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Sunday, April 19, 2026
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भ्रष्टाचार मामले में बड़ी कार्रवाई, नगर निगम के 4 अधिकारी निलंबित, आयुक्त बोले – विभागीय और विधिक जांच भी होगी

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रायपुर: छत्तीसगढ़ के रायपुर में नगर निगम (Municipal Corporation) में 100 करोड़ से ज्यादा के भ्रष्टाचार मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए आयुक्त ने चार अधिकारियों को निलंबित (suspended) कर दिया है। नगर निगम आयुक्त विश्वदीप ने बताया कि चार सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर जोन क्रमांक 10 के तत्कालीन जोन कमिश्नर विवेकानंद दुबे, कार्यपालन अभियंता आशीष शुक्ला, इंजीनियर योगेश यादव और अजय श्रीवास्तव के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है। मामले में विभागीय जांच भी की जाएगी। साथ ही विधिक कार्रवाई के साथ-साथ वेतन वृद्धि में भी रोक लगाई जाएगी।

बताया जा रहा है कि यह मामला करीब 150 से 159 एकड़ अवैध जमीन को गलत तरीके से वैध बनाने की साजिश से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आया है कि पूरी प्रक्रिया में नगर निगम मुख्यालय को बायपास किया गया और संरचना अनुमोदन व TMC अप्रूवल में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं।

इस मामले की जांच के लिए गठित चार सदस्यीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिसके आधार पर निलंबन की कार्रवाई की गई। जांच समिति में पंकज शर्मा (अपर आयुक्त, नगर निवेश) को अध्यक्ष बनाया गया था, जबकि आभाष मिश्रा, आशुतोष सिंह और सोहन गुप्ता सदस्य के रूप में शामिल थे। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि जांच के दौरान कई बार मूल नस्ती (दस्तावेज) मांगे जाने के बावजूद उपलब्ध नहीं कराए गए। साथ ही टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई गई है।

बता दें कि लल्लूराम डॉट कॉम ने 16 अप्रैल को इस खबर को प्रकाशित किया था, जिसमें TNC (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) और मार्ग संरचना अप्रूवल के नाम पर नियम-कानूनों को दरकिनार कर फाइलें पास करने और बाद में मूल दस्तावेजों के गायब होने के आरोप लगे हैं। मामले में प्रक्रिया को बायपास करने, 70 से अधिक खसरा नंबरों की फाइलें गायब होने और अधिकारियों-बिल्डरों की मिलीभगत जैसे गंभीर सवाल उठे हैं।

नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने इस घोटाले को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि यह 100 करोड़ से अधिक का घोटाला है। दलाल, बिल्डरों और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से खेल खेला गया है। नियम-कानून और प्रक्रिया को तिलांजलि दे दी गई है। मामले की जानकारी होते ही मूल नस्ती गायब कर दी गई। अवैध कॉलोनियों को अवैध तरीके से वैध करने का एक बड़ा षड्यंत्र है।

यह पूरा मामला कामरेड सुधीर मुखर्जी वार्ड क्रमांक 54 अंतर्गत आरडीए कॉलोनी से लगे बोरियाखुर्द, ओम नगर, साई नगर और बिलाल नगर क्षेत्र के भूखंडों से जुड़ा है। इनमें भूखंड क्रमांक 81, 82, 86 से लेकर 450 तक कुल 70 से अधिक खसरा नंबर, All of Part शामिल हैं।

नियम के अनुसार अप्रूवल की प्रक्रिया इस प्रकार है—

जोन से फाइल निगम मुख्यालय आती है।
निगम कमिश्नर अप्रूवल देते हैं।
फिर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNC) विभाग भेजी जाती है।
TNC से वापस कमिश्नर के पास आती है और अंतिम अप्रूवल के बाद जोन को भेजी जाती है।

