उपभोक्ताओं की सहमति के बिना मीटर न लगाने की मांग
प्रीपेड मीटर समस्याओं के समाधान के लिए अलग काउंटर बनाने पर जोर
फर्रुखाबाद। नगर में स्मार्ट और प्रीपेड बिजली मीटरों को जबरन लगाए जाने के विरोध में समाजवादी पार्टी (सपा) के कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। महानगर सपा अध्यक्ष राघव दत्त मिश्रा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपकर विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
ज्ञापन में सपा नेताओं ने कहा कि विद्युत उपभोक्ताओं की सहमति के बिना उनके घरों में प्रीपेड या स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, जो पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग द्वारा भविष्य में संभावित समस्याओं का डर दिखाकर जबरन मीटर लगाए जा रहे हैं, जिससे आम जनता में आक्रोश व्याप्त है।
सपा नेताओं ने उच्चतम न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि उपभोक्ताओं को यह अधिकार है कि वे अपनी इच्छा के अनुसार प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर का चयन करें। इसके बावजूद विभाग मनमानी पर उतारू है और जनपद में बड़े पैमाने पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि जिन उपभोक्ताओं के मीटर खराब हो गए हैं और उन्हें बदलवाया गया है, वहां प्रीपेड मीटर के बजाय पोस्टपेड मीटर लगाए जाएं। यदि प्रीपेड मीटर लगाया भी जाए तो वह उपभोक्ता की सहमति से ही हो। जबरदस्ती किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जाएगी।
सपा प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि यदि इस मुद्दे पर जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो पार्टी को आंदोलनात्मक कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
इसके साथ ही उन्होंने प्रीपेड मीटरों में आ रही तकनीकी गड़बड़ियों और उपभोक्ताओं को हो रही परेशानियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की कि विद्युत विभाग के उपकेंद्रों पर अलग से काउंटर स्थापित किए जाएं, जहां विशेष रूप से प्रीपेड मीटर से संबंधित शिकायतों का समाधान किया जा सके और इसके लिए अलग से कर्मचारियों की तैनाती की जाए।
ज्ञापन देने वालों में महानगर अध्यक्ष राघव दत्त मिश्रा के साथ कुलदीप भारद्वाज, ओम प्रकाश, अतुल वर्मा, अरविंद, पंकज गुप्ता, शशांक सक्सेना समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
जबरन प्रीपेड मीटर लगाए जाने के विरोध में सपा का प्रदर्शन, डीएम को सौंपा ज्ञापन
पुणे एयरपोर्ट पर भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट की हार्ड लैंडिंग, 8 घंटे बाधित रहा संचालन
पुणे इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शुक्रवार रात भारतीय वायुसेना के एक लड़ाकू विमान की हार्ड लैंडिंग होने से हड़कंप मच गया। यह घटना रात करीब 10:30 बजे हुई, जिसके बाद रनवे को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। इसके चलते एयरपोर्ट पर उड़ान संचालन लगभग 8 घंटे तक प्रभावित रहा और कई उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।
भारतीय वायुसेना (IAF) ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि विमान का क्रू पूरी तरह सुरक्षित है। एयरपोर्ट प्रशासन के अनुसार, रात में तुरंत रनवे की जांच और मरम्मत कार्य शुरू किया गया, जिसके बाद सुबह करीब 7:30 बजे उड़ान संचालन को फिर से शुरू किया जा सका। हालांकि दिन के दौरान भी सेवाएं पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाईं।
एयरपोर्ट डायरेक्टर के मुताबिक, इस घटना के कारण कुल 91 फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ीं, जिनमें इंडिगो की 65, एयर इंडिया की 6, स्पाइसजेट की 5, अकासा एयर की 5 और एयर इंडिया एक्सप्रेस की 10 उड़ानें शामिल थीं। अचानक हुई इस बाधा के कारण सैकड़ों यात्री एयरपोर्ट पर फंस गए और उन्हें भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, लैंडिंग के दौरान विमान के अंडरकैरिज (लैंडिंग गियर) में तकनीकी खराबी आ गई, जिससे विमान रनवे पर जोर से टकरा गया। हालांकि वायुसेना या एयरपोर्ट अथॉरिटी ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह कौन सा फाइटर जेट था।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की “हार्ड लैंडिंग” तब होती है जब विमान सामान्य से अधिक तेज या असंतुलित तरीके से रनवे पर उतरता है। इसके पीछे खराब मौसम, तकनीकी समस्या या पायलट की गणना में गड़बड़ी जैसी वजहें हो सकती हैं। गंभीर मामलों में इससे विमान और रनवे दोनों को नुकसान पहुंच सकता है।
एयरपोर्ट प्रशासन ने बताया कि रनवे की मरम्मत पूरी कर ली गई है और सुरक्षा जांच के बाद ही संचालन दोबारा शुरू किया गया। अधिकारियों ने कहा कि स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन कुछ उड़ानों का शेड्यूल अब भी प्रभावित है और धीरे-धीरे सामान्य किया जा रहा है।
घटनाओं की बाढ़: सियासत, अपराध, शिक्षा और मौसम से बढ़ी चिंता
