskart शोरूम पर उस समय माहौल गरमा गया जब हिंदू रक्षा दल के पदाधिकारी और कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन के लिए पहुंच गए। बताया जा रहा है कि यह प्रदर्शन हाल ही में दिए गए एक कथित आपत्तिजनक बयान के विरोध में आयोजित किया गया था। बड़ी संख्या में पहुंचे कार्यकर्ताओं ने शोरूम के बाहर जमकर नारेबाजी की और ‘जय श्री राम’ के उद्घोष से पूरे क्षेत्र को गुंजायमान कर दिया।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने अनोखे तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। संगठन के पदाधिकारियों ने पहले शोरूम के मुख्य द्वार पर तिलक लगाया, इसके बाद अंदर प्रवेश कर कर्मचारियों से संवाद किया। कार्यकर्ताओं ने कर्मचारियों को तिलक लगाया और उनके हाथों में कलावा बांधकर अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं को व्यक्त किया। इस दौरान शोरूम कर्मचारियों ने भी शांतिपूर्वक माहौल बनाए रखा और आपसी सहमति से इस प्रक्रिया को पूरा किया गया।
हिंदू रक्षा दल के प्रांत अध्यक्ष ने कहा कि भारत की पहचान उसकी सनातन संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी हुई है, ऐसे में किसी भी प्रकार के आपत्तिजनक बयान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन भविष्य में भी इस तरह के मुद्दों पर मुखर रहेगा और आवश्यक होने पर विरोध प्रदर्शन जारी रखेगा।
जिलाध्यक्ष शिवम गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं होने दी गई। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल अपनी भावनाओं को व्यक्त करना था, जिसे लोकतांत्रिक तरीके से किया गया। कार्यक्रम में शामिल कार्यकर्ताओं ने एकजुटता दिखाते हुए सांस्कृतिक अस्मिता के संरक्षण का संकल्प भी लिया।
इटावा सफारी में ‘हीट एक्शन प्लान’ लागू
– 42°C की तपिश में शेर-कस्तूरी हिरण कूलर और खस के छप्पर तले
– वन्यजीवों की सुरक्षा पर फुल अलर्ट
इटावा। भीषण गर्मी के प्रकोप के बीच इटावा सफारी पार्क में वन्यजीवों को बचाने के लिए आपात इंतजाम लागू कर दिए गए हैं। पारा 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचते ही प्रशासन ने ‘हीट एक्शन प्लान’ एक्टिव कर दिया, जिसके तहत शेर, हिरण समेत अन्य जानवरों के लिए कूलर, शेड और पारंपरिक खस के छप्पर लगाए गए हैं।
सफारी प्रशासन के मुताबिक, शेरों के बाड़ों में कूलर और पानी के स्प्रिंकलर लगाए गए हैं, ताकि तापमान नियंत्रित रखा जा सके। वहीं हिरणों और अन्य शाकाहारी वन्यजीवों के लिए खस (वेटिवर) से बने छप्पर तैयार किए गए हैं, जो प्राकृतिक ठंडक देते हैं और लू से बचाव करते हैं।
सफारी के डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि बढ़ते तापमान को देखते हुए जानवरों के खानपान और दिनचर्या में भी बदलाव किया गया है। उन्हें अधिक पानी, तरल आहार और ठंडी जगहों में रखने की व्यवस्था की गई है। मेडिकल टीम को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि किसी भी इमरजेंसी में तुरंत इलाज मिल सके।
सूत्रों के अनुसार, पिछले वर्षों में गर्मी के दौरान वन्यजीवों पर पड़ने वाले असर को देखते हुए इस बार पहले से ही व्यापक तैयारी की गई है। खासतौर पर दोपहर के समय जानवरों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और विजिटर्स मूवमेंट को भी नियंत्रित किया जा रहा है।
जहां एक ओर इंसान भीषण गर्मी से जूझ रहा है, वहीं इटावा सफारी का यह मॉडल बताता है कि अगर प्रशासनिक इच्छाशक्ति हो तो वन्यजीवों की सुरक्षा भी प्राथमिकता बन सकती है।
बीजेपी का मेगा प्रशिक्षण अभियान: तीन राज्यों के दिग्गज नेता जुटे, संगठन को धार देने की कवायद तेज
लखनऊ। बीजेपी ने संगठनात्मक मजबूती के लिए बड़ा दांव चलते हुए जोनल स्तर की प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की है। यह अहम कार्यक्रम एसआर कॉलेज में हो रहा है, जहां उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार के शीर्ष नेता एक मंच पर जुटे हैं।
कार्यक्रम में संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने, चुनावी रणनीति को धार देने और कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने पर फोकस किया जा रहा है। इस कार्यशाला को आगामी चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है, जहां बूथ मैनेजमेंट से लेकर सोशल मीडिया नैरेटिव तक पर विशेष मंथन होने की संभावना है।
इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम में पंकज चौधरी की मौजूदगी तय है, वहीं संगठन के मजबूत स्तंभ माने जाने वाले धर्मपाल सिंह भी कार्यकर्ताओं को दिशा देंगे।