लेकिन इस मामले में जोन क्रमांक 10 से फाइल सीधे TNC विभाग पहुंचा दी गई। निगम कमिश्नर को पूरी तरह बायपास कर दिया गया। जब TNC से फाइल कमिश्नर के पास आई, तो उन्होंने हैरानी जताई कि यह फाइल तो उन्होंने अप्रूव ही नहीं की थी। इसके बाद जोन क्रमांक 10 से मूल नस्ती मंगवाई गई, तो पता चला कि मूल फाइल गायब हो चुकी है। जोन आयुक्त, जोन-10 ने नस्ती गुम होने का आधिकारिक पत्र भी लिखा है।

 

दिल्ली में आतंकी साजिश रच रहे 4 युवक गिरफ्तार, IED बनाने का सामान बरामद

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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल (Delhi Police Special Cell) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए देश में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश रच रहे चार युवकों को गिरफ्तार (arrested) किया है। पुलिस के मुताबिक, ये आरोपी विभिन्न राज्यों में सक्रिय थे और देश में किसी बड़ी वारदात की तैयारी कर रहे थे। जानकारी के अनुसार, इन चारों आरोपियों को महाराष्ट्र, ओडिशा और बिहार से अलग-अलग जगहों से दबोचा गया है।

शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये युवक एक संगठित तरीके से काम कर रहे थे और इनके पास से IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाने से जुड़ा सामान भी बरामद किया गया है। इसके अलावा, पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं, जिनकी फॉरेंसिक और तकनीकी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इनके संपर्क किस-किस नेटवर्क से थे और क्या इनके पीछे कोई बड़ा मॉड्यूल सक्रिय था।

पुलिस की ओर से जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक आरोपियों पर यह भी आरोप है कि वे कथित रूप से कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित थे और कुछ आपत्तिजनक एवं भड़काऊ विचारों का प्रसार कर रहे थे। दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के अनुसार, जांच में यह बात सामने आई है कि ये युवक एक विशेष विचारधारा से जुड़े कंटेंट और ऑनलाइन नेटवर्क के संपर्क में थे, जिसके जरिए कथित रूप से नफरत फैलाने और लोगों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इनके संपर्क किन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और किन व्यक्तियों तक फैले हुए थे।

जांच एजेंसियों की ओर से सामने आ रही जानकारी के मुताबिक मामला अब ऑनलाइन नेटवर्क और कथित साजिश के पहलुओं तक भी पहुंच गया है। दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की जांच में यह दावा किया गया है कि आरोपी सोशल मीडिया के कुछ बंद (क्लोज्ड) ग्रुप्स में सक्रिय थे, जहां कथित रूप से कट्टरपंथी विचारधारा, भड़काऊ सामग्री और हथियारों से जुड़ी चर्चाएं की जा रही थीं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इन ग्रुप्स में नए लोगों को जोड़ने और उन्हें प्रभावित करने की कोशिशें की जा रही थीं या नहीं। इसी के साथ जांच में यह भी सामने आया है कि दो आरोपियों पर एक IED तैयार करने की योजना बनाने का संदेह है। हालांकि, पुलिस इस पहलू की विस्तृत फॉरेंसिक जांच कर रही है और अभी सभी तथ्यों की पुष्टि प्रक्रिया में है।

जांच से जुड़ी इस नई जानकारी को लेकर दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने दावा किया है कि मामला केवल ऑनलाइन नेटवर्क तक सीमित नहीं था, बल्कि कुछ संदिग्ध गतिविधियाँ फिजिकल रेकॉनिसेंस (रेकी) से भी जुड़ी हो सकती हैं। पुलिस के मुताबिक, आरोप है कि एक आरोपी ने दिसंबर 2025 के दौरान दिल्ली में आकर लाल किला और इंडिया गेट जैसी संवेदनशील जगहों की रेकी की थी। इसके साथ ही यह भी जांच में सामने आया है कि उसने सोशल मीडिया पर लाल किले की तस्वीर के साथ कथित रूप से आपत्तिजनक और भड़काऊ पोस्ट साझा की थी।

