लखनऊ। प्रदेश में नए वित्तीय वर्ष के साथ ही नई आबकारी नीति लागू कर दी गई है, जिसके तहत देसी शराब की लाइसेंस प्राप्त दुकानों को 5 अप्रैल तक अपना पूरा पुराना स्टॉक समाप्त करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके विपरीत अंग्रेजी शराब के फुटकर दुकानदारों को ऐसी कोई बाध्यता नहीं दी गई है और वे अपना शेष स्टॉक आगे भी बेच सकेंगे। इस फैसले से देसी शराब कारोबारियों के सामने सीमित समय में स्टॉक खत्म करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
जानकारी के अनुसार, इस बार सरकार ने दुकानों के नवीनीकरण का फैसला लिया है, जबकि पिछले वर्ष नवीनीकरण नहीं होने के कारण दुकानदारों को 31 मार्च तक स्टॉक खत्म करना पड़ा था। उस दौरान ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए भारी छूट दी गई थी, लेकिन इस बार उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की छूट मिलने की संभावना नहीं है।
नई आबकारी नीति के तहत देसी शराब (36 फीसदी अल्कोहल वाली) पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को 165 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 173 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके चलते देसी शराब की कीमतों में करीब 5 रुपये तक की वृद्धि हो सकती है। हालांकि, अन्य चार श्रेणियों की शराब की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे उनके उपभोक्ताओं पर तत्काल कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
सरकार ने इस बार आबकारी व्यवस्था में कई नए प्रयोग भी किए हैं। गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी और लखनऊ जैसे प्रमुख शहरों में पहली बार लो-अल्कोहलिक स्ट्रेंथ बिवरेजेज, बीयर और वाइन के विशेष बार खोलने की अनुमति दी गई है। इससे शहरी क्षेत्रों में नियंत्रित और व्यवस्थित तरीके से पेय पदार्थों की उपलब्धता बढ़ेगी, साथ ही सरकार के राजस्व में भी इजाफा होने की उम्मीद है।
नई नीति को लेकर विभाग का दावा है कि इससे अवैध बिक्री पर अंकुश लगेगा, राजस्व में वृद्धि होगी और उपभोक्ताओं को अधिक पारदर्शी व्यवस्था का लाभ मिलेगा। वहीं, कारोबारियों को भी स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलने से संचालन में सुविधा होगी।