लखनऊ
प्रदेश में इन दिनों कई बड़ी घटनाओं ने एक साथ सुर्खियां बटोरी हैं, जिनमें सियासी घमासान से लेकर अपराध, शिक्षा व्यवस्था और मौसम की मार तक शामिल हैं। राजधानी लखनऊ से लेकर नोएडा, वाराणसी और आगरा तक अलग-अलग घटनाओं ने प्रदेश का माहौल गर्म कर दिया है। कहीं महिला आरक्षण बिल को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं तो कहीं बवाल और हिंसा ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा नेता अपर्णा यादव ने विधानभवन के सामने विरोध प्रदर्शन करते हुए विपक्ष पर आरोप लगाए कि उनकी वजह से महिलाओं को उनका अधिकार नहीं मिल पा रहा। वहीं अखिलेश यादव ने इस प्रदर्शन पर तंज कसते हुए भाजपा पर सवाल उठाए। इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है और आने वाले दिनों में यह और उग्र हो सकती है।
दूसरी ओर नोएडा में हुए बवाल को लेकर चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, दिल्ली के एक विवादित विश्वविद्यालय के कुछ छात्र और एक राजनीतिक दल से जुड़े लोग इस हिंसा को भड़काने में शामिल थे। एसटीएफ ने कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और सोशल मीडिया के जरिए फैलाई गई भड़काऊ सामग्री की भी जांच की जा रही है।
वहीं वाराणसी के नेहिया गांव में झंडा लगाने को लेकर शुरू हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। इस दौरान पत्थरबाजी में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिनमें एसीपी विदुष सक्सेना भी शामिल हैं। पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर सख्ती बढ़ा दी है और गांव में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया है।
अपराध के मामलों में भी प्रदेश चिंताजनक स्थिति में नजर आ रहा है। आगरा में एक महिला ने अपने रिश्तेदार की हत्या कर दी, जिसमें उसने ब्लैकमेल और उत्पीड़न का आरोप लगाया। वहीं बरेली में पुरानी रंजिश के चलते एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इन घटनाओं ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं और पुलिस जांच में जुटी है।
इधर भीषण गर्मी ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बांदा में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, जबकि कई जिलों में लू जैसे हालात बन गए हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है। साथ ही, शिक्षा क्षेत्र में भी अव्यवस्था देखने को मिल रही है, जहां डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की परीक्षाओं और पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को लेकर छात्रों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
बसपा ने एसआईआर अभियान पर शुरू किया मंथन, बूथ कमेटियों से मांगी रिपोर्ट
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) से हुए राजनीतिक नफा-नुकसान का आकलन करने में जुट गई है। पार्टी ने हाल ही में गठित करीब 15 हजार बूथ कमेटियों से इस अभियान को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इन रिपोर्टों के आधार पर आगे की चुनावी रणनीति तय की जाएगी।
बताया जा रहा है कि बसपा ने एसआईआर अभियान में सक्रिय रूप से भाग लिया था, ताकि उसके समर्थकों के नाम मतदाता सूची में सुरक्षित रह सकें। पार्टी को आशंका है कि कई क्षेत्रों में मतदाताओं के नाम कटने से उसका जनाधार प्रभावित हो सकता है, इसलिए अब जमीनी स्तर पर समीक्षा की जा रही है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, जिन पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई है, उन्हें आगामी चुनाव में टिकट देने में प्राथमिकता मिल सकती है। खासकर जिन संभावित उम्मीदवारों को जिलों में प्रभारी बनाया गया था, उनकी रिपोर्ट के आधार पर उनकी दावेदारी मजबूत या कमजोर हो सकती है।
इस पूरे मामले की समीक्षा खुद बसपा सुप्रीमो मायावती कर रही हैं। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल को निर्देश दिए हैं कि सभी जिलों से विस्तृत रिपोर्ट जल्द से जल्द जुटाई जाए। खास ध्यान उन क्षेत्रों पर दिया जा रहा है जहां पार्टी का प्रभाव अधिक है लेकिन मतदाताओं की संख्या में कमी देखी गई है।
पार्टी नेतृत्व यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि जिन समर्थकों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं, उन्हें आगे जोड़ा जाए। इसके लिए बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जा रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति से बचा जा सके।
गौरतलब है कि 7 फरवरी को हुई बैठक में मायावती ने पहले ही इस अभियान को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए थे। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की थी कि वे बहुजन समाज को जागरूक करें और इस प्रक्रिया में अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करें, ताकि पार्टी का वोट बैंक मजबूत बना रहे।
