– फर्जी फास्टैग और वाहन नंबर से टोल चोरी की जांच
– सर्वर सीज होने के बाद टोल वसूली बंद
लखनऊ। फर्जी फास्टैग और वाहन नंबर के जरिए टोल चोरी के मामले में उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने इटौंजा टोल प्लाजा पर बड़ी कार्रवाई की। एसटीएफ की टीम ने टोल प्लाजा का सर्वर, सीसीटीवी डीवीआर और संबंधित दस्तावेज जब्त कर लिए। कार्रवाई के बाद सर्वर उपलब्ध नहीं होने से टोल वसूली ठप हो गई।
मामले में एआरटीओ लखनऊ दक्षिणी की शिकायत पर सरोजनीनगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में इसकी विवेचना एसटीएफ को सौंप दी गई। जांच के दौरान एसटीएफ ने टोल संचालन करने वाली एजेंसी से फास्टैग लेनदेन, वाहनों की आवाजाही और सीसीटीवी रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी मांगी थी। रिकॉर्ड उपलब्ध न होने के बाद एसटीएफ ने न्यायालय से वारंट प्राप्त कर कार्रवाई की।
जांच में कथित तौर पर सामने आया कि कुछ वाहन असली वाहन नंबर के बजाय दूसरे या फर्जी नंबर से जुड़े FASTag का इस्तेमाल कर रहे थे। इससे टोल सिस्टम और ऑनलाइन चालान की कार्रवाई से बचने की कोशिश की जाती थी। एसटीएफ ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार भी किया है और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
सर्वर सीज होने के बाद इटौंजा टोल प्लाजा पर टोल वसूली प्रभावित है। टोल एजेंसी के अनुसार वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने में करीब 15 दिन लग सकते हैं। इस दौरान प्रतिदिन 18 से 20 लाख रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान लगाया गया है। इस मार्ग से रोजाना करीब 42 से 45 हजार वाहन गुजरते हैं।
टोल संचालन एजेंसी ने कहा है कि उसे किसी गड़बड़ी की जानकारी नहीं थी और जांच में सहयोग किया जा रहा है। फिलहाल एसटीएफ के विशेषज्ञ जब्त सर्वर और डीवीआर की तकनीकी जांच कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही फर्जी फास्टैग नेटवर्क और कथित टोल चोरी की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।


