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Monday, April 20, 2026
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तेज धूप से बढ़ी गर्मी, तिलमिलाने लगे लोग — आने वाले समय में और गंभीर हो सकती है स्थिति

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फर्रुखाबाद। जिले में लगातार बढ़ती गर्मी ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया है। सुबह से ही तेज धूप और चिलचिलाती गर्म हवाओं के चलते लोग घरों से निकलने में कतराने लगे हैं। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा सा पसरा दिखाई देता है, वहीं बाजारों में भी अपेक्षाकृत कम भीड़ देखने को मिल रही है।

तापमान में हो रही लगातार बढ़ोतरी के कारण लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर मजदूर वर्ग, रिक्शा चालक और खुले में काम करने वाले लोगों की स्थिति काफी दयनीय हो गई है। तेज धूप के कारण शरीर में पानी की कमी, चक्कर आना और थकावट जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। अस्पतालों में भी हीट से संबंधित मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तापमान में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है। जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण को भी इस स्थिति का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। पेड़ों की कटाई और शहरीकरण के कारण तापमान में असामान्य वृद्धि हो रही है, जिससे गर्मी का असर और अधिक तीव्र होता जा रहा है।

प्रशासन द्वारा लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर न निकलने, पर्याप्त पानी पीने और धूप से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी जा रही है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने भी सतर्कता बरतने और लू से बचाव के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अभी से यह हाल है तो मई-जून में स्थिति और भयावह हो सकती है। ऐसे में जरूरत है कि सरकार और प्रशासन ठोस कदम उठाए, साथ ही लोग भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जागरूक होकर पेड़-पौधे लगाएं, ताकि भविष्य में इस बढ़ती गर्मी की समस्या पर नियंत्रण पाया जा सके।

उन्नीस को भगवान परशुराम जयंती की रहेगी धूम , विशेष रहेगी संतों की उपस्थिति

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कार्यक्रमों को सफल बनाने में जुटा समाज

फर्रुखाबाद। भगवान परशुराम जयंती की रविवार को नगर में में धूम रहेगी। ब्राह्मण समाज सेवा समिति का कार्यक्रम सुबह ब्राह्मण समाज धर्मशाला में रखा गया है वहीं दूसरी ओर ब्राह्मण समाज जन सेवा समिति के बैनर तले साधु संतों के संरक्षण में बद्री विशाल डिग्री कॉलेज में सुबह से ही कार्यक्रम होगा।

आगामी 19 अप्रैल को मनाई जाने वाली भगवान परशुराम जयंती को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। ब्राह्मण समाज सेवा समिति की शोभा यात्रा संयोजक एवं अन्य जिम्मेदार घर-घर जाकर यात्रा को सफल बनाने के लिए ब्रह्म समाज के लोगों को आमंत्रित कर रहे हैं।सौरभ मिश्रा को यात्रा का संयोजक बनाया गया है।

ब्राह्मण समाज सेवा समिति के अध्यक्ष रमेश चंद्र त्रिपाठी, महामंत्री लाला राम दुबे व समाज के कई गणमान्य लोग एवं पदाधिकारी उपस्थित रह कर भगवान परशुराम शोभायात्रा के सफल बनाने के लिए जुटे हैं। ब्राह्मण समाजसेवा समिति के जिला अध्यक्ष रमेश चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि ब्राह्मण धर्मशाला में सुबह 9:00 बजे हवन यज्ञ व विचार रह गोष्ठी होगी जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्तर के विद्वान डा शिव ओम अंबर भागीदारी करेंगे।

यात्रा संयोजक सौरभ मिश्रा ने बताया कि शोभायात्रा अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर शाम 5 बजे पंडा बाग मंदिर से प्रारंभ होकर ब्राह्मण समाज धर्मशाला तक निकाली जाएगी।इसके लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही है। उन्होंने ब्राह्मण समाज के सभी लोगों से यात्रा में भागीदारी करने की अपील की है।

