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Monday, March 9, 2026
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पठानकोट में दिखे सात संदिग्ध, स्केच जारी

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Seven suspects seen in Pathankot
Seven suspects seen in Pathankot

जम्मू। पठानकोट में एक बार फिर से सात संदिग्ध (Suspects) व्यक्तियों को देखा गया है। एक महिला की सूचना के बाद पंजाब पुलिस तथा बीएसएफ (BSF) ने बुधवार को छह घंटे तक सर्च ओपरेशन चलाया लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। दो माह में यह तीसरा मौका है, जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर संदिग्धों (Suspects) को देखा गया है।

पाकिस्तानी घुसपैठिया होने की आशंका के चलते पुलिस लगातार जांच कर रही है। दो दिन पहले भी बेहदिया गांव में 2 संदिग्धों ने एक घर में जाकर रोटी मांगी थी। सुजानपुर के चक माधो सिंह गांव में भी सेना की वर्दी में 4 संदिग्ध देखे गए।

मंगलवार की रात पठानकोट के गांवच फागतोली में 7 संदिग्ध देखे गए। फागतोली गांव की रहने वाली सीमा देवी ने बताया कि कुछ लोग जंगल की ओर से उनके घर में घुस आए और पानी मांगा। पानी पिलाने के बाद वे फिर से जंगल में घुस गए, जिसके बाद उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी।

डीएसपी समीर सिंह मान ने कहा कि मंगलवार को देर शाम संदिग्ध लोगों को देखे जाने की खबर सामने आई है, जिसके आधार पर हम सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। ये लोग मजदूर भी हो सकते हैं। यह इसलिए भी संभव है, क्योंकि पीछे जंगल का इलाका है। वहां मजदूर काम कर रहे हैं।

संदिग्ध (Suspects) का स्केच जारी किया

मौके पर पहुंची पुलिस और सेना ने महिला से पूछताछ के बाद एक संदिग्ध का स्केच जारी किया है और लोगों से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों ने अपील की है कि अगर ये संदिग्ध किसी को कहीं नजर आए तो इसकी सूचना तुरंत दें। पुलिस का कहना है कि महिला की जानकारी के आधार पर तलाश की जा रही है।

गुरु पूर्णिमा आज: जानिए इसका महत्व

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गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु-शिष्य परंपरा का महापर्व है, जो आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन गुरु की विशेष पूजा और सम्मान किया जाता है। शास्त्रों में कई महान गुरुओं का उल्लेख है जिन्होंने अपने शिष्यों को अमूल्य ज्ञान और शिक्षा दी। यहाँ हम शास्त्रों में वर्णित नौ प्रमुख गुरुओं और उनके विशेषताओं के बारे में जानेंगे:

1. वशिष्ठ मुनि

वशिष्ठ मुनि ब्रह्म ऋषि थे और श्रीराम के कुलगुरु थे। उन्होंने राजा दशरथ और उनके पुत्रों श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, और शत्रुघ्न को शिक्षा दी। वशिष्ठ और विश्वामित्र के बीच विवाद की कथा प्रसिद्ध है, जिसमें अंततः वशिष्ठ ने विश्वामित्र को ब्रह्म ऋषि का पद प्रदान किया।

2. महर्षि वेद व्यास

महर्षि वेद व्यास का जन्म दिन गुरु पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। वेदों का संपादन करने के कारण उन्हें वेद व्यास कहा जाता है। उन्होंने महाभारत, श्रीमद् भागवत और अठारह पुराणों की रचना की। वेद व्यास के पुत्र शुकदेव ने राजा परीक्षित को भागवत कथा सुनाई थी।

3. देव गुरु बृहस्पति

बृहस्पति देवताओं के गुरु हैं और नौ ग्रहों में से एक हैं। उन्होंने अपनी सलाह से देवताओं को दानवों से बचाया और लक्ष्मी जी को रक्षाबंधन की विधि सुझाई जिससे भगवान विष्णु को वापस स्वर्ग भेजा गया।

4. शुक्राचार्य

शुक्राचार्य असुरों के गुरु हैं और उन्होंने महादेव की प्रसन्नता से मृतसंजीवनी विद्या प्राप्त की। इस विद्या से वे मृत असुरों को पुनर्जीवित कर सकते थे। शुक्राचार्य ने नीति शास्त्र की रचना की जिसमें सुख-शांति और सफलता के सिद्धांत बताए गए हैं।

5. परशुराम

परशुराम भगवान विष्णु के अवतार हैं और उन्हें चिरंजीवी माना जाता है। उन्होंने त्रेतायुग और द्वापरयुग में विभिन्न समयों पर शस्त्र विद्या का ज्ञान दिया। महाभारत में उन्होंने द्रोणाचार्य, भीष्म पितामह, और कर्ण को शिक्षा दी थी।