जांच एजेंसियों का यह भी कहना है कि समूह के कुछ सदस्य ऑनलाइन माध्यमों से फंड जुटाने की कोशिश कर रहे थे, जिसे क्राउड फंडिंग के जरिए इकट्ठा करने का प्रयास बताया जा रहा है। वहीं, एक अन्य आरोपी पर लोगों को हथियारों की ट्रेनिंग दिलाने और इसके लिए संपर्क बढ़ाने का दावा किया गया है।

दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के मुताबिक, गिरफ्तार चारों युवकों का संबंध साधारण परिवारों से बताया जा रहा है और उनकी शैक्षणिक योग्यता ज्यादातर 10वीं तक की रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि इनमें से कोई मैकेनिक, कोई सिक्योरिटी गार्ड और कोई प्लंबर के रूप में काम करता था। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिला है कि ये सभी सोशल मीडिया कंटेंट और कथित कट्टरपंथी विचारों के प्रभाव में आकर कुछ संदिग्ध गतिविधियों की ओर आकर्षित हुए हो सकते हैं। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे मामले की गहन जांच अभी जारी है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

कानूनी कार्रवाई के तहत स्पेशल सेल ने इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। इसके साथ ही उनके डिजिटल डिवाइस, बैंकिंग लेनदेन और संपर्क नेटवर्क की फॉरेंसिक जांच भी की जा रही है, ताकि पूरे मॉड्यूल और संभावित सहयोगियों की भूमिका स्पष्ट हो सके।

 

भारतीय लोकतंत्र और महिला आरक्षण की अधूरी यात्रा

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(विवेक रंजन श्रीवास्तव-विनायक फीचर्स)

भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताक़त उसकी विविधता और समावेशिता है लेकिन जब लोकसभा में ही महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का संविधान संशोधन वर्षों तक पारित नहीं हो सका, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या हमारा लोकतंत्र वास्तव में आधी आबादी को बराबरी का अवसर देने की इच्छा रखता है।

महिला आरक्षण विधेयक केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं था, बल्कि यह भारतीय राजनीति में समानता और न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम होता। लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% सीटें मिलतीं तो उनकी आवाज़ अधिक मज़बूती से गूँजती। शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर नीतियाँ अधिक संवेदनशील और व्यावहारिक बनतीं।

आज भी संसद में महिलाओं की संख्या 15% से कम है। यह आँकड़ा बताता है कि लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी कितनी सीमित है। आरक्षण से यह अंतर मिटाने का अवसर मिलता। विधेयक पारित न हो पाने के पीछे कई कारण रहे जिनमें राजनीतिक असहमति प्रमुख है। कुछ दलों ने जनगणना आधारित सीटों के पुनर्वितरण (परिसीमन) पर आपत्ति जताई। सपा जैसे कुछ दलों को आशंका थी कि आरक्षण से उनके पारंपरिक वोट बैंक प्रभावित होंगे, इसलिए वे विरोध में रहे। ऐसे कई कारणों ने मिलकर एक ऐतिहासिक अवसर का गर्भपात कर दिया।

2023 में लंबे संघर्ष और बड़ी बहस के बाद संसद ने आखिरकार महिला आरक्षण विधेयक पारित कर दिया था। इसमें यह प्रावधान है कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% सीटें मिलेंगी, लेकिन यह आरक्षण परिसीमन (delimitation) और जनगणना के बाद ही लागू होगा। इस शर्त ने इसे एक अधूरी जीत बना दिया है, क्योंकि वास्तविक प्रभाव तब तक नहीं दिखेगा जब तक नई जनगणना और सीटों का पुनर्वितरण पूरा नहीं होता।

2024 के आम चुनावों में महिला उम्मीदवारों की संख्या बढ़ी, लेकिन प्रतिनिधित्व अब भी सीमित रहा। महिला संगठनों ने 2023 के विधेयक को “ऐतिहासिक लेकिन अधूरा” कहा। कई राजनीतिक दलों ने इसे समर्थन दिया, पर साथ ही यह मांग भी उठी कि इसे शीघ्र लागू किया जाए ताकि केवल कागज़ी प्रावधान न रह जाए।

