लखनऊ। प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में शामिल किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू ) में कैंसर मरीजों को दी जाने वाली महंगी दवाओं और इंजेक्शनों के वितरण में कथित अनियमितताओं का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। यूरोलॉजी विभाग में सामने आए इस प्रकरण ने चिकित्सा जगत के साथ-साथ स्वास्थ्य प्रशासन में भी हलचल मचा दी है।
सूत्रों के अनुसार असाध्य रोग योजना के तहत मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली महंगी दवाओं और इंजेक्शनों के वितरण को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि दवा वितरण प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं, जिससे सरकारी धन और मरीजों दोनों को नुकसान पहुंचा हो सकता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए दवा वितरण से जुड़े कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। संबंधित कर्मचारियों को विभागाध्यक्ष कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है, जबकि पूरे मामले की जांच के लिए गठित समिति ने अपनी पड़ताल तेज कर दी है।
सूत्रों का दावा है कि जांच समिति की रिपोर्ट आज विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपी जा सकती है। रिपोर्ट में यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर बड़ी कार्रवाई की तलवार लटक सकती है।
केजीएमयू प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि दोषियों को केवल विभागीय कार्रवाई का ही सामना नहीं करना पड़ेगा, बल्कि घोटाले से हुई आर्थिक क्षति की वसूली भी की जाएगी। यही वजह है कि रिपोर्ट आने से पहले ही चिकित्सा संस्थान में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि मामला उन दवाओं से जुड़ा है जो कैंसर जैसे गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीजों को सरकारी सहायता के तहत उपलब्ध कराई जाती हैं। ऐसे में यदि जांच में अनियमितताएं साबित होती हैं तो यह केवल वित्तीय गड़बड़ी नहीं बल्कि मरीजों के अधिकारों और स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल होगा।


