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Friday, January 30, 2026
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UGC NET 2024 एग्जाम सिटी स्लिप जारी, ऐसे करें डाउनलोड

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UGC NET
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नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने UGC NET 2024 जून सेशन की परीक्षा के लिए एग्जाम सिटी स्लिप जारी कर दी है। रजिस्टर्ड अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट ugcnet.nta.ac.in पर जाकर इसे डाउनलोड कर सकते हैं। सिटी स्लिप डाउनलोड करने के लिए कैंडिडेट को रजिस्ट्रेशन नंबर का उपयोग करना होगा। सिटी स्लिप 21, 22 और 23 अगस्त को होने वाली परीक्षा के लिए जारी की गई है।

स्लिप में कैंडिडेट के एग्जाम सिटी की जानकारी होगी, जिससे कि अभ्यर्थी समय से अपने परीक्षा शहर में पहुंच सकें। एडमिट कार्ड एग्जाम से दो या तीन दिन पहले जारी किया जाएगा। यूजीसी नेट परीक्षा हिंदी, अंग्रेजी, कन्नड़, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, अरबी, भाषा विज्ञान, नेपाली, मराठी, तेलुगु, उर्दू, चीनी, डोगरी, मणिपुरी, असमिया, गुजराती, फारसी, फ्रेंच, स्पेनिश, रूसी, राजस्थानी, श्रम कल्याण, पुस्तकालय और सूचना विज्ञान सहित कुल 83 विषयों के लिए आयोजित की जाएगी।

UGC NET 2024 Exam City Slip करें डाउनलोड-

– आधिकारिक वेबसाइट ugcnet.nta.ac.in पर जाएं।

– यहां यूजीसी नेट एग्जाम सिटी स्लिप के लिंक पर क्लिक करें।

– अब एप्लीकेशन नंबर और जन्म तिथि दर्ज करें।

– एग्जाम सिटी स्लिप आपकी स्क्रीन पर आ जाएगी।

– अब चेक करें और डाउनलोड करें।

परीक्षा सीबीटी मोड में 21 अगस्त से शुरू होकर 4 सितंबर तक देश भर में निर्धारित विभिन्न केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। एग्जाम का आयोजन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की ओर से किया जाएगा।

राजभर ‘चाभी’ से खोलेंगे पार्टी की किस्मत, जानें क्यों बदला चुनाव चिन्ह

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Om Prakash Rajbhar
Om Prakash Rajbhar

लखनऊ। जो छड़ी चुनाव चिन्ह सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और ओम प्रकाश राजभर की शान हुआ करती थी, वो अब उनके साथ नहीं रहेगी। राजभर (Om Prakash Rajbhar) की पार्टी ने घोषणा की है कि उसका चुनाव चिन्ह अब चाबी होगा। चुनाव आयोग की ओर से उसे ये चिन्ह दिया गया है। लोकसभा चुनाव-2024 के दो महीने बाद पार्टी को नया चुनाव चिन्ह मिला है। दरअसल, एसबीएसपी ने घोसी में पार्टी उम्मीदवार अरविंद राजभर की हार के लिए चुनाव चिन्ह को जिम्मेदार ठहराया था। उसका मानना था कि चुनाव चिन्ह पर भ्रम के कारण अरविंद राजभर हार गए। नतीजों के बाद ही ओमप्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar)  ने इसे बदलने का फैसला कर लिया था।

इस फैसले का ऐलान सोमवार को लखनऊ में बुलाई गई बैठक में किया गया। इस दौरान ओम प्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में फिर से चुना गया। बैठक में पार्टी के राज्य संगठन को चार अलग-अलग क्षेत्रों में विभाजित किया गया, जिसमें पूर्वाचल, पश्चिमांचल, बुंदेलखंड और मध्यांचल हैं।

छड़ी से चाबी पर क्यों आई पार्टी?