वहीं दूसरी ओर ब्राह्मण जन सेवा समिति के तत्वावधान में 19 अप्रैल को ही बद्री विशाल डिग्री कॉलेज में हवन , पूजन, विचार गोष्ठी भंडारा इत्यादि होगा जिसमें संत समाज की मौजूदगी रहेगी इसके लिए संस्था के संस्थापक नारायण दत्त द्विवेदी महिला अध्यक्ष प्रीति पवन तिवारी व अन्य पदाधिकारी तैयारी में जुटे हुए हैं।

नारायण दत्त द्विवेदी ने बताया कि सुबह 10:00 बजे से हवन पूजन होगा विचार गोष्ठी होगी और दोपहर 1:00 बजे भंडारा व प्रसाद वितरण होगा ।इस दौरान ईश्वर दास ब्रह्मचारी महाराज ,ओमकार दास ब्रह्मचारी महाराज कमल लोचन महाराज आदि पूजा अर्चना कराएंगे। समिति की महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष प्रीति पवन तिवारी ने सभी से भागीदारी करने की अपील की है।

संपूर्ण समाधान दिवस में गूंजी जन समस्याओं की आवाज, 45 प्रार्थना पत्रों में 2 का मौके पर निस्तारण

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अमृतपुर/फर्रुखाबाद

तहसील परिसर में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर आम जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुना गया। कार्यक्रम में अपर जिलाधिकारी अरुण कुमार सिंह, एसडीएम संजय सिंह, तहसीलदार शशांक सिंह, क्षेत्राधिकारी अमरपाल सिंह, सीएचसी प्रभारी प्रमित राजपूत एवं खंड विकास अधिकारी सुनील कुमार जायसवाल मौजूद रहे। अधिकारियों ने फरियादियों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने के निर्देश संबंधित विभागों को दिए।
इस दौरान ग्राम नगला हूसा निवासी उदयवीर पुत्र जैतून ने प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उनके खेत से जबरन रास्ता निकाल दिया गया है, जिससे उन्हें भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। वहीं अमृतपुर निवासी अमित पुत्र अवधेश ने आरोप लगाया कि खाद के गड्ढों के संबंध में लेखपाल द्वारा गलत आख्या प्रस्तुत की गई है। इसके अलावा हमीरपुर निवासी सोनी पत्नी अजय पाल ने ग्राम समाज की जमीन पर दबंगों द्वारा अवैध कब्जा किए जाने की शिकायत दर्ज कराई और कार्रवाई की मांग की।
संपूर्ण समाधान दिवस में कुल 45 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें राजस्व विभाग से 18, पुलिस विभाग से 8, विकास विभाग से 6, विद्युत विभाग से 3, खाद्य एवं रसद विभाग से 4 तथा अन्य विभागों से 6 प्रार्थना पत्र शामिल रहे। इनमें से 2 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया, जबकि शेष प्रार्थना पत्रों को संबंधित विभागों को जांच एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु सौंप दिया गया।
अधिकारियों ने सभी मामलों को गंभीरता से लेते हुए समयबद्ध और निष्पक्ष निस्तारण का भरोसा दिलाया। साथ ही स्पष्ट किया कि लापरवाही बरतने वाले कर्मियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे, जिससे जनसुनवाई का माहौल सक्रिय और प्रभावी नजर आया।

गंगा एक्सप्रेसवे: रफ्तार का राजमार्ग या विकास की नई धुरी?

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उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदलने का दावा अब केवल राजनीतिक भाषणों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह धरातल पर आकार लेता दिख रहा है। 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे इसी बदलाव का सबसे बड़ा प्रतीक बनकर उभर रहा है। मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह राजमार्ग केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि प्रदेश के आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक ताने-बाने को नई दिशा देने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति का संकेत है।

यह पहली बार है जब पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल के बीच इतनी सीधी, तेज और आधुनिक कनेक्टिविटी स्थापित होने जा रही है। 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाली यह सड़क न केवल दूरी को कम करेगी, बल्कि समय और लागत दोनों की बचत करेगी। ऐसे में सवाल यह नहीं है कि यह एक्सप्रेसवे कितना लंबा है, बल्कि यह है कि इसका प्रभाव कितना व्यापक होगा।

