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Thursday, February 12, 2026
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बरसात से मौसम में आई नरमी, लोगों को गर्मी से मिली राहत

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फर्रुखाबाद। पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बरसात ने शहरवासियों को बड़ी राहत दी है। तेज धूप और उमस से जूझ रहे लोग अब मौसम में आई नरमी का आनंद ले रहे हैं। बरसात के कारण तापमान में गिरावट आई है, जिससे गर्मी से परेशान लोगों ने चैन की सांस ली है। शहर के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई है, जिससे न केवल तापमान में कमी आई है, बल्कि खेतों और बागों को भी भरपूर पानी मिला है। किसानों के चेहरे पर खुशी देखने को मिल रही है, क्योंकि इस बारिश से फसलें बेहतर होंगी और पानी की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, लगातार हो रही बारिश के कारण कुछ निचले इलाकों में जलभराव की समस्या भी उत्पन्न हो गई है। लेकिन अधिकांश लोगों के लिए यह बरसात राहत भरी साबित हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में भी हल्की बारिश होने की संभावना है, जिससे मौसम में ठंडक बनी रहेगी। लोगों ने इस बदलते मौसम का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि बरसात का यह दौर जारी रहेगा।

आवारा गोवंश की समस्या से जनता परेशान, प्रशासन बेपरवाह

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यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। शहर में आवारा गोवंश की समस्या गंभीर होती जा रही है। सडक़ों और गलियों में दिन-रात घूमते ये मवेशी न केवल यातायात में बाधा डाल रहे हैं, बल्कि दुर्घटनाओं का कारण भी बन रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन आवारा जानवरों की वजह से बच्चों और बुजुर्गों के लिए सडक़ पार करना मुश्किल हो गया है।
शहर के विभिन्न इलाकों, जैसे लालगेट, बढ़पुर, और आवास विकास में आवारा गोवंश की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। खासकर रात के समय, ये मवेशी बीच सडक़ पर बैठ जाते हैं, जिससे वाहनों का आवागमन बाधित होता है। कई बार तो इनकी वजह से दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं, जिसमें लोग घायल हुए हैं।
नगरपालिका प्रशासन इस समस्या के समाधान के लिए गंभीर कदम उठाने में असफल साबित हो रहा है। शहरवासियों का कहना है कि गोशालाओं की संख्या बढ़ाई जाए और इन आवारा मवेशियों को वहां भेजा जाए, ताकि सडक़ों पर शांति बनी रहे। लेकिन प्रशासन की तरफ से अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है।
स्थानीय लोग अब प्रशासन से इस मुद्दे पर तुरंत ध्यान देने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो यह आने वाले दिनों में और भी गंभीर रूप ले सकती है।

जिले में भ्रष्टाचार का हर ओर बोलबाला: जनता परेशान, प्रशासन मौन

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यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। जिले में भ्रष्टाचार की स्थिति हर ओर हावी होती जा रही है। सरकारी विभागों से लेकर स्थानीय प्रशासन तक, हर जगह घूसखोरी और रिश्वतखोरी के मामले आम हो गए हैं। इस कारण आम जनता को बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि प्रशासन मौन साधे हुए है।
सरकारी विभागों में बढ़ते भ्रष्टाचार के आंकड़े
सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के मामलों में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है। एक हालिया सर्वे के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में जिले में भ्रष्टाचार के मामलों में 40त्न की वृद्धि हुई है। इनमें से अधिकतर मामले पंचायत स्तर, भूमि अभिलेख कार्यालय, बिजली विभाग, और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े हुए हैं।
– पंचायत स्तर पर: 2021 में 120 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2023 में बढक़र 170 हो गए हैं।
– भूमि अभिलेख कार्यालय में: 2021 में 85 मामले थे, जो 2023 में बढक़र 130 हो गए हैं।
– बिजली विभाग में: 2021 में 75 मामले थे, जो 2023 में 110 तक पहुंच गए हैं।
– स्वास्थ्य विभाग में: 2021 में 60 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2023 में 100 हो गए हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बिना रिश्वत दिए कोई भी काम नहीं हो रहा है। चाहे वह जमीन के कागजात बनवाना हो या फिर बिजली का कनेक्शन लेना, हर जगह पैसे की मांग की जा रही है। कई लोगों ने बताया कि उन्होंने भ्रष्ट अधिकारियों की शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जिले डीएम डाक्टर वी के सिंह तो मीडिया से बात नही करते इस बारे में अन्य प्रशासनिक अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन जनता का कहना है कि जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। शिकायतों का निस्तारण नहीं हो रहा है और दोषी अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए आवश्यक है कि एक प्रभावी निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए। साथ ही, भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चलाए जाने चाहिए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
जिले में भ्रष्टाचार की स्थिति दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। अगर समय रहते प्रशासन इस पर कड़ी कार्रवाई नहीं करता, तो यह जनता के लिए और भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। जनता को जागरूक होने की जरूरत है और भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने की आवश्यकता है।

