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Thursday, March 5, 2026
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डग्गामार बसों पर कार्रवाई, तीन बसें सीज और दो स्कूल बसों के चालान

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फर्रुखाबाद। जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी के निर्देश पर शनिवार को एआरटीओ प्रवर्तन सुभाष राजपूत ने एआरएम रोडवेज राजेश कुमार के साथ संयुक्त रूप से डग्गामार बसों के विरुद्ध सघन अभियान चलाया। अभिसूचना के आधार पर दिल्ली से आने वाली बसों की विशेष चेकिंग की गई, जिसमें एक बस बिना वैध परमिट संचालित पाई गई। उक्त बस पर 70 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसके अतिरिक्त दो अन्य बसों में भी विभिन्न कमियां मिलने पर 64 हजार रुपये का दंड अधिरोपित किया गया।

इसी अभियान के दौरान नवाबगंज क्षेत्र में दो स्कूल बसों की जांच की गई। जांच में एक बस बिना फिटनेस प्रमाणपत्र के संचालित पाई गई, जबकि दोनों बसें बिना परमिट चल रही थीं। परिवहन नियमों के उल्लंघन पर दोनों स्कूल बसों के विरुद्ध चालान की कार्रवाई करते हुए 35 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।

सभी संबंधित बसों को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के फर्रुखाबाद बस स्टेशन पर निरुद्ध कर दिया गया है। इस संयुक्त कार्रवाई में परिवहन विभाग द्वारा कुल 1.69 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया। अधिकारियों ने बताया कि होली पर्व के मद्देनजर आमजन को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

विशेष प्रवर्तन अभियान में 28 लीटर अवैध कच्ची शराब बरामद, 160 किलो लहन नष्ट

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फर्रुखाबाद। आबकारी आयुक्त उत्तर प्रदेश के आदेश तथा जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी के निर्देश पर जनपद में अवैध शराब के खिलाफ विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में जिला आबकारी अधिकारी जीपी गुप्ता के पर्यवेक्षण में शनिवार को बड़ी कार्रवाई की गई।

जानकारी के अनुसार आबकारी निरीक्षक क्षेत्र-1 कुमार गौरव सिंह मय स्टाफ एवं कानपुर प्रवर्तन टीम के साथ जनपद के संदिग्ध ग्राम लकूला में दबिश दी गई। छापेमारी के दौरान टीम ने अवैध कच्ची शराब के निर्माण में प्रयुक्त लगभग 160 किलोग्राम लहन को मौके पर ही नष्ट कराया।

कार्रवाई के दौरान करीब 28 लीटर अवैध कच्ची शराब बरामद की गई। इस संबंध में दो अभियोग पंजीकृत किए गए हैं। टीम द्वारा अवैध शराब के निर्माण और बिक्री में संलिप्त लोगों की तलाश भी की जा रही है।

जिला आबकारी अधिकारी ने बताया कि जनपद में अवैध मदिरा के निर्माण, बिक्री एवं परिवहन की रोकथाम के लिए प्रवर्तन कार्य लगातार जारी रहेगा। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया

सदर विधानसभा में 1.20 लाख वोट कटने से बदला जातीय गणित, सीट हुई ओबीसी बहुल

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फर्रुखाबाद। सदर विधानसभा क्षेत्र में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद राजनीतिक समीकरणों में बड़ा उलटफेर सामने आया है। प्रारंभिक आकलनों के अनुसार लगभग 1 लाख 20 हजार मतदाताओं के नाम सूची से हटे हैं। यह संख्या कुल मतदाताओं का बड़ा हिस्सा मानी जा रही है, जिसने सीधे तौर पर सीट के जातीय संतुलन को प्रभावित किया है।

स्थानीय राजनीतिक सूत्रों और वार्ड स्तर के आंकड़ों के अनुसार हटे नामों में सर्वाधिक प्रभाव ब्राह्मण मतदाताओं पर पड़ा है। मोहल्ला गंगानगर, पांचाल घाट, गंगापार

 

इलाके से सटे वार्डों और पुराने शहरी क्षेत्रों में 70 से 75 प्रतिशत तक नाम कटने की चर्चा है। इन इलाकों में बीते 15–20 वर्षों में गंगापार व ग्रामीण क्षेत्रों से आकर बसे परिवारों ने एसआईआर के दौरान अपना वोट गांव में ही सुरक्षित रखा, जिससे शहर की सूची में भारी गिरावट दर्ज हुई।

राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि पूर्व में सदर विधानसभा में ब्राह्मण मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 18–20 प्रतिशत मानी जाती थी। हालिया कटौती के बाद यह अनुपात घटकर 10–12 प्रतिशत के आसपास आंका जा रहा है। दूसरी ओर ओबीसी वर्ग की हिस्सेदारी, जो पहले लगभग 35–38 प्रतिशत मानी जाती थी, अब बढ़कर 40–45 प्रतिशत के बीच पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है।

