नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए देशव्यापी छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों पर केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़ा बयान दिया। सरकार ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी और उनके विरुद्ध नई एफआईआर दर्ज नहीं होगी। हालांकि प्रदर्शन के दौरान हिंसा, आगजनी, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अन्य गंभीर अपराधों के आरोप में दर्ज 2700 से अधिक एफआईआर वापस नहीं ली जाएंगी।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सरकार अपने पहले दिए गए आश्वासन पर कायम है और छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगी। वहीं, गंभीर आपराधिक मामलों में दर्ज मुकदमे कानून के अनुसार जारी रहेंगे। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी पुलिस कार्रवाई पर सख्त टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यदि किसी पुलिसकर्मी ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया है तो उसे किसी भी कीमत पर बचाया नहीं जाना चाहिए। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्र आंदोलन की आड़ में हिंसा करने वाले या आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों को भी संरक्षण नहीं मिल सकता।
अदालत ने संकेत दिए कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और हिंसा के आरोपों की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने पर भी विचार किया जा सकता है। साथ ही यह भी जांच होगी कि पुलिस पर हमला करने वाले वास्तव में छात्र थे या भीड़ में शामिल असामाजिक तत्व।
गौरतलब है कि नीट पेपर लीक के विरोध में 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर और आसपास प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई थी। भीड़ को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े, जबकि पथराव की घटनाएं भी सामने आई थीं। इस दौरान पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों सहित सौ से अधिक लोगों के घायल होने का दावा किया गया था।
यह आंदोलन 36 दिनों तक चला। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे सहित नीट पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने की थी। बाद में आंदोलन समाप्त कर दिया गया, लेकिन उससे जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। अदालत ने पहले ही विभिन्न राज्यों को प्रदर्शन से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।