6. सूर्य

सूर्य देव हनुमान जी के गुरु थे। सूर्य देव ने हनुमान जी को चलते-चलते सभी वेदों का ज्ञान दिया। महाभारत काल में कर्ण सूर्य के पुत्र थे।

7. ऋषि सांदीपनि

ऋषि सांदीपनि ने द्वापर युग में श्रीकृष्ण और बलराम को शिक्षा दी। उन्होंने अपने आश्रम में 64 कलाओं की शिक्षा दी थी। श्रीकृष्ण की मित्रता सुदामा से भी सांदीपनि के आश्रम में ही हुई थी।

8. द्रोणाचार्य

द्रोणाचार्य महाभारत काल में पांडवों और कौरवों के गुरु थे। उनका विवाह कृपाचार्य की बहन कृपी से हुआ था और उनके पुत्र का नाम अश्वत्थामा था। महाभारत युद्ध में उनका वध धृष्टद्युम्न ने किया था।

9. नारद मुनि

देवर्षि नारद भक्त प्रहलाद और ध्रुव के गुरु थे। उनकी सलाह से प्रहलाद और ध्रुव को भगवान की कृपा प्राप्त हुई। देवी पार्वती को शिव जी पति के रूप में प्राप्त करने के लिए नारद मुनि ने तप करने की सलाह दी थी।

गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता को रेखांकित करता है और हमें अपने गुरु के प्रति आदर और सम्मान व्यक्त करने की प्रेरणा देता है।

बांग्लादेश में आरक्षण विवाद: सुप्रीम कोर्ट का फैसला और इसके प्रभाव

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सुप्रीम कोर्ट का फैसला

बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सरकारी नौकरियों में आरक्षण की सीमा 56% से घटाकर 7% कर दी है। इसमें स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार वालों को 5% और शेष 2% में एथनिक माइनोरिटी, ट्रांसजेंडर और दिव्यांग शामिल होंगे। कोर्ट का कहना है कि 93% नौकरियां मेरिट के आधार पर मिलेंगी।

हिंसा और उसके परिणाम

इस फैसले के बाद देशभर में हिंसा भड़क उठी है। न्यूज एजेंसी AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक हिंसा में 115 लोगों की मौत हो चुकी है। हालात काबू में करने के लिए सरकार ने कर्फ्यू लगा दिया है और प्रदर्शनकारियों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए गए हैं। पुलिस की जगह सेना तैनात कर दी गई है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

बांग्लादेश 1971 में आजाद हुआ था। उसी साल से आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई थी, जिसमें विभिन्न कैटेगरी के लिए 80% कोटा निर्धारित किया गया था:

  • स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों के लिए: 30%
  • पिछड़े जिलों के लिए: 40%
  • महिलाओं के लिए: 10%
  • सामान्य छात्रों के लिए: 20%

1976 में पिछड़े जिलों के लिए आरक्षण घटाकर 20% कर दिया गया और 1985 में इसे 10% कर दिया गया। अल्पसंख्यकों के लिए 5% कोटा जोड़ा गया, जिससे सामान्य छात्रों के लिए 45% सीटें हो गईं।

2009 में स्वतंत्रता सेनानियों के पोते-पोतियों को भी आरक्षण में शामिल कर लिया गया और 2012 में विकलांग छात्रों के लिए 1% कोटा जोड़ा गया, जिससे कुल कोटा 56% हो गया।

वर्तमान स्थिति

बांग्लादेश में बढ़ते तनाव के चलते 978 भारतीय छात्रों ने अपने घर लौटने का फैसला किया है। ढाका यूनिवर्सिटी को अगले आदेश तक के लिए बंद कर दिया गया है और छात्रों को हॉस्टल खाली करने के निर्देश दिए गए हैं।

निष्कर्ष

बांग्लादेश में आरक्षण की व्यवस्था में किए गए इस बदलाव ने देश में व्यापक स्तर पर असंतोष और हिंसा को जन्म दिया है। यह फैसला एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक मुद्दे के रूप में उभर रहा है। सरकार और सुप्रीम कोर्ट को इस स्थिति को समझदारी से संभालने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में इस तरह के विवादों से बचा जा सके।

बैंकिंग नियमों की अनदेखी: होम लोन पर पहले ही ब्याज वसूली

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यूथ इंडिया, एजेंसी। होम लोन प्राप्त करने वालों के लिए एक आम समस्या सामने आ रही है, जहां बैंक, एनबीएफसी, और अन्य वित्तीय संस्थान होम लोन की राशि को ट्रांसफर करने से पहले ही ब्याज वसूलना शुरू कर देते हैं। यह प्रथा न केवल आरबीआई की गाइडलाइंस का उल्लंघन है, बल्कि ग्राहकों के साथ एक प्रकार की धोखाधड़ी भी है।

