क्रासर
38वें मानस सम्मेलन में श्रीराम कथा से भक्ति रस में सराबोर हुए श्रद्धालु, भरत चरित्र और शास्त्र चिंतन पर हुई विस्तृत व्याख्या
फर्रुखाबाद। श्री पाण्डेश्वर नाथ मंदिर (पण्डा बाग) स्थित सत्संग भवन में चल रहे 38वें मानस सम्मेलन में राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त श्रीराम कथा वाचक साध्वी सुश्री प्रज्ञा भारती गिरी ‘पंछी देवी’ (हरिद्वार) ने श्रीरामचरितमानस के विभिन्न प्रसंगों की व्याख्या करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति और आध्यात्मिक ज्ञान से सराबोर कर दिया। कथा के दौरान मानस की चौपाइयों का सस्वर एवं संगीतमय पाठ किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
कथा वाचन के दौरान पंछी देवी ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने संपूर्ण वाङ्मय को श्रीरामचरितमानस में समाहित किया है। मानस ही संसार रूपी भवसागर से पार होने की नौका है। मानव का चिंतन, परमार्थ का ज्ञान, जीवन के विचार और शास्त्रों के मर्म का समीचीन चिंतन तुलसीदास जी ने भगवान श्रीराम की कथा के माध्यम से समाज के सामने प्रस्तुत किया है।
उन्होंने कहा कि श्रीराम ने लंका विजय से पूर्व अपने पावन चरित्र की गरिमा स्थापित की। मानस की कथा केवल भगवान श्रीराम के जीवन का वर्णन नहीं, बल्कि मानव जीवन के कल्याण और मुक्ति की गाथा है। भगवान श्रीराम ने मर्यादा का ऐसा आदर्श प्रस्तुत किया, जो युगों बाद भी मानव समाज का मार्गदर्शन कर रहा है।
पंछी देवी ने कहा कि भक्ति और सेवा ही धर्म के वास्तविक आचरण हैं। इन्हीं के माध्यम से मनुष्य अपने जीवन को सार्थक बना सकता है। आज आवश्यकता है कि लोग शास्त्रों में बताए गए मार्ग और आदर्शों के अनुसार अपने जीवन में आचरण करें। सत्संग के माध्यम से भगवान श्रीराम के दर्शन का मार्ग प्रशस्त होता है और आदर्श आचरण ही परमात्मा के दर्शन की अनुभूति कराता है।
मानस ही भवसागर से पार होने की नौका : पंछी देवी