इस बदलाव के बाद सदर सीट का चरित्र स्पष्ट रूप से ओबीसी बहुल माना जा रहा है। राजनीतिक दलों के रणनीतिकारों के लिए यह बड़ा संकेत है। टिकट वितरण, उम्मीदवार चयन और चुनावी मुद्दों की प्राथमिकता अब नए जातीय गणित के आधार पर तय हो सकती है।

स्थानीय राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि यदि यह आंकड़े अंतिम सूची में भी बरकरार रहे तो सदर विधानसभा का चुनावी परिणाम पूरी तरह नए समीकरणों पर निर्भर करेगा। परंपरागत वोट बैंक की धारणा कमजोर पड़ती दिख रही है और नए सामाजिक गठजोड़ की संभावनाएं प्रबल हो रही हैं।

हालांकि निर्वाचन विभाग की ओर से अंतिम और अधिकृत आंकड़े जारी होने के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी, लेकिन फिलहाल यह तय माना जा रहा है कि 1.20 लाख वोट कटने का असर सीधे-सीधे राजनीतिक संतुलन पर पड़ा है।सदर विधानसभा की राजनीति अब पुराने फार्मूलों से नहीं, बल्कि बदले हुए जातीय गणित और नए वोटर प्रोफाइल के आधार पर आगे बढ़ेगी।

गायत्री इंटरनेशनल स्कूल में कला एवं शैक्षिक प्रदर्शनी का भव्य आयोजन, ‘पावरफुल वेदाज़’ रहा मुख्य आकर्षण

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फर्रुखाबाद। नगर के सुप्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान गायत्री इंटरनेशनल स्कूल, निकट गुड़गांव देवी मंदिर, फर्रुखाबाद में शनिवार, 28 फरवरी 2026 को कला एवं शैक्षिक प्रदर्शनी का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

मुख्य अतिथि के रूप में फर्रुखाबाद की माननीया मेयर श्रीमती वत्सला अग्रवाल उपस्थित रहीं। विद्यालय के चेयरमैन मनोज अग्रवाल, निदेशक देवांश अग्रवाल, निदेशिका श्रीमती प्राची अग्रवाल तथा प्रधानाचार्य राजकुमार शर्मा की उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। अतिथियों ने माँ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर विधिवत उद्घाटन किया।
विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना की मनोहारी प्रस्तुति ने सभी को भावविभोर कर दिया। श्री पारस भारद्वाज के मार्गदर्शन में छात्र-छात्राओं ने उत्कृष्ट सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन कक्षा 8 के छात्र कुशाग्र अग्निहोत्री ने प्रभावशाली ढंग से किया।

कार्यक्रम का मुख्य विषय “विन्यास — पावरफुल वेदाज़” रहा। वेद प्रदर्शनी का केंद्रीय भाव भारतीय संस्कृति के मूल स्तंभ वेदों की महत्ता पर आधारित था। विद्यार्थियों ने चारों वेद—ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद एवं अथर्ववेद—की विशेषताओं एवं महत्व पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी।

इति यादव (कक्षा 6) एवं अदृशा गुप्ता (कक्षा 3) ने ऋग्वेद की महत्ता पर प्रकाश डाला। आरोही गुप्ता (कक्षा 9) एवं आरव अवस्थी (कक्षा 2) ने यजुर्वेद की विशेषताएं बताईं। नित्या गुप्ता (कक्षा 3) एवं अर्नव कुमार (कक्षा 7) ने सामवेद का महत्व स्पष्ट किया। अथर्व गौड़ (कक्षा 6) एवं आरव सिंह (कक्षा 2) ने अथर्ववेद की जानकारी दी। विराज सिंह (कक्षा 4) तथा प्रथु अग्रवाल (कक्षा 2) ने अथर्ववेद में वर्णित औषधीय पौधों का महत्व दर्शाया।

अलीशा खान ने वेदों के आधार पर पृथ्वी और सूर्य की दूरी संबंधी जानकारी प्रस्तुत कर सभी को प्रभावित किया।
इसके पश्चात शैक्षिक प्रदर्शनी का अवलोकन प्रारंभ हुआ। विज्ञान विषय में हाइड्रोलिक ब्रिज, बाँध, बजर गेम एवं मानव कंकाल के मॉडल आकर्षण का केंद्र रहे। कंप्यूटर एवं रोबोटिक्स अनुभाग में इनपुट-आउटपुट उपकरण, स्क्रैच पात्र, कंप्यूटर के भाग, टोल गेट, पार्किंग गेट, स्मार्ट हाउस, स्वीपर मशीन एवं रोबोट के मॉडल प्रदर्शित किए गए।