पहले महिला आरक्षण विधेयक का अधूरा रहना और फिर विलंबित रूप से पारित होना कई स्तरों पर असर डालता है। महिला नेतृत्व का अवसर फिलहाल टल गया लगता है। महिला संगठनों और नागरिक समाज में गहरी निराशा है। राजनीतिक दलों पर इसे शीघ्र लागू करने का दबाव बढ़ेगा।

लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक का अधूरा रहना केवल एक विधायी पराजय नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की अधूरी प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसमें राजनीति व्यापक राष्ट्रहित से बड़ी सिद्ध हुई। जब तक संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या पर्याप्त नहीं होगी, तब तक नीतियाँ समाज के हर वर्ग का प्रतिनिधित्व नहीं कर पाएँगी। भारत की आधी आबादी को बराबरी का अधिकार देना केवल संवैधानिक दायित्व नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। वर्तमान परिस्थितियां हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या हमारी राजनीति वास्तव में समावेशी है।

महिला आरक्षण विधेयक का अधूरा रहना लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए एक चुनौती है। यह आवश्यक है कि सभी राजनीतिक दल अपने मतभेदों को पीछे छोड़कर इस मुद्दे पर सहमति बनाएँ। महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33% प्रतिनिधित्व देना भारतीय लोकतंत्र को अधिक सशक्त, न्यायपूर्ण और संतुलित बनाएगा और आज नहीं तो कल यह होकर रहेगा, क्योंकि यही जन आकांक्षा है। (विनायक फीचर्स)

प्रधानमंत्री मोदी आज रात 8:30 बजे देश को करेंगे संबोधित

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) राष्ट्र के नाम संबोधन आज रात 8:30 बजे करने वाले हैं। माना जा रहा है कि वो महिला आरक्षण (women’s reservation) पर बोल सकते हैं। दरअसल, शुक्रवार को महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा विधेयक कल लोकसभा में बहुमत के लिए जरुरी आंकड़ा पार न कर पाने की वजह से पारित नहीं हो पाया था।

बता दें कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष से बार बार विधेयकों को समर्थन देने की अपील की थी बावजूद इसके विधेयक को विपक्ष का समर्थन नहीं मिला जिससे सदन में बिल गिर गया। इसी मुद्दे पर प्रधानमंत्री देश को संबोधित कर सकते हैं। हालांकि, अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

आज संसद भवन में आयोजित सुरक्षा मामलों की संसदीय समिति (CCS) की बैठक के दौरान भी प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण विधेयक के पारित न होने पर नाराजगी जताई है। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “विपक्षी पार्टियों को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। हमें देश के हर गांव तक यह बात पहुंचानी होगी कि विपक्ष की मानसिकता महिला विरोधी है। वे पहले से ही इसे छिपाने के बहाने ढूंढ रहे हैं। विधेयक का समर्थन न करने के लिए जीवन भर पछतावा होगा।”

सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े 3 विधेयक लेकर आई थी। इनमें से एक संविधान संशोधन विधेयक था, जिस पर कल मतदान हुआ। विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 सांसदों ने वोट किया। विधेयक को पारित होने के लिए जरूरी सदन में मौजूद कुल सदस्यों के दो तिहाई वोट नहीं मिले। इसके बाद सरकार ने बाकी दोनों विधेयकों को वापस ले लिया। 12 साल में पहली बार सरकार किसी विधेयक को पारित नहीं करा पाई है।

 

सबरीमाला केस में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, कहा- ‘धर्म’ की दुहाई देकर नहीं बच सकते

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नई दिल्ली: सबरीमाला केस (Sabarimala case) पर सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार को कहा कि आस्था से जुड़े मामलों का फैसला करते समय, संविधान को व्यक्तिगत धार्मिक मान्यताओं से ऊपर रखना चाहिए। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में मन की स्वतंत्रता और संवैधानिक ढांचे द्वारा निर्देशित होना जरूरी है। दरअसल, अदालत में चल रही यह बहस के दौरान मुद्दा उठा कि क्या धर्म के मामलों में न्यायपालिका का दखल जायज है ? इसपर पीठ ने संकेत दिया कि जब मुद्दा संवैधानिक अधिकारों का हो, तो केवल ‘धर्म’ की दुहाई देकर उसे न्यायिक समीक्षा से बाहर नहीं रखा जा सकता।

वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने तर्क दिया था कि अंतरात्मा का अधिकार बहुत व्यापक है और यह किसी भी व्यवस्था या धर्म पर सम्मानपूर्वक सवाल उठाने की स्वतंत्रता देता है। बेंच अब इस संदर्भ में धर्म, अंतरात्मा और अनुच्छेद 25 व 26 के परस्पर संबंधों की व्याख्या कर रही है। इससे पहले 9 जजों की बेंच ने 15 अप्रैल की सुनवाई में कहा था कि करोड़ों लोगों की आस्था को गलत ठहराना सबसे मुश्किल कामों में से एक है। साथ ही यह भी कहा कि सामाजिक सुधार के नाम पर धर्म को खोखला नहीं किया जा सकता।

केरल हाईकोर्ट ने 1991 में सबरीमाला में मासिक धर्म वाली महिलाओं (10-50 साल) की एंट्री पर रोक लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में बैन हटा दिया। फैसले के खिलाफ कई पुनर्विचार याचिकाएं लगाई गईं, जिसपर अब सुनवाई हो रही है। मंदिर प्रशासन महिलाओं की एंट्री का विरोध कर रहा है।

सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई है। पहले 3 दिन, 9 अप्रैल तक सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

 

20 हजार की रिश्वत लेते हुए पकड़े गए दरोगा जी, मामले से नाम हटाने के लिए मांगे थे 1 लाख रुपये

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आजमगढ़: यूपी के आजमगढ़ में एंटी करप्‍शन टीम (Anti-Corruption Team) ने सरैमीर पुलिस स्टेशन में तैनात सब-इंस्पेक्टर (sub inspector) को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। उसके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपी अधिकारी की पहचान सब-इंस्पेक्टर अभिषेक सिंह के रूप में हुई है। वह तीन व्यक्तियों – आदित्य राय उर्फ ​​अवनीश राय, अशरफ और मोहम्मद शादाब – से जुड़े एक मामले की जांच कर रहा था, जिन पर हुक्का बार चलाने का आरोप था। तीनों फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।

अधिकारियों के अनुसार, अभिषेक सिंह ने अवनीश राय का नाम मामले से हटाने के लिए 1 लाख रुपये की मांग की थी। बातचीत के बाद 20,000 रुपये अग्रिम भुगतान के रूप में देने पर सहमति बनी। इसके बाद अवनीश राय ने भ्रष्टाचार विरोधी टीम में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए, टीम ने पुलिस स्टेशन के गेट के पास जाल बिछाया। जैसे ही शिकायतकर्ता ने रासायनिक रूप से उपचारित नकदी सब-इंस्पेक्टर को सौंपी, टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।

चंदौली जिले के धनपुर क्षेत्र के पापराउला गांव निवासी अभिषेक सिंह को तुरंत हिरासत में ले लिया गया। यह मामला 29 मार्च को सरैमीर के खारेवा मोड़ के पास एक रेस्तरां पर की गई छापेमारी से संबंधित है, जहां पुलिस को कथित तौर पर हुक्का बार के संचालन के सबूत मिले। छापेमारी के दौरान सिगरेट, तंबाकू, हुक्का, कागज और चिलम जैसी वस्तुएं जब्त की गईं और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिन्हें बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया।

जिला मजिस्ट्रेट से अनुमति प्राप्त करने के बाद यह जाल बिछाकर कार्रवाई की गई। दो सरकारी अधिकारियों – लोक निर्माण विभाग के सर्वेश यादव और समेकन विभाग के प्रदीप दुबे – को स्वतंत्र गवाह नियुक्त किया गया था। आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।