ओमप्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) के बेटे अरविंद राजभर घोसी में NDA के उम्मीदवार थे। उन्हें सपा के राजीव राय का हाथों हार का सामना करना पड़ा था। राजभर की हार 1।62 लाख वोटों से हुई थी। दिलचस्प बात यह है कि चुनाव में मूलनिवासी समाज पार्टी की लीलावती राजभर को 47 हजार 527 वोट मिले थे। बाद में एसबीएसपी ने आरोप लगाया कि चुनाव चिन्ह के कन्फ्यूजन के कारण हमारे वोट विभाजित हो गए। लीलावती की पार्टी का चुनाव चिन्ह हॉकी स्टिक है जो हमारी पार्टी के चिन्ह स्टिक (छड़ी) से मिलता जुलता है।

इसके बाद एसबीएसपी ने चिन्ह को चाबी में बदलने का निर्णय लिया। ओमप्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) के मुताबिक, छड़ी चुनाव चिन्ह की वजह से हर चुनाव में उनके दल को नुकसान हो रहा था। इसे देखते हुए अब तय किया गया है कि चाबी चुनाव निशान पार्टी का प्रतीक बनेगा।

राजभर (Om Prakash Rajbhar)  ने कहा, विधानसभा और लोकसभा चुनाव में विपक्षी दल उनके प्रत्याशी के खिलाफ हॉकी निशान से डमी प्रत्याशी उतार देते थे। इसकी वजह से हर विधानसभा सीट पर औसतन चार से छह हजार वोट छड़ी की जगह हॉकी को मिलते थे। कुछ ऐसा ही बीते लोकसभा चुनाव में हुआ जब घोसी सीट पर हॉकी चुनाव निशान वाली महिला प्रत्याशी को 48 हजार से ज्यादा वोट मिल गए।

भ्रम के कारण हारी चुनाव?

चुनाव के बाद पार्टी ने अपने वोटरों से बताया था कि ईवीएम मशीन में ऊपर से तीसरे नंबर पर उनका चुनाव चिन्ह छड़ी है। लेकिन, छड़ी और हॉकी मिलते जुलते चुनाव चिन्ह थे। इसलिए हमारे वोटर गलती से ऊपर से तीसरे नंबर पर छड़ी का बटन दबाने के बजाए नीचे से तीसरे नंबर के हॉकी के बटन का दबा आए। जिसकी वजह से लीलावती को इतना वोट मिला। हार के मंथन में यह बात भी सामने आई कि कुछ मतदाता हॉकी और छड़ी को लेकर असमंजस में हो गए, जिसके चलते उन्होंने दूसरे को वोट दे दिया।

इस बीच ओम प्रकाश राजभर ने घोषणा की कि उनकी पार्टी बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव भी मजबूती से लड़ेगी। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी न केवल उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रभाव रखती है, बल्कि बिहार में भी। राजभर ने अपनी पार्टी के नेताओं से आगामी पंचायत चुनाव और उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू करने के लिए भी कह दिया है। इस बीच अरविंद राजभर को एसबीएसपी का राष्ट्रीय महासचिव और पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है। जबकि उनके भाई अरुण राजभर को राष्ट्रीय प्रवक्ता घोषित किया गया है। वहीं, प्रेम चंद कश्यप को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष चुना गया है।

एसबीएसपी की उपस्थिति मुख्य रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश में है, लेकिन राज्य के अन्य हिस्सों में भी अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए पार्टी ने संगठन को चार क्षेत्रों में विभाजित किया है और प्रत्येक को एक प्रमुख भी मिला है। इस तरह एक प्रदेश अध्यक्ष के साथ-साथ चार जोनल अध्यक्ष भी होंगे।

बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को ‘सुप्रीम’ राहत, कोर्ट ने बंद किया मानहानि का केस

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Patanjali Ayurveda gets relief from Supreme Court
Patanjali Ayurveda gets relief from Supreme Court