मामले की पड़ताल

मामला नंबर 1: आयुष चौधरी, गुरुग्राम

आयुष चौधरी, जो पेशे से इंजीनियर हैं, ने अपने परिवार के लिए एक 3 बीएचके फ्लैट खरीदने के लिए लोन लिया। सैंक्शन लेटर मिलने के बाद भी लोन की राशि बिल्डर के खाते में नहीं पहुँची थी, फिर भी उनके खाते से 1.2 लाख की EMI कटने का संदेश आ गया। बैंक ने तकनीकी रूप से इसे डिस्बर्सल के रूप में गिना और ब्याज वसूली शुरू कर दी।

मामला नंबर 2: विजयिता सिंह, भोपाल

विजयिता सिंह ने 22.5 लाख रुपए का लोन मंजूर कराया, लेकिन रजिस्ट्री से पहले ही बैंक ने डिस्बर्सल दिखा दिया और 13,370 रुपए का ब्याज वसूलना शुरू कर दिया। पूछताछ पर बैंक ने बताया कि चेक बन गया है, इसलिए ब्याज देना होगा।

नियम और वास्तविकता

आरबीआई के नियम

  • फंड ट्रांसफर के बाद ही ब्याज वसूली: लोन की राशि ट्रांसफर होने के बाद ही ब्याज लिया जाना चाहिए।
  • पूरा माह का ब्याज नहीं: लोन माह के किसी भी दिन आवंटित हो, केवल शेष दिनों का ब्याज लिया जाना चाहिए।
  • अतिरिक्त EMI की गणना: अतिरिक्त ली गई EMI को पूरी लोन राशि से घटाकर ही ब्याज वसूलना चाहिए।

वास्तविकता

  • कई बैंक लोन की राशि ट्रांसफर से पहले ही पूरा माह का ब्याज वसूल लेते हैं।
  • लोन की एक अतिरिक्त EMI लेने के बाद भी ब्याज की गणना पूरी लोन राशि पर ही की जाती है।

ग्राहकों के लिए सलाह

भास्कर एक्सपर्ट की राय

आदिल शेट्टी, सीईओ, बैंक बाजार के अनुसार, यदि बैंक लोन राशि के ट्रांसफर से पहले ब्याज वसूलते हैं तो ग्राहक को तुरंत बैंक से राशि लौटाने के लिए कहना चाहिए। यदि बैंक नहीं मानते, तो बैंकिंग लोकपाल में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

बैंकिंग अधिकारियों की राय

पीयूष गुप्ता, एजीएम (पीआर), बैंक ऑफ बड़ौदा, मुंबई ने कहा कि जब तक लोन की राशि बिल्डर के खाते में न पहुंचे, ब्याज वसूलना गलत है। ऐसे मामलों में उचित कार्रवाई की जाएगी।

निष्कर्ष

बैंकों का तर्क है कि चेक नंबर या ट्रांजेक्शन कोड रजिस्ट्री में आवश्यक होता है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह तर्क सही नहीं है। बैंक रियल टाइम पर कोड जनरेट कर सकते हैं और डॉक्यूमेंटेशन पूरा होने के बाद ही ब्याज वसूलना शुरू कर सकते हैं। ग्राहकों को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहना चाहिए और ऐसे मामलों में बैंकिंग लोकपाल का सहारा लेना चाहिए।

पौराणिकता और और परंपराओं का एक विशिष्ट पर्व: गुरुपूर्णिमा

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जहां शिष्य गुरुओं को श्रद्धानवत करते नमन

