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Friday, February 27, 2026
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जीरो टॉलरेंस पर सियासी सवाल? बीजेपी कोर कमेटी भी हुईं एक

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सवाल पूछे गए। हालांकि सांसद मुकेश राजपूत और अमृतपुर विधायक सुशील शाक्य ने इस बैठक से दूरी बनाई और वह शामिल नहीं हुए। सूत्रों के माने तो प्रभारी मंत्री के सामने हुए इस पूरे प्रकरण की भूमिका 2 दिन पूर्व ही बन गई थी।
जिला प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषित “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अपराध और गैंगस्टर गतिविधियों पर सख्त प्रहार जारी रहेगा, चाहे आरोपी कोई भी हो।
राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज है। एक ओर प्रशासन अपराध और नेटवर्क पर प्रहार कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सत्ता संगठन के भीतर से उठ रहे सवालों ने नई बहस को जन्म दे दिया है। चौंकाने वाली बात यह मानी जा रही है कि जिस नीति के तहत कार्रवाई हो रही है, उसी पर स्थानीय स्तर पर प्रश्नचिह्न खड़े होते दिखे।
फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है, लेकिन सर्किट हाउस की इस बैठक ने साफ कर दिया है कि अपराध के खिलाफ कार्रवाई अब सियासी विमर्श का केंद्र बन चुकी है।
आशीष पांडे पहले से अनुपम की करता रहा पर भी
कुख्यात माफिया अनुपम दुबे पर प्रशासन द्वारा पूर्व की कार्रवाई को लेकर हो गई भोगांव मैनपुरी निवासी हो पूर्व मंत्री रामनरेश अग्निहोत्री का बेहद करीबी साथिर आशीष पांडे कि पहले भी में प्रमुख रहा उसने कथित ब्राह्मण संगठन के माध्यम से जिला प्रशासन को पहले भी गर्ने का प्रयास किया था और वह पदयात्रा लेकर फर्रुखाबाद मार्च करने भी आ रहा था जिसे पूर्व में काली नदी पर रोक दिया गया था भोगांव विधायक रामनरेश अग्निहोत्री पहले से ही खुलेआम माफिया अनुपम दुबे की पर भी शासन में भी करते रहे हैं हालांकि मुख्यमंत्री के हंटर के कारण उनकी सुनवाई नहीं हुई।

आमने-सामने भिड़ीं दो बाइकों की जोरदार टक्कर, एक की मौत, एक गंभीर घायल

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अमृतपुर, फर्रुखाबाद| थाना क्षेत्र के गांव रेगापुर के पास बाबूजी ढाबा के समीप बुधवार शाम एक भीषण सड़क हादसे में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के रोंगटे खड़े हो गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कमलेश सिंह पुत्र नेपाल सिंह निवासी सिमर झाला, थाना पाली, रिश्तेदारी में रेगापुर आए हुए थे। वापस लौटते समय बाबूजी ढाबा के पास सामने से आ रही दूसरी बाइक से उनकी आमने-सामने जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों बाइक सवार सड़क पर दूर जा गिरे।
हादसे में कमलेश सिंह की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं दूसरी बाइक सवार शिवा पुत्र गंगा बख्श निवासी नगला हूसा गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर की आवाज सुनकर आसपास के लोग दौड़ पड़े। घटनास्थल का दृश्य देख लोगों के रोंगटे खड़े हो गए।
सूचना मिलते ही चौकी इंचार्ज राहुल सिंह, उपनिरीक्षक राघवेंद्र भदौरिया, उपनिरीक्षक रवि सोलंकी समेत पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। पुलिस ने तत्काल 108 एंबुलेंस के माध्यम से घायल शिवा को जिला अस्पताल भिजवाया, जहां उनका उपचार चल रहा है।
घटना की सूचना पर मृतक के परिजन भी मौके पर पहुंच गए, जिससे माहौल गमगीन हो गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक विधिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी है।
थाना अध्यक्ष रक्षा सिंह ने बताया कि तहरीर प्राप्त होने के बाद पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाएगा तथा दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।
इस हादसे के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल है और लोग सड़क पर तेज गति व लापरवाही से वाहन चलाने के प्रति चिंता जता रहे

