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Saturday, February 28, 2026
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सेंगुर नदी में नहाते समय दो किशोरों की डूबकर मौत, ढाई घंटे बाद मिला शव

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औरैया

शुक्रवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे में सेंगुर नदी में नहाने गए दो किशोरों की डूबने से मौत हो गई। दोनों आपस में रिश्तेदार बताए जा रहे हैं और दोपहर के समय नदी में स्नान करने पहुंचे थे। काफी देर तक घर न लौटने पर परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की, जिसके बाद घटना की जानकारी सामने आई। लगभग ढाई घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद गोताखोरों ने दोनों के शव नदी से बाहर निकाले। इस घटना से गांव में शोक और मातम का माहौल है।
जानकारी के अनुसार दोनों किशोर दोपहर के समय सेंगुर नदी में नहाने गए थे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि नदी के बीच गहराई अधिक होने के कारण वे अचानक डूबने लगे। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन तेज बहाव और गहराई के कारण सफलता नहीं मिल सकी। कुछ ही क्षणों में दोनों पानी में लापता हो गए।
उधर, काफी देर तक दोनों का गांव में अता-पता न चलने पर स्वजन चिंतित हो उठे और खोजबीन शुरू की। इसी बीच ग्रामीणों को नदी में डूबने की सूचना मिली। तत्काल यूपी-112 पर सूचना दी गई। सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया गया।
स्थानीय गोताखोरों को बुलाया गया, जिन्होंने नदी में उतरकर किशोरों की तलाश शुरू की। लगभग ढाई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दोनों के शव नदी से बाहर निकाले गए। शव बाहर आते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। मां-बाप और अन्य स्वजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। गांव में मातम छा गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए।
पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पंचनामा भरने की कार्रवाई की और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला डूबने से मौत का प्रतीत हो रहा है, हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट कारण सामने आएंगे।
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर नदी और तालाबों में बिना सुरक्षा इंतजाम के नहाने के खतरों को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नदी किनारे चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं और गहरे स्थानों को चिह्नित किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

सहार से गिरफ्तार बांग्लादेशी इस्लाम गाजी को ढाई वर्ष का कारावास

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विदेशी अधिनियम में दोषी करार

औरैया

सहार थाना क्षेत्र से पांच माह पूर्व गिरफ्तार किए गए बांग्लादेशी नागरिक इस्लाम गाजी को न्यायालय ने विदेशी अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए ढाई वर्ष के साधारण कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अपर सिविल जज (जूनियर डिवीजन) शालिनी त्यागी की अदालत ने सुनवाई पूरी करते हुए यह फैसला सुनाया। न्यायालय के इस निर्णय के बाद प्रशासनिक महकमे में सतर्कता और कानूनी कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
अभियोजन पक्ष की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार थाना सहार पुलिस ने 17 सितंबर 2025 को क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पर एक व्यक्ति को हिरासत में लिया था। पूछताछ के दौरान उसने अपना नाम इस्लाम गाजी, उम्र करीब 65 वर्ष, निवासी दामोदर परगना फुलथला, जिला खुलना (बांग्लादेश) बताया। प्रारंभिक जांच में उसके पास भारत में वैध रूप से निवास करने अथवा प्रवेश करने से संबंधित कोई अधिकृत दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
जामा तलाशी के दौरान उसके पास से एक मोबाइल फोन बरामद हुआ। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उसके विरुद्ध विदेशी अधिनियम के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया और उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया। इसके बाद प्रकरण की विवेचना पूरी कर आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
अभियोजन अधिकारी प्रीतिलता ने न्यायालय में साक्ष्य और दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए आरोपों को प्रमाणित किया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर इस्लाम गाजी को दोषी मानते हुए ढाई वर्ष के साधारण कारावास तथा पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास भुगतने का भी प्रावधान रखा गया है।
उल्लेखनीय है कि इस प्रकरण में पुलिस ने पांच माह के भीतर विवेचना पूर्ण कर न्यायालय में प्रभावी पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप अपेक्षाकृत कम समय में फैसला आ सका। न्यायालय के निर्णय को अवैध रूप से देश में प्रवेश और निवास के मामलों में सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल दोषी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि अवैध रूप से देश में प्रवेश करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और कानून व्यवस्था से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

हाइटेंशन लाइन की चपेट में आकर 55 वर्षीय व्यक्ति की दर्दनाक मौत

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पेड़ पर पत्ते तोड़ते समय हुआ हादसा

