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Sunday, August 30, 2026

BITS Pilani में दाखिला दिलाने के नाम पर 46 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाला गिरफ्तार

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लखनऊ: सोशल मीडिया के जरिये प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थान BITS Pilani में दाखिला दिलाने के नाम पर 46 लाख रुपये की साइबर ठगी (cyber fraud) करने वाले गिरोह का लखनऊ की क्राइम ब्रांच और साइबर क्राइम टीम ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के मुख्य आरोपियों में से एक 21 वर्षीय BTech छात्र को गिरफ्तार किया है। आरोपी चौधरी चरण सिंह अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट से फ्लाइट पकड़कर लखनऊ से बाहर जाने की फिराक में था। उसके कब्जे से पुलिस ने 40,225 रुपये नकद, एक Apple MacBook Pro लैपटॉप, तीन मोबाइल फोन, पांच डेबिट/एटीएम कार्ड और दो सिम कार्ड बरामद किए हैं।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी और उसके साथी फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फर्जी एजुकेशन कंसल्टेंसी के नाम से आईडी बनाकर प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाने का प्रचार करते थे। इसके बाद छात्रों और उनके अभिभावकों से संपर्क कर कॉलेज में सीट पक्की कराने और एडमिशन दिलाने का भरोसा दिया जाता था।

मामला तब सामने आया, जब एल्डिको टाउनी, आईआईएम रोड निवासी डॉ. किरन चौबे ने 20 अगस्त को साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनकी पुत्री का BITS Pilani में दाखिला कराने के नाम पर आरोपियों ने अलग-अलग बैंक खातों में ऑनलाइन रकम ट्रांसफर कराई। इसके अलावा सीट सुनिश्चित कराने के नाम पर नकद रकम भी ली गई। आरोपियों ने भरोसा बनाए रखने के लिए फर्जी एडमिशन लेटर, शुल्क रसीद और अन्य कूटरचित दस्तावेज उपलब्ध कराए।

आरोपी अलग-अलग मोबाइल नंबरों और फर्जी नामों से लगातार संपर्क बनाए रखते थे। इस तरह ऑनलाइन और नकद माध्यम से कुल 46 लाख रुपये की ठगी की गई। पुलिस आयुक्त लखनऊ और संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) के निर्देशन में साइबर क्राइम टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और अन्य इनपुट के आधार पर आरोपी की तलाश शुरू की।

जांच के दौरान यशराज बाजपेई की भूमिका सामने आई. इसके बाद पुलिस टीम ने उसे चौधरी चरण सिंह अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ और पीड़िता द्वारा पहचान किए जाने के बाद मामले में उसकी संलिप्तता की पुष्टि हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी अलग-अलग नामों का इस्तेमाल कर लोगों को प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में दाखिला दिलाने का झांसा देकर ठगी करता था।

पुलिस के मुताबिक, गिरोह सबसे पहले सोशल मीडिया पर फर्जी एजुकेशन कंसल्टेंसी की प्रोफाइल तैयार करता था। प्रतिष्ठित कॉलेजों में एडमिशन का दावा कर छात्रों और अभिभावकों को विश्वास में लिया जाता था। भरोसा कायम करने के लिए फर्जी एडमिशन लेटर और रसीदें भेजी जाती थीं। इसके बाद एडमिशन फीस, रजिस्ट्रेशन और सीट बुकिंग समेत अलग-अलग मदों में ऑनलाइन और नकद भुगतान कराया जाता था। रकम मिलने के बाद आरोपी नए मोबाइल नंबर और नए नामों का इस्तेमाल करने लगते थे। इसके बाद धीरे-धीरे पीड़ित से संपर्क तोड़ दिया जाता था।

 

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