इलाज में लापरवाही का आरोप, महिला की मौत के बाद निजी अस्पताल में हंगामा

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सीओ सिटी व पुलिस फोर्स सहित मुख्य चिकित्सा अधिकारी मौके पर
फर्रुखाबाद। शहर के मशीनी चौराहा स्थित निजी अस्पताल में इलाज के दौरान एक महिला की मौत हो जाने से परिजनों में आक्रोश फैल गया। गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में हंगामा करते हुए चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाया। सूचना पर पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद परिजनों को शांत कराया। इसके बाद पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
जानकारी के अनुसार जनपद इटावा के मोहरी मुसराहार निवासी राखी (पत्नी शिवकांत कश्यप) का मायका शहर के लाल गेट स्थित डिग्गी ताल मोहल्ले में है। वह एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए अपने मायके आई हुई थी। परिजनों के मुताबिक करीब एक सप्ताह पूर्व राखी का प्रसव मशीनी चौराहा स्थित कुलवंती अस्पताल में हुआ था। प्रसव के बाद से ही उसकी तबीयत पूरी तरह ठीक नहीं थी।
बताया गया कि बीती रात अचानक राखी की हालत बिगड़ गई। परिजन उसे सुबह करीब चार बजे दोबारा कुलवंती अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां मौजूद चिकित्सक डॉ. संजीव मौर्य ने उसे भर्ती कर उपचार शुरू किया। परिजनों का आरोप है कि इलाज में लापरवाही बरती गई, जिसके कुछ ही देर बाद राखी की मौत हो गई।
महिला की मौत की खबर मिलते ही उसके भाई गौरव और अभिषेक पुत्रगण रामलखन, मां सावित्री समेत अन्य परिजन अस्पताल पहुंच गए और चिकित्सकों पर गंभीर आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। स्थिति बिगड़ती देख अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी।
सूचना पर क्षेत्राधिकारी नगर ऐश्वर्या उपाध्याय, थाना प्रभारी कादरी गेट कपिल चौधरी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अवनींद्र कुमार तथा अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रंजन गौतम मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों से वार्ता कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। काफी देर तक चली बातचीत और समझाइश के बाद परिजन शांत हुए।
पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। यदि जांच में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद से अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना रहा, हालांकि पुलिस बल की मौजूदगी से स्थिति नियंत्रण में रही। महिला की असामयिक मौत से परिजनों में शोक व्याप्त है।

घर में गोवंश वध की सूचना पर छापा, कटा मांस बरामद, जांच रिपोर्ट का इंतजार

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फर्रुखाबाद। थाना मऊ दरवाजा क्षेत्र के मोहल्ला शमशेर खानी नकारचियांन्न में एक घर के अंदर गोवंश वध की सूचना मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही हिंदू समाज पार्टी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री राजेश मिश्रा मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी पुलिस को दी।
बताया जा रहा है कि स्थानीय लोगों के माध्यम से घर के अंदर गाय काटे जाने की सूचना मिली थी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और संदिग्ध घर में छापेमारी की। छापे के दौरान घर के भीतर से कटा हुआ मांस बरामद किया गया।
हालांकि समाचार लिखे जाने तक यह स्पष्ट नहीं हो सका था कि बरामद मांस गाय का है या भैंस का। पुलिस ने बरामद मांस को कब्जे में लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि मामला गोवंश वध का है या नहीं।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। यदि गोवंश वध की पुष्टि होती है तो संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
घटना की सूचना से क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी, जिसे पुलिस की सतर्कता से नियंत्रित कर लिया गया। एहतियातन क्षेत्र में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

थाने के सामने सट्टे का अड्डा : छोटू कबाड़ी पर संरक्षण के साये में अवैध कारोबार का आरोप

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फर्रुखाबाद। शहर स्थित थाना मऊदरवाजा क्षेत्र में कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि थाने के ठीक सामने “छोटू कबाड़ी” नाम से चर्चित व्यक्ति द्वारा खुलेआम ऑनलाइन सट्टे का नेटवर्क संचालित किया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि कथित अवैध गतिविधि पुलिस थाना परिसर के सामने ही बेखौफ ढंग से चल रही है, जिससे क्षेत्र में रोष और अविश्वास का माहौल बन गया है।
क्षेत्रवासियों के अनुसार, छोटू कबाड़ी लंबे समय से ऑनलाइन सट्टा कारोबार में सक्रिय है और अपने अधीन कई छोटे सटोरियों का नेटवर्क संचालित करता है। आरोप है कि वह खुलेआम यह दावा करता फिरता है कि उसकी “ऊपर तक सेटिंग” है और कोई उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। इतना ही नहीं, चर्चा यह भी है कि वह जिम्मेदारों तक नियमित “महीना” पहुंचाने की बात कहकर अपने सहयोगियों को संरक्षण का भरोसा देता है। इन दावों के चलते उसके नेटवर्क से जुड़े लोग बिना किसी डर के सट्टे के कारोबार में जुटे हुए हैं।
बताया जा रहा है कि यह कथित ऑनलाइन सट्टा मोबाइल ऐप, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और कॉल के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। तेजी से युवाओं को इस जाल में जोड़ा जा रहा है, जिससे उनके भविष्य पर संकट मंडरा रहा है। कई परिवारों ने चिंता जताई है कि उनके घर के युवा इस अवैध गतिविधि की चपेट में आकर आर्थिक नुकसान उठा रहे हैं। इससे पारिवारिक कलह और आर्थिक अस्थिरता की स्थिति पैदा हो रही है।
गौरतलब है कि छोटू कबाड़ी के खिलाफ पूर्व में भी सट्टा और जुआ अधिनियम के तहत कई मुकदमे दर्ज होने की चर्चा है। इसके बावजूद यदि वह खुलेआम थाने के सामने कथित रूप से अपना नेटवर्क चला रहा है, तो यह व्यवस्था की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि पुलिस थाना परिसर के ठीक सामने ही अवैध गतिविधियां फल-फूल रही हैं, तो आमजन की सुरक्षा और कानून के भय का क्या अर्थ रह जाता है?
क्षेत्रीय लोगों ने जिला प्रशासन और पुलिस के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, आरोपों की सच्चाई सामने लाई जाए और यदि मिलीभगत पाई जाए तो संबंधित जिम्मेदारों पर भी कठोर कार्रवाई की जाए।
अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या सचमुच इस कथित ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क पर सख्त शिकंजा कसा जाएगा, या फिर कानून के साए में ही यह खेल यूं ही चलता रहेगा यह आने वाला समय तय करेगा।