नई दिल्ली। पतंजलि (Patanjali) ‘भ्रामक विज्ञापन केस’ (Misleading Advertisement Case) में बाबा रामदेव (Baba Ramdev) और आचार्य बालकृष्ण (Acharya Balkrishna) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मानहानि का केस बंद कर दिया है। दरअसल, पतंजलि  के उत्पादों के बारे में भ्रामक विज्ञापन (Misleading Advertisement) दिए जाने के इस केस में माफीनामा दाखिल किया गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस हिमा कोहली और संदीप मेहता की बेंच ने यह फैसला सुनाया है। बता दें कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन  ने पतंजलि पर कोविड-19 वैक्सीनेशन (Covid-19 Vaccination) को लेकर एक कैंपेन चलाने का आरोप लगाया था। इस पर अदालत ने चेतावनी दी थी कि पतंजलि आयुर्वेद की तरफ से झूठे और भ्रामक विज्ञापन (Misleading Advertisement) तुरंत बंद होने चाहिए।

हरियाणा विधानसभा चुनाव की आहट से पहले राम रहीम जेल से आया बाहर

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि पतंजलि के भ्रामक विज्ञापन से एलोपैथी दवाइयों की उपेक्षा हो रही है। आईएमए ने कहा था कि पतंजलि के दावों की पुष्टि नहीं हुई है और ये ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट 1954 और कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 जैसे कानूनों का सीधा उल्लंघन है।

पतंजलि आयुर्वेद (Patanjali Ayurveda) ने दावा किया था कि उनके प्रोडक्ट कोरोनिल और स्वसारी से कोरोना का इलाज किया जा सकता है। इस दावे के बाद कंपनी को आयुष मंत्रालय ने फटकार लगाई थी और इसके प्रमोशन पर तुरंत रोक लगाने को कहा था।

हरियाणा विधानसभा चुनाव की आहट से पहले राम रहीम जेल से आया बाहर

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Ram Rahim
Ram Rahim

चंडीगढ़। हरियाणा में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान 25 अगस्त के बाद होने की संभावना है। इसी बीच हत्या और बलात्कार का दोषी डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम (Ram Rahim) एक बार फिर जेल से बाहर आ गया है। राम रहीम को 21 दिन की फरलो (Furlough) मिली है, जिसके बाद वह मंगलवार को सुनारिया जेल से बाहर आ गया।

हरियाणा की सुनारिया जेल (Sunariya Jail) से गुरमीत राम रहीम (Ram Rahim) को मंगलवार सुबह लगभग 6.30 बजे पुलिस सुरक्षा में रिहा किया गया। वह फरलो की अवधि उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में बरनावा आश्रम में बिताएगा। राम रहीम अपनी दो अनुयायियों से बलात्कार के मामले में 20 साल की सजा काट रहा है और रोहतक जिले की सुनारिया जेल में बंद है। उसे 19 जनवरी को 50 दिन की पैरोल दी गई थी।

राम रहीम इससे पहले छह बार पहले भी फरलो पर जेल से बाहर आ चुका हैं। उसके जेल से बाहर आने की घटना को हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 (Haryana Assembly Elections 2024) से जोड़कर भी देखा जा रहा है। राम रहीम ने जून 2024 में एक बार फिर फरलो की मांग की थी। उसने 21 दिन की फरलो के लिए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

इससे पहले फरवरी में हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से कहा था कि वह डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को उसकी अनुमति के बिना आगे पैरोल न दे। उस समय हाईकोर्ट शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को अस्थायी रिहाई दिए जाने को चुनौती दी थी।

मामले की सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट में सफाई दी थी कि सिर्फ राम रहीम (Ram Rahim)  ही नहीं बल्कि हत्या और बलात्कार जैसे मामलों में सजा काट रहे 80 से अधिक कैदियों को इसी तरह से नियमों के मुताबिक पैरोल या फरलों की सुविधा का लाभ दिया गया है।

क्या है फरलो?

फरलो एक तरह से छुट्टी की तरह होती है, जिसमें कैदी को कुछ दिन के लिए रिहा किया जाता है। फरलो की अवधि को कैदी की सजा में छूट और उसके अधिकार के तौर पर देखा जाता है। कैदी को जेल में कुछ वर्ष बिताने के पश्चात जेल मे उसके अच्छे आचरण और अनुशासन को बनाए रखने के लिए, कम समय के लिए छोड़ा जाता है। फरलो उस कैदी को प्रदान की जा सकती है जिसे 5 साल से अधिक वर्षों के लिए सख्त सजा दी गई हो और वह दोषसिद्धि के पश्चात तीन साल की सजा काट चुका हो।