शरद कटियार: गुरुपूर्णिमा भारतीय संस्कृति और परंपराओं में एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है। यह पर्व आषाढ़ मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। गुरुपूर्णिमा का उल्लेख पौराणिक कथाओं और धार्मिक ग्रंथों में मिलता है, जिसमें गुरु के महत्व और उनकी वंदना का विशेष उल्लेख है। गुरुपूर्णिमा का सबसे महत्वपूर्ण पौराणिक संदर्भ महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास से जुड़ा हुआ है। वेदव्यास जी को आदिगुरु माना जाता है, जिन्होंने वेदों का विभाजन और महाभारत की रचना की । इस दिन को उनके जन्मदिन के रूप में भी मनाया जाता है। इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। महर्षि वेदव्यास ने ज्ञान के प्रसार में अपना जीवन समर्पित कर दिया था, और उन्होंने अपने शिष्यों को भी ज्ञान का महत्व समझाया था।
भारतीय परंपरा में गुरु-शिष्य का संबंध अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। गुरु वह होता है जो शिष्य को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है । यह परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है और इसमें गुरु की भूमिका सर्वोपरि मानी जाती है।
उपनिषदों में कहा गया है
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥
इस श्लोक में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर के रूप में देखा गया है, जो सृष्टि की रचना, पालन और संहार करते हैं। गुरु को परब्रह्म का साक्षात् स्वरूप माना गया है और उन्हें नमस्कार किया गया है।
गुरुपूर्णिमा के दिन शिष्य अपने गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा और आभार प्रकट करते हैं। इस दिन विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। विभिन्न आश्रमों और गुरुकुलों में भी इस दिन विशेष कार्यक्रम होते हैं, जिसमें शिष्य अपने गुरु को पुष्पांजलि अर्पित करते हैं और उनकी शिक्षाओं को स्मरण करते हैं।
आधुनिक समय में भी गुरु का महत्व वही है जो प्राचीन काल में था। आज भी शिक्षक, मार्गदर्शक और प्रेरणास्त्रोत के रूप में गुरु की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षा के क्षेत्र में, जीवन के विभिन्न पहलुओं में मार्गदर्शन और प्रेरणा प्रदान करने वाले व्यक्ति को गुरु का दर्जा दिया जाता है । गुरुपूर्णिमा एक ऐसा पर्व है जो हमें अपने गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है। यह पर्व न केवल हमारी संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक है, बल्कि हमें यह भी याद दिलाता है कि ज्ञान और मार्गदर्शन का स्रोत हमेशा हमारे गुरु ही होते हैं। इस पवित्र दिन पर, हमें अपने गुरु के प्रति समर्पित रहकर उनकी शिक्षाओं का पालन करना चाहिए और समाज में ज्ञान और सद्भावना का प्रसार करना चाहिए।
(लेखक यूथ इंडिया न्यूज ग्रुप के मुख्य संपादक हैं)

9 साल की बोधना का वर्ल्ड चेस ओलंपियाड में प्रदर्शन

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यूथ इंडिया, एजेंसी। बोधना शिवनंदन, एक 9 साल की भारतीय मूल की ब्रिटिश बच्ची, ने बुडापेस्ट चेस ओलंपियाड के लिए इंग्लैंड की ओर से क्वालिफाई कर इतिहास रच दिया है। वह इंग्लैंड की ओर से हाई लेवल पर चेस खेलने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बन गई है।

कैसे शुरू हुआ बोधना का चेस सफर

बोधना का चेस के प्रति रुझान 2020 में शुरू हुआ जब दुनिया महामारी से जूझ रही थी। बोधना के पिता शिवनंदन वेलायुधम, जो लंदन में एक इंजीनियर हैं, के दोस्त को अचानक भारत लौटना पड़ा और वह अपना सामान लंदन में छोड़ गए। इसी सामान में एक चेस बोर्ड भी था। बोधना को इस बोर्ड से ठोकर लगी और उसकी जिज्ञासा ने उसे चेस के प्रति आकर्षित कर दिया। उसने यूट्यूब और ऑनलाइन चेस खेलकर चेस की बारीकियां सीखीं और धीरे-धीरे अपने पिता को हराने लगी।

बोधना का खेल

इंग्लिश चेस फेडरेशन के इंटरनेशनल चेस के डायरेक्टर मैल्कम पेन बोधना को टीम की सबसे कम उम्र की प्लेयर कहते हैं। बोधना को पोजिशनल प्लेयर कहा जाता है क्योंकि वह मोहरों की स्थिति पर गहरी जानकारी रखती है और धैर्यपूर्वक हर चाल चलती है। इंग्लैंड के इंटरनेशनल मास्टर चेस प्लेयर लरिंस ट्रेंट को बोधना पर यकीन है कि वह एक ग्रेट प्लेयर बनेगी।

उपलब्धियां

बोधना ने पिछले दिसंबर में यूरोपीय ब्लिट्ज चेस चैंपियनशिप में महिला प्लेयर्स को हराया और हाल ही में उसे फिडे मास्टर के तौर पर रैंक किया गया है। यह इंटरनेशनल चेस फेडरेशन द्वारा दी जाने वाली उपाधि है।

भविष्य की योजनाएं

बोधना के पास 3 साल का समय है अपने पहले लक्ष्य को हासिल करने के लिए। उसके आदर्श, क्यूबा के दिवंगत प्लेयर जोस राउल कैपब्लांका के गेम्स देखना उसे पसंद है। बोधना के पिता का कहना है कि उनसे कोई अपेक्षा नहीं है और वे चाहते हैं कि बोधना अपने माइलस्टोन खुद तय करे।

निष्कर्ष

बोधना शिवनंदन की कहानी प्रेरणादायक है और उसने यह साबित किया है कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। उसकी कड़ी मेहनत और समर्पण ने उसे इस मुकाम तक पहुंचाया है और वह भविष्य में भी बड़ी उपलब्धियाँ हासिल कर सकती है।