नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकिंग सेवाओं में ग्राहकों के साथ होने वाली भ्रामक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नियमों के तहत बैंक और वित्तीय संस्थान ग्राहकों को किसी वित्तीय उत्पाद या सेवा को खरीदने के लिए भ्रमित या दबाव में नहीं डाल सकेंगे। नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।
आरबीआई ने बैंकिंग और डिजिटल वित्तीय सेवाओं में इस्तेमाल होने वाली ऐसी गतिविधियों को चिन्हित किया है, जिनके माध्यम से ग्राहकों को उनकी जरूरत से अलग उत्पाद खरीदने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। ऐसी गतिविधियों पर अब सख्ती की जाएगी।
बैंक ग्राहकों के सामने किसी विकल्प को इस तरह प्रस्तुत नहीं कर सकेंगे कि ग्राहक दूसरे विकल्पों की जानकारी या वास्तविक लागत को समझे बिना निर्णय लेने के लिए मजबूर हो जाए।
नए नियमों के बाद बैंकों को ग्राहकों को वित्तीय उत्पादों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध करानी होगी। उत्पाद की लागत, शर्तें, शुल्क और अन्य आवश्यक जानकारी छिपाने या अस्पष्ट तरीके से प्रस्तुत करने पर रोक रहेगी।
डिजिटल बैंकिंग माध्यमों में भी ग्राहकों की सहमति और जानकारी को प्राथमिकता देनी होगी। ग्राहक को किसी सेवा या उत्पाद को स्वीकार करने के लिए भ्रामक तरीके से प्रेरित नहीं किया जा सकेगा।
आरबीआई के नए प्रावधानों का उद्देश्य बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना और ग्राहकों के हितों की रक्षा करना है। खासतौर पर डिजिटल माध्यमों से बैंकिंग और वित्तीय उत्पादों की बिक्री बढ़ने के बीच ग्राहकों को स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
आरबीआई के नए दिशा-निर्देश 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। इसके बाद बैंकों और संबंधित वित्तीय संस्थानों को ग्राहकों को वित्तीय उत्पाद बेचते समय निर्धारित नियमों और पारदर्शिता संबंधी प्रावधानों का पालन करना होगा।