अंग्रेज़ी विषय में भाषण के अंग, निर्धारक, संज्ञा, आर्टिकल, प्रत्यक्ष एवं परोक्ष कथन, पूर्वसर्ग एवं समोच्चरित भिन्नार्थक शब्दों के मॉडल प्रस्तुत हुए। हिंदी विषय में मुंशी प्रेमचंद कृत “दो बैलों की कथा”, सुमित्रानंदन पंत कृत “ग्राम श्री”, उपभोक्तावाद की संस्कृति, उपसर्ग, विराम-चिह्न, अलंकार, क्रिया के भेद, विशेषण एवं प्राचीन भारत-नवभारत जैसे विषयों पर उत्कृष्ट मॉडल प्रदर्शित किए गए।

गणित में त्रिविमीय आकृतियाँ, कोणों एवं रेखाओं के प्रकार, घड़ी तथा पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन से संबंधित मॉडल सराहे गए। सामाजिक विज्ञान में हड़प्पा संस्कृति, मौलिक अधिकार, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन, वायुमंडल की परतें, नदी तंत्र एवं पृथ्वी की प्रमुख भू-आकृतियों पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी गई।

कक्षा 3 की छात्रा आश्वी द्वारा निर्मित अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर का मॉडल विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। मेयर महोदया ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। पूर्व एमएलसी और संस्थान के चेयरमैन मनोज अग्रवाल एवं निदेशक देवांश अग्रवाल ने आयोजन की भव्यता की सराहना करते हुए छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को बधाई दी। प्रधानाचार्य श्री राजकुमार शर्मा के कुशल नेतृत्व में सम्पूर्ण कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
यह प्रदर्शनी विद्यार्थियों की सृजनात्मक प्रतिभा, भारतीय संस्कृति और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान के अद्भुत समन्वय का प्रेरणादायी उदाहरण सिद्ध हुई।

स्वच्छ होली का संकल्प: सुएज और जलकल विभाग की संयुक्त पहल

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सुएज की स्पेशल टीम तैयार, त्योहार पर भी रहेगी सीवर समस्या पर नजर

लखनऊ: होली के त्योहार को देखते हुए सुएज एवं जलकल विभाग की टीम ने शहरभर में सीवर सफाई अभियान चलाया है। खासकर पुराने इलाकों की संकरी गलियों में, जहां बड़ी मशीनों से सफाई संभव नहीं है, वहां सुएज द्वारा रोबोटिक तकनीक के माध्यम से सीवर सफाई का कार्य कराया जा रहा है।

शहर में सीवर ओवरफ्लो की समस्या न हो, इसके लिए सुएज एवं जलकल विभाग के कर्मचारी 24 घंटे मुस्तैदी से कार्य कर रहे हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि त्योहार के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

सुएज के पीआर मैनेजर अक्षत सक्सेना ने बताया, “होली के त्योहार से पहले हमारी टीम पूरी तत्परता के साथ कार्य कर रही है। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसी भी प्रकार की सीवर समस्या उत्पन्न न हो जिससे त्योहार का रंग फीका पड़े। इसके अलावा, हमने एक विशेष टीम भी तैयार की है जो त्योहार वाले दिन भी उपलब्ध रहेगी, ताकि यदि कहीं कोई सीवर संबंधित समस्या आती है तो उसे तत्काल प्रभाव से दूर किया जा सके।”

इस विशेष अभियान का उद्देश्य शहरवासियों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है, जिससे वे होली का पर्व बिना किसी परेशानी के मना सकें।

अथक, अनवरत और अदम्य ऊर्जा की प्रेरक तस्वीर: सिंगापुर और जापान दौरे में जीवंत कर्मयोग का उदाहरण बने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

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चार दिवसीय विदेश यात्रा में उत्तर प्रदेश का भविष्य गढ़ने के लिए हर क्षण का उपयोग

सीएम योगी को विशिष्ट बनाती है सादगीपूर्ण जीवन शैली और विकास का आधुनिक दृष्टिकोण

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सिंगापुर और जापान का दौरा सिर्फ विदेशी दौरा भर नहीं था, बल्कि इस यात्रा ने दुनिया के सामने उनकी कर्मयोगी की छवि को और पुख्ता किया है। चार दिनों तक बिना थके, अनवरत और अदम्य ऊर्जा के साथ उद्यमियों, विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और उद्योग संस्थानों में भ्रमण के साथ उन्होंने भारतीय प्रवासियों के साथ संवाद किया। यह उनकी कर्मठता, अनुशासन और अपने राज्य के विकास के प्रति प्रतिबद्धता का बेमिसाल उदाहरण है। सीएम योगी की मेहनत रंग भी लाई और उद्यमियों ने उत्तर प्रदेश में निवेश के प्रति जिस तरह उत्साह दिखाया, वह इस बात का प्रमाण है कि विश्व में यूपी को लेकर धारणा बदली है।