आज से डॉक्टरों की देशव्यापी हड़ताल… ओपीडी और वैकल्पिक सेवाएं रहेंगी बंद

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Doctors Strike
Doctors Strike

नई दिल्ली। कोलकाता के एक मेडिकल कॉलेज में एक महिला डॉक्टर के साथ रेप और मर्डर के बाद पूरे देश के डॉक्टर गुस्से में हैं। इस घटना से नरजा फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने 13 अगस्त को देशभर में ओपीडी और वैकल्पिक सेवाएं बंद (Doctor Strike) करने का ऐलान किया है। जिससे देशभर के सरकारी अस्पतालों में हालात और बद्तर हो सकते हैं और मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

दरअसल, कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ रेप-मर्डर के बाद डॉक्टर, शिक्षक और मेडिकल छात्र आरोपी के खिलाफ एक्शन की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस मामले में पश्चिम बंगाल के डॉक्टर्स ने विरोध प्रदर्शन शुरू करते हुए काम बंद करने का ऐलान किया था, लेकिन धीरे-धीरे अब डॉक्टरों का यह विरोध पूरे देश में फैल गया है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने 13 अगस्त यानी आज से देशव्यापी विरोध के साथ ओपीडी और वैकल्पिक सेवाओं को बंद (Doctor Strike) करने का आह्वान किया है।

इस मामले में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा (JP Nadda) को चिट्ठी लिखकर कहा है कि पश्चिम बंगाल सरकार से उनकी तीन मांगे हैं। जिसमें पहली मांग- मामले की निष्पक्ष गहन जांच कर दोषियों को सजा दिलायी जाये। दूसरी मांग- किन वजहों से अपराध को अंजाम दिया गया, उसकी विस्तृत जांच की जाए। तीसरी मांग- कार्यस्थल पर डॉक्टरों विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा में सुधार के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।

दिल्ली एम्स के डॉक्टरों की मांगे

पहली मांग- मामले को बिना देरी किए तुरंत सीबीआई के हवाले किया जाए।

दूसरी मांग- प्रिंसिपल के साथ-साथ मेडिकल स्टाफ और अल्पताल के सिक्योरिटी इंचार्ज का तुरंत इस्तीफा लिया जाए।

तीसरी मांग- केंद्र सरकार से लिखित में यह आश्वसन मिले कि डॉक्टरों के लिए सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाएगा।

चौथी मांग- मृतक डॉक्टर के नाम पर किसी मेडिकल कॉलेज की बिल्डिंग या लाइब्रेरी का नाम किया जाए।

पांच मांग- डॉक्टर के परिवार को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।

छह मांग- शारीरिक हमले के खिलाफ पुलिस सख्त कार्रवाई करे।

लापरवाही में डायल 112 के आरक्षी अवधेश कुमार को एसपी ने भेजा लाइन

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फर्रुखाबाद। जिले के पुलिस अधीक्षक द्वारा मुख्य आरक्षी 251 न. 11090, अवकाश कुमार के खिलाफ गंभीर अनियमितताओं के कारण निलंबन आदेश जारी किया गया है। यह निर्णय तब लिया गया जब यूपी-112 की एक टीम ने 11 अगस्त 2024 को मुख्य आरक्षी को उनकी ड्यूटी के दौरान संदिग्ध गतिविधियों में शामिल पाया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, टीम ने अवधेश कुमार को बिना उचित अनुमति के अपने निजी कार्यों में लिप्त पाया। उनकी इस हरकत को देखते हुए उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है। पुलिस अधीक्षक ने तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित कर दिया है और आदेश दिया है कि निलंबन अवधि के दौरान अवकाश कुमार अपने मुख्यालय पुलिस लाईन, फर्रुखाबाद में उपस्थित रहेंगे। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मुख्य आरक्षी अवधेश कुमार को निलंबन की अवधि के दौरान किसी प्रकार के कार्य में संलग्न नहीं होने दिया जाएगा। साथ ही, उन्हें अपने निलंबन के दौरान जिला मुख्यालय को छोडऩे की अनुमति नहीं होगी।