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Saturday, February 28, 2026
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यमन के सरकारी कर्मचारियों के लिए सऊदी अरब ने जारी किए 346.6 मिलियन डॉलर

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सऊदी अरब ने यमन के सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में आई भारी कटौती की भरपाई में मदद के लिए 346.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता प्रदान की है। यह भुगतान किंग सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के निर्देश पर किया गया। यह राशि Saudi Program for Development and Reconstruction of Yemen (SDRPY) के माध्यम से जारी की गई है।

SDRPY ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर जारी बयान में कहा कि यह सहायता यमन में स्थिरता और विकास को बढ़ावा देने के लिए किंगडम की निरंतर प्रतिबद्धता का हिस्सा है। कार्यक्रम के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य आर्थिक, वित्तीय और मौद्रिक स्थिरता को मजबूत करना, सरकारी संस्थानों की कार्यक्षमता बढ़ाना और प्रशासनिक पारदर्शिता में सुधार करना है।

बयान में यह भी कहा गया कि सऊदी सहायता निजी क्षेत्र को सशक्त बनाने और सतत आर्थिक विकास को गति देने में सहायक होगी। लंबे समय से संघर्ष और आर्थिक संकट झेल रहे यमन में सरकारी कर्मचारियों को नियमित वेतन न मिल पाने की समस्या गंभीर बनी हुई है, जिससे सार्वजनिक सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।

रशद अल-अलीमी, जो यमनी प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के चेयरमैन हैं, ने इस सहायता के लिए सऊदी नेतृत्व का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसे यमन के लोगों के प्रति किंगडम के लंबे समय से चले आ रहे समर्थन की निरंतरता बताया।

अल-अलीमी ने कहा कि यह वित्तीय सहयोग यमन की आर्थिक रिकवरी प्रक्रिया को गति देने में मदद करेगा और राष्ट्रीय संस्थानों को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इसे सुरक्षा और स्थिरता बहाल करने की सरकार की क्षमता में विश्वास का प्रतीक बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि सऊदी अरब के साथ यमन की रणनीतिक साझेदारी एक स्थिर और सुरक्षित भविष्य के निर्माण के लिए आवश्यक है। दोनों देशों के बीच सहयोग पुनर्निर्माण, बुनियादी ढांचे के विकास और सार्वजनिक सेवाओं के सुदृढ़ीकरण में अहम भूमिका निभा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह आर्थिक सहायता यमन की कमजोर वित्तीय प्रणाली को अस्थायी राहत दे सकती है, खासकर उस समय जब देश मानवीय और आर्थिक संकट से जूझ रहा है। वेतन भुगतान में सुधार से सरकारी संस्थानों की कार्यक्षमता और आम जनता का भरोसा बढ़ने की उम्मीद है।

सऊदी अरब पहले भी यमन में ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स में निवेश कर चुका है। SDRPY के तहत चल रही परियोजनाएं देश के विभिन्न प्रांतों में विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही हैं।

हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि दीर्घकालिक स्थिरता के लिए राजनीतिक समाधान और व्यापक आर्थिक सुधार भी आवश्यक होंगे। वित्तीय सहायता तत्काल राहत दे सकती है, लेकिन स्थायी विकास के लिए संरचनात्मक बदलाव जरूरी हैं।

फिलहाल, यह सहायता यमन की सरकार और कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। इससे वेतन भुगतान में आंशिक स्थिरता आने और प्रशासनिक तंत्र को सुचारु रूप से चलाने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

गिलगित-बाल्टिस्तान में ड्रोन उड़ानों पर रोक, पाकिस्तान-अफगान तनाव और गहराया

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पाकिस्तान प्रशासन ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में ड्रोन उड़ानों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। यह निर्णय गृह मंत्रालय के निर्देश पर लिया गया है। गिलगित-बाल्टिस्तान पुलिस के प्रवक्ता के अनुसार, आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों को अपने आधिकारिक दायित्वों के तहत ड्रोन उपयोग की छूट रहेगी।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तनाव चरम पर है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी, हथियार आपूर्ति या हमलों के लिए किया जा सकता है। हालिया घटनाक्रम को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती तौर पर यह प्रतिबंध लागू किया है ताकि संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी संभावित खतरे को रोका जा सके।