श्रमिकों का फूटा गुस्सा, वेतन वृद्धि की मांग पर जोरदार प्रदर्शन; पुलिस ने संभाले हालात
हापुड़। औद्योगिक क्षेत्र पिलखुवा में शनिवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब दो कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों का गुस्सा अचानक सड़कों पर फूट पड़ा। लंबे समय से वेतन बढ़ोतरी की मांग कर रहे श्रमिकों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे इलाके में कामकाज प्रभावित हो गया और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का आरोप है कि वे लगातार प्रबंधन से वेतन वृद्धि की मांग कर रहे थे, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज किया जा रहा था। बढ़ती महंगाई और मौजूदा वेतन में गुजारा करना मुश्किल होने के चलते श्रमिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही थी, जो आखिरकार प्रदर्शन के रूप में सामने आई। कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए प्रबंधन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया और स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाएगा, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
स्थिति बिगड़ती देख स्थानीय पुलिस प्रशासन तुरंत मौके पर पहुंचा और कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया। पुलिस अधिकारियों ने संवाद के जरिए हालात को काबू में किया और किसी भी अप्रिय घटना को होने से रोक लिया। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी जारी है।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों की समस्याओं को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते श्रमिकों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो ऐसे विरोध प्रदर्शन आगे और तेज हो सकते हैं, जिससे औद्योगिक उत्पादन और व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
फिलहाल, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कंपनी प्रबंधन और श्रमिकों के बीच बातचीत का क्या परिणाम निकलता है और क्या कर्मचारियों की मांगों पर कोई सकारात्मक निर्णय लिया जाता है या नहीं।
कंधे पर हाथ, चेहरे पर मुस्कुराहट
नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी की सीएम बनने के बाद पहली मुलाकात
20 मिनट की बैठक में राजनीति से लेकर शराबबंदी तक मंथन
पटना। बिहार की राजनीति में बढ़ती हलचल के बीच शनिवार को एक अहम राजनीतिक मुलाकात ने सबका ध्यान खींच लिया। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहला मौका था जब दोनों नेता आमने-सामने बैठे। करीब 20 मिनट तक चली इस बैठक को राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस मुलाकात के दौरान राज्य और देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, सरकार के कामकाज और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा हुई। मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच सहजता और सौहार्द का माहौल देखने को मिला। तस्वीरों में नीतीश कुमार, सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखकर बातचीत करते नजर आए, जिससे राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास भी लगाए जाने लगे हैं।
इस दौरान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र यादव से भी बातचीत हुई, जिससे यह संकेत मिला कि सरकार के भीतर समन्वय और संवाद बनाए रखने की कोशिशें जारी हैं। सम्राट चौधरी ने इस मुलाकात को मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर बताया, वहीं नीतीश कुमार का रुख भी सकारात्मक नजर आया।
बैठक में बिहार की चर्चित शराबबंदी नीति भी चर्चा के केंद्र में रही। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ किया कि राज्य में शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू किया जाएगा और इसमें किसी प्रकार की ढील देने का फिलहाल कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि यह नीति पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सोच का हिस्सा है और इसे पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।
हालांकि, दूसरी ओर इस मुद्दे पर विरोध के स्वर भी तेज हो रहे हैं। मोकामा से विधायक अनंत सिंह सहित कई नेताओं ने शराबबंदी नीति पर सवाल उठाते हुए इसमें बदलाव की मांग की है। उनका कहना है कि प्रतिबंध के बावजूद अवैध शराब का चलन जारी है और इससे समाज में अन्य नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
इन सबके बीच मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश यह है कि फिलहाल बिहार में शराबबंदी कानून में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा। सरकार इस नीति को जारी रखने के पक्ष में दृढ़ नजर आ रही है। इस मुलाकात ने यह भी संकेत दिया है कि बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में और भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं, जिन पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।