सीएम योगी का यह दौरा सामान्य नहीं था। सिंगापुर और जापान का समय भारत से क्रमशः ढाई और साढ़े तीन घंटे आगे है। लंबी विमान यात्रा के बाद समय के अनुकूलन की चुनौती भी थी, लेकिन मुख्यमंत्री के हाव-भाव और सक्रियता में कहीं इसका रंचमात्र भी असर देखने को नहीं मिला। सीएम योगी सुबह छह बजे सिंगापुर पहुंचे और महज ढाई घंटे बाद ही वहां भारत के राजदूत से मिले। इसके बाद बैठकों और औद्योगिक इकाइयों के भ्रमण और उद्योगपतियों से मिलने का सिलसिला शुरू हुआ, जो रात दस बजे रात्रिभोज के साथ समाप्त हुआ। दूसरे दिन भी सुबह पौने नौ बजे से ही मुख्यमंत्री सक्रिय हो गए और रात साढ़े आठ बजे तक वह ‘मिशन सिंगापुर’ पूरा कर चुके थे।

कोई और होता तो इतनी व्यस्तता के बाद शायद रात्रि विश्राम को प्राथमिकता देता, लेकिन सीएम योगी सिंगापुर से रात 10 बजे टोक्यो (जापान) के लिए रवाना हो गए। घंटों की थकाऊ यात्रा के बाद वह सुबह लगभग छह बजे टोक्यो के हानेडा हवाई अड्डे पहुंचे और 25 फरवरी को सवा नौ बजे मित्सुई कंपनी के प्रतिनिधिमंडल से मिलने के लिए तैयार थे। जापान में भी सीएम योगी ने बिना रुके, अनवरत ऊर्जा के साथ दो दिन तक दर्जनों उद्यमियों से मुलाकात की, रोड शो मे भाग लिया और फिर लंबी यात्रा के बाद 27 फरवरी को तड़के अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ लखनऊ एयरपोर्ट पर थे।

इस अथक मेहनत का परिणाम अब उत्तर प्रदेश के विकास में मील के पत्थर के रूप में सामने आया है। डेढ़ लाख करोड़ रुपये के एमओयू और ढाई लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव आगे चलकर उत्तर प्रदेश का भविष्य बदलेंगे। यह इसलिए संभव हो सका क्योंकि मुख्यमंत्री ने हर क्षण को प्रदेश के विकास के लिए साधन के रूप में इस्तेमाल किया। राजनेताओं की विदेश यात्राओं में अक्सर शिष्टाचार भेंट और औपचारिकता भरे कार्यक्रम समय नष्ट कर देते हैं, लेकिन सीएम योगी के इस दौरे में हर बैठक का एजेंडा स्पष्ट था। उनके इस दौरे में कोई औपचारिक कार्यक्रम नहीं, किसी दर्शनीय स्थल का भ्रमण नहीं, बस मिनट टू मिनट बैठकें, रोड शो और उन औद्योगिक संस्थानों का भ्रमण रहा, जिनके सहयोग से उत्तर प्रदेश के भविष्य को गढ़ा जा सके। युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनाए जा सकें अर्थात औपचारिकताओं में न्यूनतम समय और परिणामों पर अधिकतम ध्यान।

इन चार दिनों में सीएम योगी जीवंत कर्मयोग का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरे। हालांकि उनका संपूर्ण जीवन स्वअनुशासन की मिसाल है। राजधानी लखनऊ में उनकी दिनचर्या ऐसी ही नियमबद्ध होती है। तड़के उठकर समाचार पत्रों के माध्यम से प्रदेश की गतिविधियों की जानकारी, उसके बाद जनता दर्शन में आम नागरिकों की समस्याओं को सुनना, अधिकारियों को निर्देश देना और फिर दिनभर बैठकों व कार्यक्रमों का सिलसिला और रात में विभागीय कार्यों की समीक्षा। गोरखपुर प्रवास में भी गोसेवा के बाद वह जनता दर्शन और फिर लगातार कार्यक्रमों में शामिल रहते हैं। हर दिन का उपयोग, हर क्षण का उपयोग। उनका पूरा व्यक्तित्व आध्यात्मिक साधना और प्रशासनिक दक्षता का संगम है। सादगीपूर्ण जीवन शैली और विकास का आधुनिक दृष्टिकोण उन्हें विशिष्ट बनाता है।