दूसरी ओर, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने दावा किया है कि उसने रातभर चले सैन्य अभियानों में 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया। तालिबान की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि कार्रवाई डूरंड लाइन के आसपास पक्तिका, पक्तिया, खोस्त, नंगरहार, कुनार और नूरिस्तान प्रांतों के निकट की गई। दावा किया गया कि दो पाकिस्तानी सैन्य अड्डों और 19 चौकियों पर कब्जा भी किया गया।

तालिबान प्रशासन ने कहा कि यह कार्रवाई पाकिस्तानी सेना की “उकसावे वाली गतिविधियों” के जवाब में की गई। बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि अभियान पूर्व निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने के बाद इस्लामिक अमीरात के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ के आदेश पर मध्यरात्रि में समाप्त कर दिया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

पाकिस्तान ने तालिबान के दावों को खारिज करते हुए जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। पाकिस्तानी सेना का कहना है कि उसने अफगानिस्तान में कई ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिनमें बड़ी संख्या में तालिबानी लड़ाके मारे गए। दोनों पक्षों के दावों में भारी अंतर है, जिससे वास्तविक स्थिति का आकलन करना कठिन हो गया है।

दोनों देशों के बीच तनाव की जड़ डूरंड लाइन को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद है। इसके अलावा पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि अफगान तालिबान, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के लड़ाकों को शरण दे रहा है। तालिबान इन आरोपों को सिरे से खारिज करता आया है। यही मुद्दा हालिया सैन्य कार्रवाइयों की प्रमुख वजह बताया जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि गिलगित-बाल्टिस्तान में ड्रोन प्रतिबंध सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है, ताकि किसी भी संभावित निगरानी या हमले को रोका जा सके। यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां पहले भी सुरक्षा अलर्ट जारी किए जाते रहे हैं।

क्षेत्रीय स्थिरता के लिए यह बढ़ता टकराव गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। यदि दोनों पक्ष सैन्य कार्रवाई जारी रखते हैं तो इसका असर न केवल सीमा क्षेत्रों बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने के प्रयासों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि संवाद और भरोसे की बहाली के बिना हालात सामान्य होना कठिन है। ड्रोन प्रतिबंध जैसे कदम तत्काल सुरक्षा तो बढ़ा सकते हैं, लेकिन दीर्घकालिक समाधान केवल बातचीत से ही संभव होगा।

फिलहाल सीमा पर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। दोनों देशों की सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं और नागरिकों में भी चिंता का माहौल है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या सैन्य टकराव कम होता है या संघर्ष और व्यापक रूप लेता है।

पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष तेज, कतर की मध्यस्थता के बीच हालात और तनावपूर्ण

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पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी सशस्त्र संघर्ष अब खुली जंग का रूप लेता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों की ओर से एक-दूसरे पर बड़े पैमाने पर हमले और भारी नुकसान पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं। सीमावर्ती इलाकों से लेकर बड़े शहरों तक हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। पाकिस्तान ने इस टकराव को “खुला युद्ध” करार दिया है, जबकि तालिबान प्रशासन बातचीत की इच्छा जता रहा है।

पाकिस्तान अपनी मजबूत वायुसेना के दम पर अफगानिस्तान की सीमा के भीतर घुसकर हमले कर रहा है। काबुल, कंधार समेत कई बड़े शहरों में बमबारी की खबरें सामने आई हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कई इलाकों में तेज धमाकों और लड़ाकू विमानों की आवाज के बाद सायरन बजते सुने गए। दूसरी ओर, सीमा पर अफगान लड़ाके भी पाकिस्तानी चौकियों को निशाना बना रहे हैं, जिससे डूरंड लाइन के आसपास हालात और विस्फोटक हो गए हैं।

तालिबान प्रशासन के प्रवक्ता जबुल्लाह मुजाहिद ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी बलों ने गुरुवार रात काबुल, कंधार और पक्तिया के कुछ हिस्सों पर हवाई हमले किए, जबकि शुक्रवार को पक्तिया, पक्तिका, खोस्त और लगमान प्रांतों को निशाना बनाया गया। उनके मुताबिक गुरुवार रात के हमलों में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन शुक्रवार को हुए हमलों में नागरिकों की मौत हुई है। हालांकि, आधिकारिक संख्या जारी नहीं की गई है।