कासगंज

सोरों कोतवाली क्षेत्र में शुक्रवार को एक दर्दनाक हादसे में 55 वर्षीय व्यक्ति की 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना लहरा रोड स्थित नव दुर्गा मंदिर के समीप उस समय हुई जब मृतक बकरियों के लिए पत्ते तोड़ने के उद्देश्य से पेड़ पर चढ़ा था। अचानक तेज करंट लगने से उसकी जान चली गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान सोरों थाना क्षेत्र के ग्राम कादरबाड़ी निवासी असफाक पुत्र बसीर के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि असफाक रोज की तरह अपने पशुओं के चारे की व्यवस्था करने के लिए घर से निकला था। लहरा रोड पर स्थित नव दुर्गा मंदिर के पास एक पेड़ पर वह पत्ते तोड़ने के लिए चढ़ गया। इसी दौरान पेड़ के ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइन के बेहद करीब पहुंच गया और अनजाने में उसका संपर्क बिजली तार से हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जैसे ही असफाक बिजली लाइन की चपेट में आया, तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी और वह पेड़ पर ही झुलस गया। करंट इतना तेज था कि उसे संभलने का मौका तक नहीं मिला और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना देखकर आसपास मौजूद लोग सन्न रह गए और तुरंत पुलिस तथा बिजली विभाग को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही सोरों कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। शव पेड़ पर ही फंसा होने के कारण उसे नीचे उतारने में काफी कठिनाई हुई। बाद में जेसीबी मशीन की सहायता से शव को सावधानीपूर्वक नीचे उतारा गया। पुलिस ने मौके पर पंचनामा भरने की कार्रवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
घटना के बाद मृतक के परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हाईटेंशन बिजली लाइन काफी नीचे से गुजर रही है और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। उनका कहना है कि यदि बिजली विभाग द्वारा तारों की ऊंचाई और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता तो यह हादसा टाला जा सकता था।
ग्रामीणों ने बिजली विभाग से मांग की है कि गांव और आबादी वाले क्षेत्रों में गुजर रही हाईटेंशन लाइनों की जांच कर उन्हें सुरक्षित ऊंचाई पर स्थापित किया जाए तथा आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाएं दोबारा न हों। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इंटर की रसायन विज्ञान परीक्षा में सॉल्वर पकड़ी गई, भंडार गृह में छिपाकर हल कराया जा रहा था पेपर

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इटावा

भरथना क्षेत्र स्थित श्री बांके बिहारी इंटर कॉलेज में इंटरमीडिएट की रसायन विज्ञान परीक्षा के दौरान नकल कराने का बड़ा मामला सामने आया है। छात्रा की जगह एक सॉल्वर युवती को पेपर हल करते रंगे हाथों पकड़ा गया। चौंकाने वाली बात यह रही कि उसे सीसीटीवी कैमरों से बचाने के लिए कॉलेज परिसर के एक बंद भंडार गृह में छिपाकर बैठाया गया था। मामले में केंद्र व्यवस्थापक, संबंधित छात्रा और सॉल्वर युवती के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
जानकारी के अनुसार परीक्षा केंद्र पर जीआईसी के प्रधानाचार्य पूरन सिंह पाल को केंद्र इंचार्ज बनाकर भेजा गया था। परीक्षा के दौरान स्टेटिक मजिस्ट्रेट और तहसीलदार निरीक्षण पर पहुंचे। नियमित जांच के दौरान उन्हें केंद्र परिसर में एक कमरे पर ताला लगा होने पर संदेह हुआ। पूछताछ करने पर स्पष्ट जवाब न मिलने से उनका शक और गहरा गया।
अधिकारियों ने कमरे का ताला खोलने के निर्देश दिए, लेकिन केंद्र व्यवस्थापक की ओर से पहले आनाकानी की गई। ताला खोलने को लेकर काफी देर तक बहस और हुज्जत होती रही। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम भरथना काव्यासी को मौके पर बुलाया गया। उनके पहुंचने के बाद सख्ती से ताला खुलवाया गया।
जैसे ही कमरे का दरवाजा खोला गया, अंदर का नजारा देखकर अधिकारी स्तब्ध रह गए। बंद भंडार गृह में एक युवती बैठकर इंटरमीडिएट रसायन विज्ञान का प्रश्नपत्र हल कर रही थी। जांच में स्पष्ट हुआ कि वह मूल परीक्षार्थी नहीं बल्कि सॉल्वर के रूप में आई थी और छात्रा की जगह परीक्षा हल कर रही थी।
अधिकारियों ने तुरंत सॉल्वर युवती को हिरासत में ले लिया और संबंधित छात्रा की भी पहचान की गई। पूरे घटनाक्रम की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी गई। इसके बाद केंद्र व्यवस्थापक, छात्रा और सॉल्वर के विरुद्ध संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
इस घटना ने बोर्ड परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, प्रशासन ने अन्य परीक्षा केंद्रों पर भी सघन जांच के निर्देश दिए हैं, ताकि इस तरह की अनियमितताओं पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।