नाम बदला, पर हालात और बदतर: मनरेगा की जमीनी सच्चाई ने खोली व्यवस्था की पोल

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फर्रुखाबाद| समेत प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में रोजगार की आधारशिला मानी जाने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। योजना का नाम बदला, पोर्टल बदले, प्रक्रियाओं को डिजिटल और पारदर्शी बताकर प्रचारित किया गया, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि समस्याएं कम होने के बजाय पहले से कहीं अधिक जटिल और गहरी हो गई हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों का आरोप है कि उन्हें दो-दो महीने तक मजदूरी का भुगतान नहीं मिल रहा। जिन हाथों ने तालाब खोदे, सड़कें बनाई, पंचायत भवनों की मरम्मत की और गांवों को विकास की राह पर आगे बढ़ाया, वही हाथ आज अपने परिवार के लिए रोटी जुटाने को संघर्ष कर रहे हैं। मजदूरी रुकने का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई, घर के राशन और दवाइयों पर पड़ रहा है। कई परिवार उधार लेकर गुजारा कर रहे हैं, जिससे कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
स्थिति केवल श्रमिकों तक सीमित नहीं है। एपीओ, ग्राम रोजगार सेवक, तकनीकी सहायक, कंप्यूटर ऑपरेटर और लेखा सहायकों का लगभग आठ माह से मानदेय लंबित है। ये वही कर्मचारी हैं जो योजना के क्रियान्वयन की पूरी जिम्मेदारी संभालते हैं—मस्टर रोल तैयार करना, ऑनलाइन एंट्री करना, तकनीकी स्वीकृति देना, भुगतान प्रक्रिया को आगे बढ़ाना और शासन के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना। इसके बावजूद उन्हें समय पर उनका हक नहीं मिल पा रहा।
कर्मचारियों का कहना है कि पहले जहां काम सीमित दायरे में था, अब डिजिटल पोर्टल, ई-केवाईसी, भू-टैगिंग, सर्वे, बीएलओ ड्यूटी और अन्य अतिरिक्त दायित्वों ने कार्यभार कई गुना बढ़ा दिया है। दिन-रात काम करने के बाद भी आर्थिक असुरक्षा बनी हुई है। त्योहारों के समय यह संकट और गहरा जाता है, जब परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करना भी चुनौती बन जाता है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि योजना के नाम और स्वरूप में बदलाव के बावजूद भुगतान प्रणाली की खामियां जस की तस बनी हुई हैं। कागजों में पारदर्शिता और समयबद्धता के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर देरी, तकनीकी अड़चनें और प्रशासनिक उदासीनता ने व्यवस्था को अविश्वसनीय बना दिया है। ग्रामीण विकास की धुरी मानी जाने वाली यह योजना यदि समय पर भुगतान ही सुनिश्चित न कर सके, तो उसके उद्देश्य पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मनरेगा जैसी योजनाएं केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने का माध्यम हैं। जब मजदूरी और मानदेय महीनों तक अटका रहता है, तो उसका असर पूरे बाजार और स्थानीय व्यापार पर पड़ता है। गांव की छोटी दुकानों से लेकर स्कूलों तक इसकी मार दिखाई देती है।
स्पष्ट है कि केवल नाम बदलने या नई घोषणाएं करने से हालात नहीं सुधरेंगे। जरूरत है ठोस प्रशासनिक इच्छाशक्ति, पारदर्शी भुगतान प्रणाली और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की। जब तक श्रमिक और कर्मचारी दोनों को समय पर उनका अधिकार नहीं मिलेगा, तब तक योजना का वास्तविक उद्देश्य अधूरा ही रहेगा और असंतोष की चिंगारी सुलगती रहेगी।