इस बीच, मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए कतर एक बार फिर सक्रिय हुआ है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अफगान विदेश मंत्रालय ने बताया कि तालिबान के विदेश मंत्री मुत्ताकी ने कतर के उप विदेश मंत्री अब्दुलअजीज अल खलीफी से फोन पर बातचीत की। मुत्ताकी ने कहा कि अफगानिस्तान ने हमेशा आपसी समझ और सम्मान के आधार पर समाधान को प्राथमिकता दी है, लेकिन यह तभी संभव है जब दूसरा पक्ष भी ईमानदारी से आगे बढ़े।

दूसरी ओर, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने बयान दिया कि “अब सब्र का बांध टूट चुका है और पाकिस्तान खुले युद्ध में उतर चुका है।” पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने भी चेतावनी दी है कि यदि तालिबान की ओर से उकसावे की कोई कार्रवाई हुई तो उसका “मुंहतोड़ जवाब” दिया जाएगा।

संघर्ष की जड़ में पाकिस्तान द्वारा लगाए जा रहे वे आरोप हैं, जिनमें कहा जाता है कि अफगान तालिबान, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के लड़ाकों को पनाह दे रहा है। तालिबान प्रशासन इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है। हालिया हवाई हमलों को पाकिस्तान ने इसी संदर्भ में “आत्मरक्षा” की कार्रवाई बताया है।

तालिबान का दावा है कि डूरंड लाइन पर जवाबी कार्रवाई में उसने लगभग 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया है। वहीं पाकिस्तान का कहना है कि उसके हमलों में करीब 274 तालिबानी लड़ाके मारे गए हैं, जबकि उसके 12 से 14 सैनिक हताहत हुए हैं। दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, जिससे वास्तविक नुकसान का आकलन कठिन बना हुआ है।

क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर इस संघर्ष को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो यह टकराव व्यापक क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बन सकता है। खासकर मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के सुरक्षा समीकरणों पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।

कतर की पहल को फिलहाल एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि अतीत में भी उसने अफगान मुद्दों पर मध्यस्थता की भूमिका निभाई है। हालांकि, जमीनी स्तर पर जारी बमबारी और जवाबी हमलों के बीच शांति वार्ता की संभावनाएं कमजोर पड़ती दिख रही हैं।

फिलहाल सीमा पर तनाव बरकरार है और दोनों देशों की सेनाएं उच्च सतर्कता पर हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति बंदूकों की आवाज को शांत कर पाएगी या यह संघर्ष आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले लेगा।

होली पर हरपालपुर में ड्रोन से निगरानी, पुलिस ने किया फ्लैग मार्च

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हरपालपुर। रंगों के पर्व होली को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के लिए हरपालपुर पुलिस पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दी। शुक्रवार को प्रभारी निरीक्षक वीरेंद्र कुमार पंकज के नेतृत्व में पुलिस बल ने कस्बे के प्रमुख मार्गों, बाजारों और संवेदनशील इलाकों में सघन गश्त की। त्योहार के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखी गई, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके।

सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए पुलिस ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। पूरे कस्बे की निगरानी ड्रोन कैमरों के जरिए की गई। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि त्योहारों के दौरान भीड़ का लाभ उठाकर कुछ अराजक तत्व माहौल बिगाड़ने का प्रयास करते हैं। ऐसे लोगों पर नजर रखने और उनकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए ड्रोन से संवेदनशील स्थानों, छतों और तंग गलियों की भी जांच की गई, जहां सामान्य परिस्थितियों में पहुंच पाना कठिन होता है।

पुलिस ने पैदल गश्त कर लोगों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया। इस दौरान व्यापारियों और संभ्रांत नागरिकों से संवाद कर शांति बनाए रखने में सहयोग की अपील की गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शराब पीकर हुड़दंग करने, जबरन रंग डालने या किसी भी प्रकार की अभद्रता करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि होली का त्योहार आपसी भाईचारे और सौहार्द के साथ मनाएं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या विवाद की स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचना दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनी रहे।