तेज रफ्तार ट्रक की टक्कर से बाइक सवार की मौत, पत्नी गंभीर रूप से घायल

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इटावा

इकदिल थाना क्षेत्र में शुक्रवार दोपहर एक दर्दनाक सड़क हादसे में बाइक सवार दंपति को तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मार दी। हादसा आगरा-कानपुर नेशनल हाईवे पर बिरारी गांव के सामने हुआ, जहां टक्कर इतनी भीषण थी कि पति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई। दुर्घटना के बाद हाईवे पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और काफी संख्या में लोग घटनास्थल पर एकत्र हो गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मैनपुरी जनपद के करहल स्थित स्टेट बैंक शाखा के पास रहने वाले नरेश अपनी पत्नी राजो देवी के साथ बाइक से पुखरायां किसी रिश्तेदार की गमी में शामिल होने जा रहे थे। शुक्रवार दोपहर लगभग डेढ़ बजे जब उनकी बाइक बिरारी गांव के सामने आगरा-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पहुंची, तभी पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही बाइक अनियंत्रित होकर सड़क पर गिर गई और दोनों पति-पत्नी उछलकर दूर जा गिरे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा इतना भयावह था कि नरेश ट्रक के नीचे आ गए और उनका शरीर बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गया। टक्कर की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनकी गर्दन धड़ से अलग हो गई और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद ट्रक चालक वाहन लेकर फरार हो गया। हादसे से हाईवे पर कुछ समय के लिए यातायात भी बाधित रहा।
सूचना मिलते ही इकदिल थाना प्रभारी विक्रम सिंह चौहान पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घायल राजो देवी को तत्काल एंबुलेंस की मदद से जिला अस्पताल भिजवाया, जहां उनका इलाज जारी है। चिकित्सकों के अनुसार उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भिजवा दिया है और परिजनों को सूचना दे दी है।
पुलिस ने अज्ञात ट्रक चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि वाहन की पहचान कर उसे पकड़ा जा सके। इस दर्दनाक हादसे से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है। स्थानीय लोगों ने हाईवे पर बढ़ती तेज रफ्तार और भारी वाहनों की लापरवाही पर चिंता जताते हुए प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

सात माह से वेतन बकाया, जवाहर तापीय परियोजना में दूसरे दिन भी श्रमिकों की हड़ताल जारी

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एटा

जिले स्थित जवाहर तापीय परियोजना में वेतन भुगतान न होने से आक्रोशित श्रमिकों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। सात माह से वेतन न मिलने के कारण मजदूरों ने काम बंद कर प्रदर्शन तेज कर दिया है, जिससे प्लांट का कार्य प्रभावित होने लगा है। श्रमिकों का कहना है कि लंबे समय से आश्वासन मिल रहा था, लेकिन भुगतान नहीं किया गया, जिसके चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
पॉवर प्लांट परिसर में बड़ी संख्या में कर्मचारियों और श्रमिकों ने एकत्र होकर नारेबाजी की और बकाया वेतन जल्द दिलाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। कई मजदूरों ने बताया कि परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतों का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। सात महीने से वेतन न मिलने के कारण उनके सामने रोजमर्रा की समस्याएं खड़ी हो गई हैं।
उधर मैन पावर कंपनियों ने भी मुख्य निर्माण कंपनी दुसान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कंपनियों का आरोप है कि मुख्य कंपनी ने पिछले दो वर्षों से करोड़ों रुपये का भुगतान रोक रखा है। उनका कहना है कि जब तक उन्हें बकाया धनराशि नहीं मिलेगी, तब तक वे श्रमिकों को वेतन देने की स्थिति में नहीं हैं। मैन पावर कंपनियों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है और मामले की जांच कराते हुए भुगतान सुनिश्चित कराने की अपील की है।
हड़ताल के चलते परियोजना में चल रहे निर्माण और रखरखाव कार्यों पर असर पड़ने लगा है। सूत्रों के अनुसार यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो प्लांट के संचालन पर भी प्रभाव पड़ सकता है। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है, जबकि श्रमिकों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक बकाया वेतन का भुगतान नहीं होता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
जवाहर तापीय परियोजना प्रदेश की महत्वपूर्ण ऊर्जा परियोजनाओं में गिनी जाती है। ऐसे में वेतन विवाद के चलते काम प्रभावित होना न केवल श्रमिकों बल्कि ऊर्जा उत्पादन व्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। अब देखना होगा कि शासन और संबंधित कंपनियां इस विवाद का समाधान कब तक निकाल पाती हैं।