– पीएम आवास योजना के अमानक निर्माण की चर्चा
नवाबगंज (फर्रुखाबाद)। थाना क्षेत्र के रायपुर गांव में शनिवार रात आई तेज आंधी एक परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गई। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत बन रहे एक निर्माणाधीन मकान की दीवार भरभराकर गिर गई, जिसकी चपेट में आकर 65 वर्षीय संतराम राजपूत की मौत हो गई। हादसे के बाद गांव में शोक की लहर दौड़ गई, जबकि निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
शनिवार रात करीब नौ बजे संतराम राजपूत अपने घर के अंदर चारपाई पर बैठे हुए थे। पास में उनकी पत्नी विमला देवी दूसरी चारपाई पर लेटी थीं। इसी दौरान तेज आंधी चलने लगी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घर के समीप बन रही नई कॉलोनी की एक निर्माणाधीन दीवार अचानक तेज हवा का दबाव नहीं झेल सकी और भरभराकर गिर पड़ी। दीवार का पूरा मलबा सीधे संतराम राजपूत के ऊपर आ गिरा।
हादसा इतना भयावह था कि ईंटों और मलबे में दबे संतराम गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि उनकी पत्नी विमला देवी बाल-बाल बच गईं। पति को मलबे में दबा देखकर विमला देवी की चीख-पुकार सुनकर परिजन और ग्रामीण मौके पर दौड़ पड़े। काफी मशक्कत के बाद संतराम को मलबे से बाहर निकाला गया।
मृतक के भतीजे आलोक कुमार ने तत्काल 108 एम्बुलेंस को सूचना दी। एम्बुलेंस से उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नवाबगंज पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल फर्रुखाबाद रेफर कर दिया। लोहिया अस्पताल में भी हालत में सुधार न होने पर उन्हें सैफई मेडिकल कॉलेज भेजा गया, लेकिन परिजनों के अनुसार सैफई ले जाते समय रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
संतराम राजपूत का जीवन संघर्षों से भरा था। वह गांव और आसपास के क्षेत्रों में सब्जी बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। परिवार के पास मात्र डेढ़ बीघा कृषि भूमि है। उनके परिवार में पत्नी विमला देवी, दो पुत्र और तीन पुत्रियां हैं। तीनों पुत्रियों का विवाह हो चुका है। बड़े पुत्र दिनेश विवाहित हैं, जबकि छोटे पुत्र अनमोल का विवाह अभी नहीं हुआ है। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी और अब परिवार के मुखिया की मौत ने उन्हें गहरे संकट में डाल दिया है।
घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और सरकारी मुआवजा दिए जाने की मांग की है। स्थानीय सभासद शिवमंगल सिंह गौर ने तत्काल तहसीलदार और कानूनगो को घटना की सूचना देकर पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता दिलाने की मांग की है।
इस हादसे ने एक बार फिर निर्माणाधीन भवनों की गुणवत्ता, तकनीकी निगरानी और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप होता तो एक तेज आंधी में दीवार नहीं गिरती और एक गरीब परिवार का सहारा यूं नहीं छिनता।
फिलहाल प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मामले की जानकारी जुटाई जा रही है। वहीं गांव में हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल है—क्या यह सिर्फ प्राकृतिक आपदा थी या फिर निर्माण कार्य में लापरवाही ने एक बुजुर्ग की जान ले ली?