उत्तराखंड से महेंद्र भट्ट और अजय कुमार, जबकि बिहार से संजय सरावगी और भीखूभाई डलसानिया की भागीदारी इस कार्यशाला को और भी अहम बना रही है।
सूत्रों के अनुसार, इस जोनल कार्यशाला में संगठन विस्तार, माइक्रो-मैनेजमेंट, और आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर गहन चर्चा की जाएगी।
यूथ इंडिया पॉलिटिकल अलर्ट:
बीजेपी का यह प्रशिक्षण अभियान साफ संकेत दे रहा है कि पार्टी अब जमीनी स्तर पर कैडर को और मजबूत कर आगामी चुनावी मुकाबलों के लिए पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है। विपक्ष के लिए यह सीधा संदेश भी माना जा रहा है कि सियासी लड़ाई अब और तेज होने वाली है।
बीजेपी प्रदर्शन के चलते राजधानी ठप, हजरतगंज-गोमतीनगर में घंटों फंसे हजारों लोग
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ मंगलवार को ट्रैफिक जाम की गिरफ्त में पूरी तरह जकड़ी नजर आई। शहर के वीआईपी इलाकों से लेकर आम सड़कों तक हालात बेकाबू हो गए, जब बीजेपी के प्रदर्शन के चलते पुलिस ने कई मुख्य मार्गों को चारों ओर से बंद कर दिया।
हजरतगंज, गोमतीनगर, हनुमान सेतु और लखनऊ मध्य के अधिकांश हिस्सों में घंटों लंबा जाम लग गया। हालात इतने बिगड़े कि सचिवालय जाने वाले अधिकारी और कर्मचारी तक दो-दो घंटे तक सड़कों पर फंसे रहे।
पुलिस द्वारा बैरिकेडिंग कर कई प्रमुख रास्तों को पूरी तरह बंद कर दिया गया, जिससे हजरतगंज की ओर आने वाला लगभग हर मार्ग प्रभावित हुआ। हजारों की संख्या में लोग भीषण गर्मी और तेज धूप में जाम में फंसकर बेहाल दिखे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शहर के कई हिस्सों में एंबुलेंस तक जाम में फंसी रहीं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ा। आम नागरिकों ने आरोप लगाया कि पूरी प्रशासनिक मशीनरी वीआईपी ड्यूटी में व्यस्त रही, जबकि आम जनता को राहत देने के लिए कोई ठोस इंतजाम नजर नहीं आया।
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी के प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, लेकिन ट्रैफिक मैनेजमेंट पूरी तरह फेल साबित हुआ।
राजधानी में इस तरह का ट्रैफिक संकट प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। सवाल साफ है—क्या हर प्रदर्शन के नाम पर पूरे शहर को “बंधक” बना देना अब नई व्यवस्था बन चुकी है?
सोशल मीडिया पर लोग प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस की जमकर आलोचना कर रहे हैं। कई यूजर्स ने इसे “वीआईपी कल्चर बनाम आम जनता” की लड़ाई बताया है।
लखनऊ आज सिर्फ जाम में नहीं फंसा, बल्कि व्यवस्था की नाकामी भी सड़कों पर साफ दिखाई दी।
केदारनाथ में मोबाइल पर पूरी तरह प्रतिबंध: रील्स-वीडियो पर रोक, उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई का ऐलान
रुद्रप्रयाग। आस्था के सबसे बड़े केंद्रों में शामिल केदारनाथ मंदिर में अब अनुशासन और पवित्रता को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। मंदिर प्रशासन ने मंदिर परिसर के अंदर मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लागू कर दिया है।
मंदिर समिति के सदस्य विनीत पोस्ती ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय बढ़ती भीड़, अव्यवस्था और सोशल मीडिया के लिए बनाए जा रहे वीडियो-रील्स की वजह से लिया गया है। लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि श्रद्धालु दर्शन की बजाय मोबाइल पर व्यस्त हो रहे हैं, जिससे लाइन व्यवस्था और सुरक्षा पर असर पड़ रहा था।
नए नियमों के तहत अब मंदिर के अंदर मोबाइल ले जाना, फोटो या वीडियो बनाना और किसी भी प्रकार की रील रिकॉर्ड करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, हाल के दिनों में धाम के अंदर कई ऐसे वीडियो वायरल हुए थे, जिनमें श्रद्धालु पूजा-अर्चना के दौरान रील्स बनाते नजर आए। इससे न सिर्फ धार्मिक मर्यादा पर सवाल उठे, बल्कि अन्य श्रद्धालुओं को भी असुविधा हुई।
प्रशासन का कहना है कि यह कदम सिर्फ नियंत्रण के लिए नहीं बल्कि “भक्ति और शांति के माहौल” को बनाए रखने के लिए जरूरी था। आने वाले यात्रा सीजन में भीड़ और बढ़ने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को भी अलर्ट कर दिया गया है।
धार्मिक स्थलों पर बढ़ते “सोशल मीडिया कल्चर” को लेकर यह फैसला एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। सवाल अब यह है कि क्या देश के अन्य प्रमुख मंदिरों में भी इसी तरह के प्रतिबंध लागू होंगे।