सीसीटीवी निगरानी में शांतिपूर्ण संपन्न हुई यूपी बोर्ड परीक्षा

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बिसौली। रामशरण वैद्य आदर्श इंटर कॉलेज में गुरुवार को यूपी बोर्ड की परीक्षा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। परीक्षा केंद्र के मुख्य प्रवेश द्वार पर तैनात शिक्षकों और पुलिसकर्मियों ने परीक्षार्थियों के एडमिट कार्ड का गहन मिलान करने के बाद ही उन्हें अंदर प्रवेश की अनुमति दी। सघन जांच व्यवस्था के चलते पूरे केंद्र पर अनुशासन और पारदर्शिता का वातावरण बना रहा।

केंद्र व्यवस्थापक डॉ. घनश्याम दास ने जानकारी दी कि द्वितीय पाली में इंटरमीडिएट भूगोल विषय की परीक्षा आयोजित हुई, जिसमें 66 छात्राएं पंजीकृत थीं। इनमें से 65 छात्राएं उपस्थित रहीं, जबकि एक अनुपस्थित रही। उन्होंने बताया कि परीक्षा को नकलविहीन और पारदर्शी बनाए रखने के लिए सभी कक्षों में सीसीटीवी कैमरे सक्रिय रखे गए थे तथा कक्ष निरीक्षकों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए थे।

परीक्षार्थियों को परीक्षा से पूर्व अनुचित साधनों का प्रयोग न करने की सख्त हिदायत दी गई। केंद्र प्रशासन ने स्पष्ट किया कि शासन के निर्देशों के अनुरूप शुचिता और निष्पक्षता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। परीक्षा के दौरान बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक रही।

केंद्र पर स्टेटिक मजिस्ट्रेट सचिन कुमार, पूर्ति निरीक्षक बदायूं, बाह्य केंद्र व्यवस्थापक विष्णु कांत, परीक्षा प्रभारी विपिन शर्मा, सह प्रभारी हरदीप सिंह तथा कंप्यूटर ऑपरेटर अमित पाराशरी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल पूरे समय तैनात रहा, जिससे परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सकी।

अवैध गन्ना खरीद-फरोख्त में वीनस चीनी मिल के मालिक समेत चार पर मुकदमा

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दायूं। यदु शुगर मिल सुजानपुर (बिसौली) बंद होने के बाद आवंटित गन्ने की अवैध खरीद-फरोख्त के आरोप में पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है। सहकारी गन्ना विकास समिति के सचिव राजीव कुमार सिंह की तहरीर पर सिविल लाइंस कोतवाली में चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपियों में किसानों से गन्ना खरीदने वाले दो स्थानीय व्यक्ति, वीनस चीनी मिल के अध्यासी अनुपम सिंह और मिल मालिक अतुल कुमार शामिल हैं।

तहरीर के अनुसार, यदु शुगर मिल बंद होने के बाद गन्ना आयुक्त के आदेश पर क्षेत्रीय किसानों का पेराई योग्य गन्ना बाहरी जिलों की मिलों को आवंटित किया गया था। 25 फरवरी की शाम क्षेत्र भ्रमण के दौरान सिविल लाइंस कोतवाली क्षेत्र के सिलहरी गांव के पास मोहन पुत्र मथुरा लाल निवासी अन्नी और जितेंद्र सिंह पुत्र रामभरोसे सिंह निवासी सिलहरी किसानों से कम दर पर गन्ना खरीदते पाए गए। पूछताछ में दोनों ने बताया कि वे वीनस चीनी मिल मझावली (संभल) के लिए गन्ना एकत्र कर रहे थे और नकद भुगतान किया जा रहा था।

अधिकारियों ने गन्ना से भरे ट्रालों को पकड़कर क्रय केंद्र कुनार पर खड़ा कराया, लेकिन आरोप है कि रात में गन्ना माफिया ट्राले वहां से ले गए। शिकायत में कहा गया है कि आवंटन आदेश के विपरीत गन्ना अधिक दर पर अन्यत्र बेचा जा रहा था, जिससे अधिकृत मिलों और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंच रहा है।

पुलिस ने मोहन, जितेंद्र सिंह, अनुपम सिंह और अतुल कुमार के विरुद्ध धोखाधड़ी व अवैध गन्ना खरीद के आरोप में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन पड़ताल की जा रही है और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।