गंगा एक्सप्रेसवे 12 जिलों को जोड़ते हुए एक ऐसे आर्थिक गलियारे का निर्माण करेगा, जहां कृषि, उद्योग और व्यापार एक साथ गति पकड़ेंगे। मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर जैसे पश्चिमी जिलों की औद्योगिक ताकत अब सीधे हरदोई, रायबरेली और प्रयागराज जैसे क्षेत्रों से जुड़ेगी। इससे न केवल माल परिवहन तेज होगा, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में भी निवेश के दरवाजे खुलेंगे।

सरकार की योजना केवल सड़क बनाने तक सीमित नहीं है। इस एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों पर औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने की बात इस बात का संकेत है कि यह परियोजना दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति का हिस्सा है। अगर यह योजना सही तरीके से लागू होती है, तो उत्तर प्रदेश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और प्रदेश निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बन सकता है।

हालांकि, हर बड़े विकास कार्य के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी होती हैं। भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय प्रभाव और स्थानीय लोगों के विस्थापन जैसे मुद्दे हमेशा चर्चा में रहते हैं। यह जरूरी है कि विकास की इस दौड़ में संतुलन बना रहे और प्रभावित लोगों के हितों की अनदेखी न हो। पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ इन मुद्दों का समाधान ही इस परियोजना की सफलता को सुनिश्चित करेगा।

सुरक्षा के लिहाज से भी गंगा एक्सप्रेसवे कई मायनों में खास है। रंबल स्ट्रिप्स, एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम और इमरजेंसी एयरस्ट्रिप जैसी सुविधाएं इसे आधुनिक बनाती हैं। यह दिखाता है कि अब इंफ्रास्ट्रक्चर केवल निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि तकनीक और सुरक्षा के समन्वय का उदाहरण बन रहा है।

राजनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो यह परियोजना सरकार की प्राथमिकताओं को भी स्पष्ट करती है। बुनियादी ढांचे पर जोर देकर प्रदेश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना एक दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। यदि गंगा एक्सप्रेसवे अपने अपेक्षित परिणाम देता है, तो यह मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।

भविष्य में हरिद्वार से लेकर बिहार तक कनेक्टिविटी बढ़ाने की योजना इस एक्सप्रेसवे को और भी महत्वपूर्ण बना देती है। यह केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्तर भारत के एक बड़े हिस्से को जोड़ने वाला लाइफलाइन कॉरिडोर बन सकता है।

अंततः, गंगा एक्सप्रेसवे केवल कंक्रीट और डामर की सड़क नहीं है, बल्कि यह उम्मीदों का राजमार्ग है। यह इस बात का संकेत है कि यदि योजनाएं दूरदृष्टि के साथ बनाई जाएं और उन्हें ईमानदारी से लागू किया जाए, तो विकास केवल एक नारा नहीं, बल्कि वास्तविकता बन सकता है।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि यह एक्सप्रेसवे अपने वादों पर कितना खरा उतरता है। क्योंकि इतिहास गवाह है—सड़कें केवल मंजिल तक नहीं पहुंचातीं, वे भविष्य की दिशा भी तय करती हैं।

झूठा निकला लूट का मामला, सर्राफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज

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फर्रुखाबाद। जनपद में एक सर्राफा व्यापारी द्वारा दर्ज कराई गई लूट की घटना पुलिस जांच में पूरी तरह से झूठी साबित हुई है। मामले की गहन जांच के बाद पुलिस ने आरोपी सर्राफ के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। इस खुलासे से क्षेत्र में सनसनी फैल गई है और पुलिस की सतर्कता की भी चर्चा हो रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शहर के महादेव प्रसाद स्ट्रीट, पुरानी बड़ी सब्जी मंडी के पास रहने वाले सर्राफा व्यवसायी श्याम जी वर्मा ने कुछ दिन पूर्व पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि जब उनका भाई चिलसरा रोड स्थित दुकान से नगर की ओर लौट रहा था, तभी एक स्विफ्ट डिजायर कार में सवार बदमाशों ने उसे रोक लिया और करीब 20 ग्राम सोना लूटकर फरार हो गए।
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की। पुलिस ने कार के नंबर के आधार पर ई-चालान प्रणाली से वाहन स्वामी की जानकारी जुटाई, जिसमें वाहन ग्वालियर निवासी पूनम सोनी पत्नी दिलीप सोनी के नाम पंजीकृत पाया गया।
पुलिस द्वारा संपर्क किए जाने पर दिलीप सोनी ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि श्याम जी वर्मा उनका साला है और दोनों के बीच व्यापारिक विवाद चल रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि श्याम जी वर्मा ने पहले से ही उनकी पत्नी के नाम से उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा रखा है। घटना वाले दिन वह अपने बेटे कृष्णा और भाई के साथ ग्वालियर से फर्रुखाबाद कोर्ट में तारीख पर आया था। इसके बाद वह रिश्तेदारी में अमलिया आशानंद गया और वहां से चिलसरा रोड होते हुए वापस लौट रहा था।
दिलीप सोनी के अनुसार, रास्ते में श्याम जी वर्मा ने उसे देख लिया और पूर्व रंजिश के चलते एक सोची-समझी साजिश के तहत स्कूटी से उसका पीछा करते हुए झूठा लूट का आरोप लगा दिया।
मामले की जांच कर रहे उपनिरीक्षक वीरेंद्र कुमार ने सभी तथ्यों और बयानों की पुष्टि की। जांच में दिलीप सोनी के आरोप सही पाए गए और लूट की घटना पूरी तरह मनगढ़ंत निकली।
इसके बाद उपनिरीक्षक की तहरीर पर पुलिस ने श्याम जी वर्मा के खिलाफ झूठी सूचना देने और साजिश रचने के आरोप में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून को गुमराह करने और झूठी घटनाएं गढ़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस हर पहलू की बारीकी से जांच कर सच को सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

विपक्ष ने बहुत बड़ी गलती की, अब सजा सजा भुगतेंगे : नरेंद्र मोदी

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नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े बहुप्रतीक्षित महिला आरक्षण विधेयक पर शुक्रवार को हुई मतदान प्रक्रिया में सरकार को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका, जिसके चलते यह विधेयक पारित नहीं हो पाया। इस घटनाक्रम के बाद देश की राजनीति में घमासान तेज हो गया है और सत्ता पक्ष लगातार विपक्ष पर हमलावर है। शनिवार को आयोजित केंद्रीय कैबिनेट बैठक में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए विपक्षी दलों की तीखी आलोचना की।
कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं को वर्ष 2029 से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले इस महत्वपूर्ण विधेयक को गिराकर विपक्ष ने “बहुत बड़ी गलती” की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश की महिलाएं इस फैसले को कभी माफ नहीं करेंगी और विपक्ष को इसका राजनीतिक परिणाम भुगतना पड़ेगा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि यह संदेश देश के हर गांव और हर नागरिक तक पहुंचाया जाना चाहिए कि किस प्रकार महिलाओं के अधिकारों को बाधित किया गया।
दरअसल, संविधान संशोधन के तहत लाए गए इस विधेयक का उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना था, लेकिन मतदान के दौरान इसे आवश्यक समर्थन नहीं मिल पाया। लंबी और तीखी बहस के बाद विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसका विरोध किया, जिससे यह पारित नहीं हो सका।
इससे एक दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सदन में भावुक अपील करते हुए सभी सांसदों से “अंतरात्मा की आवाज” सुनने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि देश की करोड़ों महिलाओं की नजर इस फैसले पर है और कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाया जाना चाहिए जिससे नारी शक्ति की भावनाएं आहत हों।
विधेयक के पारित न होने के बाद अब सियासी बयानबाजी और तेज हो गई है। सत्ता पक्ष जहां इसे महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ कदम बता रहा है, वहीं विपक्ष सरकार के प्रस्ताव और रणनीति पर सवाल उठा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा देश की राजनीति के केंद्र में बना रहने की संभावना है।