संकिसा को मिला आदर्श नगर पंचायत का दर्जा मिलने के बाद मिल सकेगा ज्यादा बजट

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यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। संकिसा नगर पंचायत को आदर्श नगर पंचायत का दर्जा मिल गया है। इस कदम से इस क्षेत्र में विकास की संभावनाओं को नई ऊंचाई मिलेगी। संकिसा, जो कि एक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध है, विशेष रूप से बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है। यहां बड़ी संख्या में देश-विदेश से बौद्ध धर्म के अनुयायी आते हैं, जिससे यह स्थान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रसिद्ध हो चुका है।सांसद मुकेश राजपूत के प्रयासों से बड़ी उपलब्धि पर लोगों में उत्साह की लहर है।
आदर्श नगर पंचायत का दर्जा मिलने के बाद, संकिसा को अब विकास कार्यों के लिए अधिक बजट मिलेगा। इस बजट का उपयोग क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने, सडक़, बिजली, पानी और सफाई जैसी आवश्यक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा। इसके साथ ही, इस क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
इस विकास से स्थानीय लोगों को भी रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे, और संकिसा के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को संरक्षित रखते हुए यहां के विकास को सुनिश्चित किया जाएगा। नगर पंचायत प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस उपलब्धि पर खुशी जताई है और संकिसा को एक आदर्श नगर के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम करने का आश्वासन दिया है।
यह कदम न केवल संकिसा के विकास के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को भी संरक्षित रखने में सहायक होगा। अब यहां आने वाले पर्यटकों और बौद्ध अनुयायियों को और भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी, जिससे संकिसा की प्रतिष्ठा और भी बढ़ेगी।

जातीय संगठन और पर्यावरण सुरक्षा: पेड़ लगाने के अभियान से सामाजिक और पारिस्थितिक संतुलन की दिशा में कदम

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यूथ इंडिया (प्रशांत कटियार)
फर्रुखाबाद। आज जब पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण संकट से जूझ रही है, जातीय संगठनों का एकजुट होकर पेड़ लगाने का अभियान समाज और पर्यावरण दोनों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। इस तरह के अभियान न केवल सामूहिकता और एकजुटता को बढ़ावा देंगे, बल्कि हमारे पर्यावरण को भी सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
जातीय संगठनों की भूमिका
भारत में जातीय संगठन अपने समुदायों में गहरी पकड़ रखते हैं और सामाजिक, धार्मिक तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। यदि ये संगठन एक राय होकर पेड़ लगाने के अभियान को बढ़ावा देते हैं, तो यह न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव का भी मार्ग प्रशस्त करेगा।
ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरणीय चुनौती
ग्लोबल वार्मिंग आज एक गंभीर मुद्दा बन चुका है, जिसके परिणामस्वरूप धरती का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। इसके कारण प्राकृतिक आपदाओं, जैसे बाढ़, सूखा, और अनियमित मौसमी परिवर्तन की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। ग्लोबल वार्मिंग का मुख्य कारण वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्रीनहाउस गैसों का अधिक उत्सर्जन है। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ लगाना एक प्रभावी तरीका हो सकता है, क्योंकि पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर वातावरण को शुद्ध करते हैं।
पेड़ लगाने के आंकड़े और महत्व
2019 में भारत ने ‘वन महोत्सव के दौरान 2 करोड़ से अधिक पेड़ लगाए, जिससे 28.4 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण हुआ। एक पेड़ औसतन अपने जीवनकाल में 1 टन कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करता है। यदि जातीय संगठन सामूहिक रूप से हर साल लाखों पेड़ लगाने का संकल्प लेते हैं, तो इससे न केवल पर्यावरणीय संतुलन बनेगा, बल्कि ग्लोबल वार्मिंग के खतरे को भी कम किया जा सकेगा।
सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव

पेड़ लगाने के अभियान से जातीय संगठनों के बीच आपसी सहयोग और भाईचारे की भावना बढ़ेगी। यह अभियान समाज को एकजुट करेगा और समुदायों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझने में मदद करेगा। इससे बच्चों और युवाओं में भी प्रकृति के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, जो आने वाली पीढिय़ों के लिए एक सकारात्मक संदेश होगा।
जातीय संगठनों का एकजुट होकर पेड़ लगाने का अभियान समाज और पर्यावरण दोनों के लिए वरदान साबित हो सकता है। इससे न केवल पर्यावरणीय संकटों से निपटने में मदद मिलेगी, बल्कि समाज में एकता और सहयोग की भावना भी प्रबल होगी। ऐसे प्रयासों से हम ग्लोबल वार्मिंग के खतरे को कम कर सकते हैं और एक सुरक्षित, स्वच्छ और समृद्ध भविष्य की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। यह समय है कि हम अपने समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें और जातीय संगठनों के साथ मिलकर पेड़ लगाने जैसे अभियानों को सफल बनाएं।

जिले में खुलेआम चल रहा जिस्म फिरोशी का धंधा: अब तो लाइसेंस के जरिए हो रहा संचालन

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यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। जिले में जिस्म फिरोशी का धंधा एक गंभीर समस्या बन गया है, जो अब न केवल छिप-छिपाकर बल्कि खुलेआम हो रहा है। हाल ही में, प्रशासन द्वारा जारी किए गए कुछ लाइसेंसों के जरिए यह खेल और भी खुलेआम चलने लगा है, जिससे स्थानीय लोग आक्रोशित हैं।
जिले के विभिन्न इलाकों में जिस्म फिरोशी के अवैध धंधे की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की निष्क्रियता और पुलिस की मिलीभगत के कारण यह धंधा और भी तेजी से फैल रहा है। जानकारी के अनुसार, जिले में कम से कम 10 से 12 जगहों पर इस धंधे का संचालन हो रहा है, जहां नाबालिग लड़कियों को भी इस काम में धकेला जा रहा है।
हैरान करने वाली बात यह है कि अब इस अवैध धंधे को वैधता देने के लिए कुछ जगहों पर लाइसेंस भी जारी किए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, जिले में एक प्रमुख समेत कई प्रतिष्ठान हैं जिन्हें लाइसेंस जारी किए गए हैं, जहां मसाज पार्लर और अन्य सुविधाओं के नाम पर जिस्म फिरोशी का धंधा चलाया जा रहा है। हाल ही में पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में जिले में 20 से अधिक छापेमारी की गई है, जिसमें कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से अधिकांश मामले लाइसेंसधारी प्रतिष्ठानों से जुड़े हुए हैं। इन छापेमारी के दौरान कई नाबालिग लड़कियों को भी मुक्त कराया गया है, जिन्हें अवैध रूप से इस धंधे में धकेला गया था।
स्थानीय लोगों ने इस अवैध धंधे को लेकर प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही प्रशासन ने इस पर लगाम नहीं लगाई तो यह धंधा और भी बढ़ सकता है, जिससे जिले का सामाजिक ताना-बाना बिखर सकता है।
जिले के पुलिस अधीक्षक का कहना है कि जिस्म फिरोशी के धंधे पर नकेल कसने के लिए प्रशासन द्वारा कड़ी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी लाइसेंसधारी प्रतिष्ठान को इस धंधे में लिप्त पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फर्रुखाबाद में जिस्म फिरोशी का यह धंधा समाज के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।जनता की मांग है कि प्रशासन इसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाए और जिले को इस अवैध धंधे से मुक्त कराए।