भरत चतुर्वेदी
देशभर में राष्ट्रीय युवा दिवस 2027 (National Youth Day) का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है। प्रतिवर्ष 12 जनवरी को महान विचारक और युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) की जयंती पर मनाया जाने वाला यह दिवस इस बार भी पूरे उत्साह और व्यापक सहभागिता के साथ मनाया गया। विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, सामाजिक संगठनों और सरकारी संस्थानों में विविध कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनका उद्देश्य युवाओं को राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरित करना था।
इस वर्ष युवा दिवस के अवसर पर विचार गोष्ठियाँ, युवा संवाद, निबंध व भाषण प्रतियोगिताएँ, खेलकूद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और सामाजिक सेवा गतिविधियाँ आयोजित की गईं। अनेक स्थानों पर युवाओं ने स्वामी विवेकानंद के विचारों—आत्मविश्वास, अनुशासन, साहस और सेवा—को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। डिजिटल माध्यमों पर भी युवा दिवस को लेकर खास सक्रियता देखने को मिली, जहाँ युवाओं ने अपने विचार साझा किए।
युवा दिवस के मंचों से युवाओं को आगे बढ़ने, आत्मनिर्भर बनने और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने के संदेश दिए गए। हालांकि, आयोजनों के बाद यह सवाल भी खड़ा होता है कि क्या ये संदेश केवल भाषणों तक सीमित रह गए, या वास्तव में नीति और व्यवस्था में उनका प्रभाव दिखाई देगा। बेरोजगारी, शिक्षा की गुणवत्ता, प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव और मानसिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दे आज भी युवाओं की प्रमुख चिंताएँ बने हुए हैं।
आत्ममंथन की आवश्यकता
युवा दिवस के आयोजन युवाओं में ऊर्जा और प्रेरणा भरते हैं, लेकिन इनके बाद ठोस कार्ययोजनाओं की आवश्यकता होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार, शिक्षण संस्थान और समाज मिलकर युवाओं के लिए रोजगारोन्मुखी शिक्षा, कौशल विकास और मानसिक स्वास्थ्य समर्थन पर गंभीरता से काम करें, तभी युवा दिवस का वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा।
राष्ट्रीय युवा दिवस की सार्थकता तभी सिद्ध होगी जब साल भर युवाओं की समस्याओं और संभावनाओं पर निरंतर काम हो। केवल एक दिन के आयोजन के बजाय इसे एक सतत अभियान के रूप में देखा जाना चाहिए। विवेकानंद के विचारों को यदि व्यवहार में उतारा जाए, तो युवा शक्ति देश को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में सक्षम है।
राष्ट्रीय युवा दिवस 2027 के आयोजन पूरे होने के बाद अब देश के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि युवाओं से किए गए वादे और दिए गए संदेश किस हद तक ज़मीनी स्तर पर उतर पाएँगे। हर मंच से युवाओं को राष्ट्र की धुरी बताया गया, लेकिन उनकी वास्तविक समस्याओं—रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और समान अवसर—पर ठोस समाधान अभी भी अपेक्षित हैं।
युवा आज केवल प्रेरणा नहीं, बल्कि अवसर चाहते हैं। वे चाहते हैं कि उनकी प्रतिभा को पहचान मिले और मेहनत का उचित परिणाम प्राप्त हो। यदि पुरस्कार, भर्ती और योजनाओं में पारदर्शिता नहीं होगी, तो ऐसे आयोजनों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। समाज की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। परिवार, शिक्षण संस्थान और सामाजिक संगठन यदि युवाओं को केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सहयोग और संवेदनशीलता का पाठ पढ़ाएँ, तो एक संतुलित सामाजिक वातावरण बन सकता है।
अंततः, राष्ट्रीय युवा दिवस का संदेश यही है कि युवा केवल भविष्य नहीं, वर्तमान हैं। यदि उनके विचारों और समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और नीति-निर्माण में उन्हें भागीदार बनाया जाए, तभी यह दिवस वास्तव में सार्थक कहलाएगा।